भले ही सरकार की विदेशी मुद्रा जुटाने की स्कीम काफी अच्छी चल रही हो, एनआरआई लगातार इस स्कीम में निवेश कर भारत में डॉलर का या यूं कहें कि विदेशी मुद्रा का इजाफा कर रहे हों, वहीं दूसरी ओर बैंकों के लिए एक चिंता करने वाली खबर सामने आई है. एनालिस्ट्स का कहना है कि विदेशी मुद्रा अनिवासी यानी FCNR डिपॉजिट्स को आकर्षित करने के लिए बैंक जो लेवरेज दे रहे हैं, उससे मार्जिन पर प्रेशर पड़ सकता है. इसका कारण है कि विदेशों में ब्याज दरें कम हैं और लेंडिंग स्प्रेड कम है. ICICI बैंक, HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे कम फंडिंग कॉस्ट वाले बैंकों पर इसका असर ज्यादा होने की संभावना है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उन्हें डिपॉजिट रेट्स को आकर्षक बनाए रखते हुए विदेशों में प्रतिस्पर्धी लेंडिंग रेट्स की पेशकश करनी पड़ सकती है.

100 डॉलर पर 800 डॉलर का लोन
ICICI बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संदीप बत्रा ने ईटी की रिपोर्ट में माना कि FCNR स्कीम के तहत जुटाए गए नए डिपॉजिट्स की कॉस्ट ज्यादा हो सकती है. बत्रा ने बैंक की पोस्टअर्निंग्स मीडिया कॉल के दौरान कहा कि FCNR डिपॉजिट्स से NIM थोड़ा कम हो सकता है. हालांकि, हम मुनाफे के लिए रिस्कबैलेंस दृष्टिकोण बनाए रखते हुए अपने पास मौजूद सभी तरीकों का बेहतर इस्तेमाल करना जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि अगर घरेलू ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होता है, तो मार्जिन मौजूदा रेंज में ही रहना चाहिए.
इक्विरस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट रोहन मंडोरा ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि बैंक अपने ग्राहकों को अलगअलग लेवरेज प्रोडक्ट्स की पेशकश कर रहे हैं, जिनमें से कुछ तो आठ या 9 गुना तक लेवरेज दे रहे हैं. ऐसे में, हर 100 डॉलर के डिपॉजिट पर, बैंक से लगभग 80 डॉलर का लोन लिया जा सकता है. विदेशों में ब्याज दरें कम होने के कारण, ये लोन बहुत कम दरों पर और आमतौर पर 80 से 90 बेसिस पॉइंट के कम मार्जिन पर दिए जाएंगे, जिससे बैंकों की मुनाफे पर कुछ असर पड़ सकता है.
जानकारों की चेतावनी
ऑफर किए जाने वाले लेवरेज की मात्रा कस्टमर के क्रेडिट प्रोफाइल और बैंक के साथ उनके संबंधों पर निर्भर करेगी. इन फंड्स का इस्तेमाल भारत में लोन देने के लिए भी किए जाने की संभावना है, जहां बैंक ज्यादा रिटर्न कमा सकते हैं. हालांकि, एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि खास FCNR स्कीम का फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक इन फंड्स का मुनाफे के साथ इस्तेमाल कितनी अच्छी तरह कर पाते हैं. 21 जुलाई को एक नोट में, मैक्वेरी कैपिटल सिक्योरिटीज के एनालिस्ट सुरेश गणपति ने कहा कि चूंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का स्वैप केवल मूल राशि को कवर करता है. इसलिए FCNR डिपॉजिट्स पर 6 फीसदी की पेशकश करने वाले बैंक की प्रभावी कॉस्ट इंटरेस्ट स्वैप कॉस्ट को जोड़ने के बाद 6.5 फीसदी से अधिक हो जाती है.
इंश्योरेंस कॉस्ट जोड़ने के बाद और बढ़ जाती है, जिससे यह घरेलू टर्म डिपॉजिट दरों के बराबर हो जाती है. गणपति ने कहा कि बस बात यह है कि FCNR पर आपको CRR या SLR नहीं रखना पड़ता… इसलिए, उस लिहाज़ से यह फ़ायदेमंद है. अगर पैसे लगाने के अच्छे मौके हों, तो आपको डिपॉजिट की जरूरत होती है… तो असल में, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप उन्हें कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन यह सोच कि यह ‘सस्ता’ पैसा है, अब पूरी तरह गलत साबित हो चुकी है.
इन बैंकों में सबसे कम मार्जिन
ICICI बैंक ने जून 2026 में खत्म हुई तिमाही के लिए 4.36 फीसदी का नेट इंटरेस्ट मार्जिन बताया, जबकि एक साल पहले यह 4.34 फीसदी था. यह बैंक उन लेंडर्स में शामिल है जिनकी फंड की कॉस्ट 4.51 फीसदी इंडस्ट्री में सबसे कम है. इसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र , HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक भी शामिल हैं. एनालिस्ट का कहना है कि आक्रामक लेवरेज और प्राइसिंग कॉम्पिटिशन से ऐसे बैंकों के लिए फंड की मिलीजुली कॉस्ट बढ़ सकती है. आनंद राठी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट युवराज चौधरी ने कहा कि जिन बैंकों के लिए फंड की कॉस्ट ज्यादा है, उनके लिए ये अतिरिक्त डिपॉजिट बहुत ज्यादा अलग कॉस्ट पर नहीं आएंगे.
इसका असर उन बैंकों पर ज्यादा पड़ेगा जिन्होंने अब तक अपनी फंड की लागत को कंट्रोल में रखा है, क्योंकि इस बात की संभावना है कि फंड की मिलीजुली कॉस्ट बढ़ जाएगी. RBI के डेटा के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध FCNR स्कीम के तहत 17 जुलाई 2026 तक 32 बिलियन डॉलर से ज्यादा रकम जमा की गई है. डिपॉजिट अमेरिकी डॉलर, कनाडाई डॉलर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन जैसी विदेशी मुद्राओं में किए और निकाले जा सकते हैं. इन डिपॉज़िट पर मिलने वाले ब्याज पर भारत में टैक्स नहीं लगता है.