Crime: बच्चों को देता रहा जिंदगी का ज्ञान, खुद था उम्रकैद का दोषी! हैदराबाद में कैसे 70 साल की उम्र में एक शिक्षक का अपराध आया सामने?

Crime: बच्चों को देता रहा जिंदगी का ज्ञान, खुद था उम्रकैद का दोषी! हैदराबाद में कैसे 70 साल की उम्र में एक शिक्षक का अपराध आया सामने?
Crime: बच्चों को देता रहा जिंदगी का ज्ञान, खुद था उम्रकैद का दोषी! हैदराबाद में कैसे 70 साल की उम्र में एक शिक्षक का अपराध आया सामने?

Teacher Day Crime Special: शिक्षक को समाज में बच्चों का मार्गदर्शक माना जाता है. वह सिर्फ किताबों का ज्ञान हीं देता, बल्कि विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच फर्क समझाने की जिम्मेदारी भी निभाता है. लेकिन तेलंगाना के हैदराबाद से सामने आया एक मामला इस भरोसे का झकझोर देने वाला है. यहां जिस व्यक्ति ने सालों तक बच्चों को पढ़ाया, वह खुद करीब चार दशक तक कानून की नजरों से बचकर रहा और सरकारी शिक्षक बनकर नौकरी करता रहा. इतना ही नहीं, उसे बेस्ट टीचर का सम्मान भी मिला. आखिर 70 साल की उम्र में उसके अतीत का सच कैसे सामने आया, चलिए जानें.

हत्या के मामले में मिली थी उम्रकैद

मामला संडेला वीरन्ना से जुड़ा है. करीब 1970 के दशक के आखिर में उसे एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. साल 1983 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई. हालांकि, जेल में सजा काटने के करीब छह महीने बाद उसे पैरोल पर रिहा किया गया. पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद वीरन्ना ने जल में वापस सरेंडर नहीं किया और फरार हो गया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद उसने अपनी पहचान और आपराधिक अतीत छिपाकर सामान्य जिंदगी जीना शुरू कर दी.

फरार रहते बना सरकारी शिक्षक

हैरानी की बात यह है कि जेल से बाहर रहने के दौरान वीरन्ना ने महबूबाबाद जिले के डंथलापल्ली में सरकारी शिक्षक के तौर पर नौकरी हासिल कर ली. उसने सालों तक विद्यार्थियों को पढ़ाया और साल 2004 में उसे बेस्ट टीचर अवॉर्ड भी मिला. इतना ही नहीं, वह साल 2013 में सरकारी सेवा से रिटायर भी हो गया. करीब चार दशक तक वह कानून की पकड़ से बाहर रहा, लेकिन मई 2024 में तेलंगाना जेल विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स ने महबूबाबाद पुलिस की मदद से उसे तलाश लिया. इसके बाद उसे चेरलापल्ली सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

हाई कोर्ट ने पैरोल की अर्ज़ी खारिज की

संडेला वीरन्ना की पत्नी, संडेला चरम्मा ने हाल ही में तेलंगाना हाई कोर्ट में वीरन्ना को पिछले तीन सालों से लगातार जेल में रखने और पैरोल न देने को मेडिकल और मानवीय आधार पर चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी अर्ज़ी खारिज कर दी. वीरन्ना के बर्ताव पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए, जस्टिस टी. माधवी देवी ने कहा उनका अपने क्रिमिनल बैकग्राउंड को छिपाना और बाद में सज़ा मिलना और फिर सरकारी नौकरी में वापस आना बहुत कुछ कहता है.

जस्टिस टी. माधवी देवी ने आगे कहा उनकी सरकारी नौकरी और लगातार सर्विस से पता चलता है कि उन्होंने यह नौकरी धोखे से हासिल की थी. जेल से बाहर रहने के चार दशकों के दौरान, संडेला वीरन्ना ने महबूबाबाद ज़िले के दंतलपल्ली में आराम की ज़िंदगी जी.

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