शेयर बाजार में बुधवार को डीसीएम श्रीराम के शेयरों ने सच में कमाल कर दिया. सुबह बाजार खुलते ही इस कंपनी के शेयर खरीदने के लिए निवेशकों में होड़ मच गई. हालात ये थे कि देखते ही देखते शेयर 13 फीसदी के करीब उछल गया और बीएसई पर 1,186.50 रुपये के उच्चतम स्तर तक जा पहुंचा. सुबह सवा नौ बजे के आसपास यह शेयर 8.3 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहा था, जिसने सेंसेक्स की तेजी को भी पीछे छोड़ दिया. एक आम निवेशक के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर रातोंरात ऐसा क्या हो गया? इसका सीधा जवाब है कंपनी के उम्मीद से कहीं बेहतर तिमाही नतीजे. कंपनी का मुनाफा छह गुना से ज्यादा बढ़ गया है, जिसने बाजार का पूरा ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है.

मुनाफे के पीछे का असली गणित
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के आंकड़े देखकर हर कोई हैरान है. कंपनी को इस बार 693 करोड़ रुपये का बड़ा शुद्ध मुनाफा हुआ है. अगर हम पिछले साल इसी समय की बात करें, तो कंपनी ने सिर्फ 113 करोड़ रुपये कमाए थे. लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है. इस शानदार मुनाफे के पीछे एक खास वजह भी छिपी है.
दरअसल, कंपनी को अपने नियमित कारोबार के अलावा 79.42 करोड़ रुपये का एकमुश्त फायदा हुआ है. कंपनी ने अपनी एक सब्सिडियरी कंपनी की आधी हिस्सेदारी बेची, जिससे उसे करीब 12 करोड़ रुपये मिले. इसके साथ ही, मोकिला गांव में पड़ी एक खाली जमीन को बेचकर भी करीब 68 करोड़ रुपये जुटाए गए. इन दोनों सौदों ने मिलकर कंपनी की बैलेंस शीट को बहुत मजबूत बना दिया है.
केमिकल और फेनेस्टा बिजनेस ने पकड़ी रफ्तार
जमीन और हिस्सेदारी से मिले पैसों को अगर किनारे भी रख दें, तो कंपनी का अपना मुख्य कारोबार भी बहुत अच्छी स्थिति में है. कुल कमाई की बात करें तो यह सालाना आधार पर 9.3 फीसदी बढ़कर 3,565 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल 3,262 करोड़ रुपये थी.
इस कमाई को रफ्तार देने में सबसे बड़ा हाथ केमिकल सेक्टर का रहा, जिसने 33 फीसदी की शानदार ग्रोथ दर्ज की है. इसके अलावा, घरों में लगने वाले दरवाजे और खिड़कियां बनाने वाले इनके मशहूर ब्रांड ‘फेनेस्टा बिल्डिंग सिस्टम्स’ ने भी 22 फीसदी की तरक्की की है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कामकाज के स्तर पर कंपनी का मुनाफा 336 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और इसका मार्जिन सुधरकर 9.4 फीसदी हो गया है. यह साफ दिखाता है कि कंपनी का रोजमर्रा का बिजनेस बिल्कुल सही दिशा में जा रहा है.
ग्लोबल टेंशन के बीच कंपनी की फ्यूचर प्लानिंग
आजकल दुनिया भर के बाजार कई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव की वजह से सप्लाई चेन पर काफी असर पड़ा है और ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से महंगाई फिर से बढ़ने का डर पैदा हो गया है. कंपनी के मैनेजमेंट, जिसमें अजय श्रीराम और विक्रम श्रीराम शामिल हैं, ने इन चुनौतियों को खुले तौर पर माना है.
उनका यह भी कहना है कि भारत में इस बार मानसून की शुरुआत थोड़ी खराब रही, जिसका असर ग्रामीण इलाकों की मांग पर पड़ा है. हालांकि, इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उनका भरोसा भारत के औद्योगिक विकास पर कायम है. मैनेजमेंट का फोकस अब अपनी नई क्षमता को जल्द से जल्द शुरू करने और सही जगह पैसा लगाने पर है. उनकी बैलेंस शीट में इतनी ताकत है कि वे दुनिया भर में हो रही इस आर्थिक उथलपुथल से आसानी से निपट सकते हैं और अपने कारोबार को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं.