महंगाई की मार झेल रहे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है. जुलाई 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की तस्वीर लगभग साफ हो गई है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के लेबर ब्यूरो ने जून 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अंतिम आंकड़े जारी कर दिए हैं. जून 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह सूचकांक 1.1 अंक की छलांग लगाते हुए 151.9 के स्तर पर पहुंच गया है और इस अवधि का औसत AICPIIW 148.65 रहा है.

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह तय हो गया है कि आगामी त्योहारी सीजन में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी खासी बढ़ोतरी होने जा रही है. अक्सर कर्मचारियों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर सरकार यह महंगाई भत्ता तय कैसे करती है? कुछ लोगों को यह भी लगता है कि शायद जनवरी और जुलाई के इंडेक्स का अंतर निकाल कर डीए तय हो जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. आइए, डिटेल में समझते हैं कि आपकी सैलरी बढ़ाने वाला यह पूरा गणित कैसे काम करता है, एआईसीपीआई इंडेक्स क्या है और जुलाई 2026 में आपकी तनख्वाह कितनी बढ़ने वाली है. इसे समझने के लिए सबसे पहले आप पीछले 12 महीनों का AICPIIW समझ लें.
AICPIIW इंडेक्स: पिछले 12 महीनों का ट्रेंड
| महीना | AICPIIW अंक |
| जुलाई 2025 | 146.5 |
| अगस्त 2025 | 147.1 |
| सितंबर 2025 | 147.3 |
| अक्टूबर 2025 | 147.7 |
| नवंबर 2025 | 148.2 |
| दिसंबर 2025 | 148.2 |
| जनवरी 2026 | 148.6 |
| फरवरी 2026 | 148.5 |
| मार्च 2026 | 149.1 |
| अप्रैल 2026 | 149.9 |
| मई 2026 | 150.8 |
| जून 2026 | 151.9 |
| 12 महीने का औसत | 148.65 |
AICPIIW क्या है,ये सैलरी कैसे तय करता है?
महंगाई भत्ते का सीधा संबंध बाजार में बढ़ रही महंगाई से होता है. इसे मापने के लिए सरकार जिस पैमाने का इस्तेमाल करती है, उसे AICPIIW यानी ‘ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स’ कहा जाता है.
आसान शब्दों में समझें तो, लेबर ब्यूरो देश भर के अलगअलग औद्योगिक केंद्रों से रोजाना इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों की कीमतों का डेटा इकट्ठा करता है. अगर बाजार में इन चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो यह इंडेक्स भी ऊपर चला जाता है. इसी इंडेक्स के आधार पर सरकार यह तय करती है कि महंगाई के अनुपात में कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ाई जानी चाहिए ताकि उनके जीवन स्तर पर कोई बुरा असर न पड़े. यह आंकड़े हर महीने की आखिरी तारीख को जारी किए जाते हैं, जो पिछले महीने की महंगाई का हाल बताते हैं.
AICPIIW का रिकॉर्ड
| लागू होने का समय | इंडेक्स गणना की अवधि | 12 महीनों का औसतन AICPIIW |
| जनवरी 2024 | जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक | 136.62 |
| जुलाई 2024 | जुलाई 2023 से जून 2024 तक | 139.33 |
| जनवरी 2025 | जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक | 141.15 |
| जुलाई 2025 | जुलाई 2024 से जून 2025 तक | 143.54 |
| जनवरी 2026 | जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक | 145.24 |
| जुलाई 2026 | जुलाई 2025 से जून 2026 तक | 148.65 |
महंगाई भत्ते निकालने के लिए 12 महीने का औसत ही क्यों?
डीए की गणना को लेकर एक बहुत बड़ी गलतफहमी यह है कि जनवरी का एआईसीपीआई इंडेक्स और जुलाई के इंडेक्स के बीच का अंतर निकालकर सीधे डीए का प्रतिशत तय कर लिया जाता है. यह धारणा पूरी तरह गलत है. महंगाई भत्ता कभी भी किसी एक या दो महीने के इंडेक्स के अंतर से नहीं निकलता.
सरकार हर छह महीने में महंगाई भत्ते की समीक्षा करती है. इसके लिए सातवें वेतन आयोग के तहत एक तय फॉर्मूला है, जिसमें हमेशा पिछले 12 महीनों के इंडेक्स का औसत निकाला जाता है.
जनवरी के डीए के लिए: पिछले साल के जनवरी से लेकर दिसंबर तक के एआईसीपीआई आंकड़ों को जोड़ा जाता है और फिर 12 से भाग देकर उसका औसत निकाला जाता है.
जुलाई के डीए के लिए: पिछले साल के जुलाई से लेकर मौजूदा साल के जून तक के आंकड़ों का औसत लिया जाता है.
ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी एक महीने में महंगाई के अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने या घटने से डीए के कैलकुलेशन पर कोई एकदम से बड़ा असर न पड़े. 12 महीने का औसत निकालने से पूरे साल भर का एक संतुलित और सटीक आंकड़ा सामने आता है, जो महंगाई की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है.
कैसे निकलता है DA का फाइनल प्रतिशत?
जब 12 महीनों का औसत इंडेक्स निकल जाता है, तो उसे 7वें वेतन आयोग के एक विशेष फॉर्मूले में रखा जाता है. यह फॉर्मूला कुछ इस तरह काम करता है.
फार्मूला: × 100
सबसे पहले 12 महीनों के औसत को 2.88 से गुणा किया जाता है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद जो संख्या आती है, उसमें से 261.42 घटाया जाता है. अंत में, बचे हुए नंबर को वापस 261.42 से भाग देकर 100 से गुणा कर दिया जाता है. इस पूरी गणितीय प्रक्रिया के बाद जो प्रतिशत निकलकर आता है, वही आपका कुल महंगाई भत्ता होता है. इस प्रक्रिया में एक अहम नियम यह भी है कि दशमलव के बाद वाले अंकों को आमतौर पर सरकार द्वारा छोड़ दिया जाता है और केवल पूरे अंक को ही भत्ते के रूप में लागू किया जाता है.
DA का रिकॉर्ड
| लागू होने का समय | कुल DA | पिछली बार के मुकाबले कितनी बढ़ोतरी हुई |
| जनवरी 2024 | 50% | +4% |
| जुलाई 2024 | 53% | +3% |
| जनवरी 2025 | 55% | +2% |
| जुलाई 2025 | 58% | +3% |
| जनवरी 2026 | 60% | +2% |
| जुलाई 2026 | 63% | +3% |
जुलाई 2026 में 4 फीसदी DA कैसे बढ़ सकता है?
जब हम इस 148.65 के औसत को वेतन आयोग के फॉर्मूले में रखते हैं, तो कुल महंगाई भत्ता 63.77 प्रतिशत बैठता है. वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है. अब अगली बढ़ोतरी का पूरा गणित सरकार की ‘राउंडिंग ऑफ’ नीति पर टिका हुआ है.
DA % = × 100 = 63.7639…% ≈ 63.77%
अगर सरकार अपने पुराने नियमों पर चलते हुए दशमलव के बाद के अंकों को नजरअंदाज करती है और केवल निचले पूर्णांक को मानती है, तो मौजूदा डीए 60 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 63 प्रतिशत हो जाएगा. इस स्थिति में कर्मचारियों को 3 प्रतिशत की ठोस बढ़ोतरी मिलेगी. वहीं, दूसरी ओर कर्मचारी यूनियनों का स्पष्ट रुख है कि 63.77 को राउंड ऑफ करके नजरअंदाज करने के बजाय, इसे निकटतम ऊपरी पूर्णांक में बदला जाए. अगर सरकार यूनियनों की यह मांग मान लेती है, तो यह आंकड़ा 64 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे कर्मचारियों को एकमुश्त 4 प्रतिशत का बड़ा लाभ मिलेगा.
इस बढ़ोतरी से सैलरी में कितना इजाफा होगा, यह भी समझ लीजिए.
अगर सरकार 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी देती है, तो जिनका न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये है, उनकी मासिक सैलरी में सीधे तौर पर 540 रुपये का इजाफा होगा. वहीं, अगर 4 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला लिया जाता है, तो इसी बेसिक पे वाले कर्मचारी की सैलरी हर महीने 720 रुपये बढ़ जाएगी. वहीं, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का बेसिक पे ज्यादा है, उनके लिए यह आर्थिक इजाफा हजारों रुपये महीने का होगा.
कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी की सौगात और एरियर का क्या होगा?
आंकड़े भले ही जून में फाइनल हो जाते हैं, लेकिन सरकार की प्रक्रिया में थोड़ा वक्त लगता है. वित्त मंत्रालय इन आंकड़ों के आधार पर एक प्रस्ताव तैयार करता है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाता है. केंद्र सरकार आमतौर पर जुलाई से दिसंबर की छमाही के लिए महंगाई भत्ते का आधिकारिक ऐलान सितंबर या अक्टूबर के महीने में करती है.
इस बार भी पूरी उम्मीद है कि त्योहारी सीजन के आसपास कैबिनेट से इसे हरी झंडी मिल जाएगी. कर्मचारियों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि घोषणा चाहे सितंबर में हो या अक्टूबर में, यह बढ़ी हुई दर 1 जुलाई 2026 से ही लागू मानी जाएगी. इसका मतलब ये है कि जुलाई से लेकर घोषणा होने तक के महीनों का बकाया पैसा भी कर्मचारियों के बैंक खातों में एकमुश्त जुड़कर आएगा. यह त्योहारी सीजन में कर्मचारियों के लिए किसी बड़े बोनस से कम नहीं होगा.