EPFO ने किया बड़ा बदलाव, अब 25000 की बेसिक सैलरी पर कटेगा PF, समझिए आपकी सेविंग्स और पेंशन पर क्या होगा असर​​

EPFO ने किया बड़ा बदलाव, अब 25000 की बेसिक सैलरी पर कटेगा PF, समझिए आपकी सेविंग्स और पेंशन पर क्या होगा असर​​
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EPF Wage Ceiling Update: EPF और EPS के लिए मेंडेटरी कवरेज की लिमिट 15000 प्रति महीना है. ये लिमिट सितंबर 2014 में 6,500 से बढ़ाकर 15000 की गई थी. अब इसमें 10 हजार का इजाफा करके 25 हजार किया गया है. करीब 12 साल बाद लिमिट में बदलाव किया गया है.

केंद्र सरकार पुरानी ‘EPF स्कीम 1952’ की जगह अब ‘EPF स्कीम 2026’ को नोटिफाई कर दिया है. (AI जेनरेटेड)

सैलरीड क्लास के लिए प्रॉविडेंट फंड बहुत बड़ा सपोर्ट होता है. ये रिटायरमेंट फंड के तौर पर काम करता है. अभी तक मिनिमम 15 हजार की सैलरी होने पर PF अकाउंट खोला जाता है. लेकिन, अब कंपनियों को 25 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (16 सितंबर) को एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड (EPF) और एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी की लिमिट 15000 से बढ़ाकर 25000 प्रति महीना कर दी है. पूरे 12 साल बाद लिमिट में बदलाव हुआ है.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि इससे 51 लाख एम्प्लॉयी को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा. पहले बिना सैलरी कटे कर्मचारी के हाथ में पूरी सैलरी मिल जाती थी, लेकिन 25 हजार रुपये की लिमिट होने के बाद PF कटने से कर्मचारी की सेविंग बढ़ेगी. इससे रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए बड़ा फंड बनेगा. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा एम्प्लॉयी को EPF जैसी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के दायरे में लाना है. यह फैसला 17 सितंबर 2026 (विश्वकर्मा जयंती) से प्रभावी होने जा रहा है. इससे सरकार पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा.

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मिनिमम सैलरी और रिवाइज्ड वेज सीलिंग में क्या फर्क है?

मिनिमम सैलरी का मतलब है कि किसी एम्प्लॉयी को कम-से-कम कितनी सैलरी मिलनी चाहिए. अगर किसी नियम में मिनिमम सैलरी15000 रुपये है, तो इसका मतलब होगा कि एम्प्लॉयी को किसी काम के लिए महीने में कम से कम 15000 रुपये मिलना चाहिए. जबकि, Wage Ceiling का मतलब किसी नियम के लागू होने की ऊपरी सीमा से है. EPFO के मामले में 15000 की लिमिट को 25000 करने का मतलब यह नहीं है कि एम्प्लॉयी की मिनिमम सैलरी 25000 हो गई. इसका मतलब है कि मेंडेटरी EPF कवरेज के लिए वेज सीलिंग 25000 तक बढ़ाई जा रही है.

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EPF में 15000 की लिमिट को 25000 करने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले एक दशक में यानी 2014 के बाद से सैलरी और कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ गई है. देश के करोड़ों एम्प्लॉयी को बढ़ती महंगाई के बीच बेहतर सोशल सिक्योरिटी देने के लिए EPFO की वेज सीलिंग को 15000 से बढ़ाकर 25000 करने की जरूरत महसूस की गई. EPF की वेज सीलिंग में आखिरी बार बदलाव साल 2014 में हुआ था. इन 12 सालों में मिनिमम वेज, महंगाई और औसत सैलरी में काफी बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से पुरानी लिमिट व्यावहारिक नहीं रह गई थी. सैलरी बढ़ने के कारण कई कर्मचारी अनिवार्य सुरक्षा से बाहर हो रहे थे. मौजूदा नियम के तहत सिर्फ 15000 या उससे कम बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए ही EPF में शामिल होना अनिवार्य था. लिमिट को 25000 करने से वे एम्प्लॉयी भी अनिवार्य रूप से इस दायरे में आ जाएंगे जिनकी बेसिक सैलरी 15000 से 25000 के बीच है. इससे इन लाखों कामगारों को भविष्य निधि (EPF), पेंशन (EPS) और बीमा (EDLI) का कानूनी लाभ मिलेगा.

25 हजार की लिमिट से सैलरी का स्ट्रक्चर कितना बदलेगा?

PF की मेंडेटरी लिमिट मुख्य रूप से बेसिक सैलरी + DA पर लागू होती है. इसे पूरे CTC या ग्रॉस सैलरी पर लागू नहीं किया जाता. नए नियमों के तहत अगर किसी एम्प्लॉयी की बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता (DA) अगर 25000 या उससे कम है, तो कंपनी को उस एम्प्लॉयी को EPF में शामिल करना अनिवार्य है. अगर बेसिक सैलरी + DA 25000 से ज्यादा है, तो नई जॉइनिंग पर EPF अनिवार्य नहीं है. हालांकि, ऐसा तब ही होगा जब एम्प्लॉयी पहले से EPF मेंबर न हो. यानी 25 हजार की लिमिट से सैलरी का स्ट्रक्चर कुछ खास नहीं बदलने वाला है.

क्या नए रूल से PF का ज्यादा पैसा कटेगा?

सिर्फ सैलरी लिमिट बढ़ने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि हर एम्प्लॉयी के लिए कॉन्ट्रिब्यूशन का आधार भी अपने आप 25000 हो जाएगा. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अगर 12% कॉन्ट्रिब्यूशन के हिसाब से देखें, तो एम्प्लॉयी का अनिवार्य EPF कॉन्ट्रिब्यूशन हर महीने 1,800 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो सकता है. इसका आसान मतलब यह है कि एम्प्लॉयी को हर महीने 1,200 रुपये ज्यादा PF में जमा करना पड़ सकता है. सालभर में यहबढ़ोतरी 14,400 रुपये की होगी. हालांकि, इस बारे में अंतिम नियम, कॉन्ट्रिब्यूशन का कैल्कुलेशन और नियम लागू होने की तारीख सरकार के नोटिफिकेशन से साफ होगी. अभी सिर्फ कैबिनेट का फैसला आया है. ऐसे में सैलरी लिमिट बढ़ाने और कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़ाने को एक ही चीज़ नहीं माना जा सकता है.

एम्प्लॉयी की टेक होम सैलरी पर क्या असर होगा?

इस बदलाव का एक अहम पहलू एम्प्लॉयी की टेक-होम सैलरी है. EPF में एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर दोनों की ओर से कॉन्ट्रिब्यूशन होता है. एम्प्लॉयी के मामले में PF में कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़ने से उनकी हाथ में आने वाली सैलरी और भविष्य में जमा होने वाली रकम दोनों पर असर पड़ सकता है. यानी हर महीने टेक होम सैलरी में कुछ रकम कम हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ PF अकाउंट में ज्यादा रकम जमा होने से रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स बढ़ सकती है.

क्या 25000 से कम सैलरी वालों का PF नहीं कटेगा?

ऐसा नहीं है. अगर किसी एम्प्लॉयी की PF वाली बेसिक + DA सैलरी 25000 से कम है, तो उसका PF कट सकता है. नए सिस्टम में पात्र कर्मचारियों के लिए मेंडेटरी कवरेज का दायरा बढ़ेगा.

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फिर 1800 वाली लिमिट का क्या होगा?

अभी 15000 की वैधानिक वेज सीलिंग का 12% 1800 होता है. इसलिए 1800 को लेकर इतना कंफ्यूजन है. अगर नई 25000 की सीलिंग लागू होती है और कॉन्ट्रिब्यूशन इसी आधार पर किया जाता है, तो 25,000 × 12% = 3000 रुपये होगा. यानी मौजूदा 1800 की जगह वैधानिक वेज सीलिंग के हिसाब से एम्प्लॉयी का कॉन्ट्रिब्यूशन 3000 रुपये तक हो सकता है. लेकिन, हर एम्प्लॉयी के PF की कटौती अपने-आप 3000 हो जाएगी, ऐसा नहीं होगा. एक्चुअल डिडक्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका PF वेज क्या है. आपकी कंपनी किस आधार पर PF कॉन्ट्रिब्यूशन करती है.

रिटारयमेंट फंड में कितना फायदा?

अगर PF कॉन्ट्रिब्यूशन 1800 से बढ़कर 3000 होता है, तो एम्प्लॉयी के PF खाते में हर महीने 1200 से ज्यादा जाएगा. हिसाब लगाए तो साल में ये रकम 1200 × 12 = 14,400 रुपये तक एड होगा. इसके ऊपर कंपनी का कॉन्ट्रिब्यूशन भी होता है. इसलिए लंबे समय में रिटायरमेंट कॉर्पस बढ़ सकता है.

पेंशन पर क्या होगा असर?

वेज सीलिंग बढ़ने से EPS कॉन्ट्रिब्यूशन की लिमिट भी बढ़ेगी. मौजूदा समय में एम्प्लॉयर के 12% कॉन्ट्रिब्यूशन में से 8.33% हिस्सा एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है. इसकी मैक्सिमम लिमिट 15000 की सैलरी पर 1250 प्रति महीना तय की गई है. लेकिन, EPF की वेज सीलिंग यानी बेसिक लिमिट 25000 रुपये बढ़ने पर EPS कॉन्ट्रिब्यूशन हर महीने में 2083 रुपये हो जाएगा. इससे पेंशन योग्य सैलरी का बेस बढ़ेगा. 25000 की नई सीलिंग लागू होते ही EPS के कैल्कुलेशन में सीधा 66.6% का उछाल आने वाला है. बता दें कि हर महीने पेंशन पाने के लिए EPFO में कम से कम 10 साल की नौकरी पूरी करना अनिवार्य है. अगर सर्विस 10 साल से कम है, तो आप केवल पेंशन फंड की एकमुश्त राशि निकाल सकते हैं.

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