गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप केवल भारत की ही सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट कंपनी नहीं चलाता, बल्कि इसका नेटवर्क अब दुनिया के रणनीतिक समुद्री मार्गों तक फैल चुका है. अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड मौजूदा समय में ग्लोबल पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की सबसे तेजी से उभरती ताकतों में से एक है.

ताजा खबर ये है कि अडानी ग्रुप अपनी जड़ों को ब्रिटेन तक फैलाने की सोच रहा है. ब्रिटिश पोर्ट कंपनी Associated British Ports में कंट्रोल हासिल करने की कोशिशों की खबरें सामने आ रही हैं. इस ब्रिटिश कंपनी के पास 21 पोर्ट कंट्रोल में है. अगर ये डील हो जाती है तो अडानी पोर्ट दुनिया की प्रमुख पोर्ट कंपनियों में से एक होगी.
इस खबर के सामने आने के बाद यह सवाल चर्चा में है कि अडानी का पोर्ट कारोबार पूरी दुनिया में कहांकहां फैला है और इस कारोबार का साइज कितना बड़ा है. आइए इसे आसान भाषा में और विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं….
ब्रिटिश कंपनी पर अडानी की नजर
मौजूदा समय में Associated British Ports में लगभग 63.9 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है, जो दो कनाडाई पेंशन फंड्स के पास है. इन दोनों फंड्स ने अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए बैंकर्स को नियुक्त किया है. कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड के पास 30 फीसदी और ओंटारियो म्युनिसिपल एम्प्लॉइज रिटायरमेंट सिस्टम के पास ABP की 33.88 फीसदी हिस्सेदारी है. इसी स्टेक पर अडानी पोर्ट नजर गढ़ाए हुए हैं.
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, ABP इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में रणनीतिक रूप से अहम 21 बंदरगाहों की मालिक है और उनका संचालन करती है. इनमें टनेज के हिसाब से UK का सबसे बड़ा पोर्ट इमिंगहम और देश का नंबर वन एक्सपोर्ट पोर्ट साउथैम्पटन शामिल हैं. साउथैम्पटन से हर साल 40 अरब पाउंड का एक्सपोर्ट होता है. ABP ऑफशोर विंड इंडस्ट्री का पार्टनर भी है और इस सेक्टर की 50 फीसदी से ज्यादा गतिविधियों के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस की सुविधा देता है.
पहले कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं…
- भारत में दबदबा: भारत के कुल समुद्री कार्गो ट्रैफिक का लगभग 27 फीसदी और कंटेनर वॉल्यूम का 44 फीसदी से अधिक हिस्सा अकेले अडानी पोर्ट्स संभालता है.
- ग्लोबल मौजूदी: इजराइल, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया जैसे देशों में अडानी के पास रणनीतिक बंदरगाह और टर्मिनल्स हैं.
- कैपेसिटी में भी कोई कमी नहीं: अडानी पोर्ट्स की सालाना कार्गो कैपेसिटी 650 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक है.
- फ्लैगशिप पोर्ट: गुजरात का मुंद्रा पोर्ट भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट है जो अडानी पोर्ट के हाथों में है.
भारत में अडानी का पोर्ट साम्राज्य
अडानी ने भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर बंदरगाहों की एक ऐसी चेन बनाई है, जिससे देश के अधिकांश आयातनिर्यात पर इनका सीधा प्रभाव है.
- मुंद्रा पोर्ट : यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक प्राइवेट पोर्ट है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यह अकेला 180 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो संभालता है.
- विझिंजम पोर्ट: भारत का पहला मदरशिप डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट हब. इसके शुरू होने से भारत को अंतरराष्ट्रीय कार्गो के लिए कोलंबो या सिंगापुर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
- कृष्णपटनम व गंगावरम : दक्षिण और पूर्व भारत में विशाल बल्क और कंटेनर कार्गो संभालने वाले पोर्ट्स.
- धामरा : भारत के पूर्वी हिस्से में कोयला, लौह अयस्क और एलएनजी का प्रमुख गेटवे.
इंटरनेशनल लेवल पर कहांकहां फैला है कारोबार?
अडानी ने ग्लोबल लेवल पर उन बंदरगाहों को निशाना बनाया है जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ट्रेड रूट्स पर स्थित हैं. इजराइल में हाइफा, तंजानिया में दार एस सलाम, कोलंबो में कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल और ऑस्ट्रेलिया में नॉर्थ क्वींसलैंड एक्सपोर्ट टर्मिनल जैसे चार इंटरनेशनल पोर्ट्स भी चलाती है. खास बात तो ये है कि इनकी कैपेसिटी 144 मिलियल मिट्रिक टन है. इन चारों देशों के पोर्ट पर अडानी पोर्ट का अच्छा खासा दखल है.
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देश |
पोर्ट/टर्मिनल का नाम |
महत्व और स्थिति |
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इजराइल |
हाइफा पोर्ट |
भूमध्य सागर का बेहद रणनीतिक पोर्ट. अडानी के पास इसमें 70% हिस्सेदारी है. |
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श्रीलंका |
कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल |
हिंद महासागर के प्रमुख ट्रांसशिपमेंट रूट पर स्थिति. अडानी इसमें बहुलांश भागीदार है. |
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ऑस्ट्रेलिया |
एबट प्वाइंट/NQXT |
नॉर्थ क्वींसलैंड एक्सपोर्ट टर्मिनल का संचालन, जहां से बड़े पैमाने पर कोयले का निर्यात होता है. |
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तंजानिया |
दार एस सलाम CT2 |
अफ्रीका महाद्वीप में प्रवेश का बड़ा जरिया. कंटेनर टर्मिनल 2 का संचालन. |
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ब्रिटेन |
प्रस्तावित असोसिऐटेड ब्रिटिश पोर्ट्स |
ब्रिटेन के 21 बंदरगाहों को चलाने वाली सबसे बड़ी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की योजना. |
कितना बड़ा है अडानी का यह कारोबार?
कारोबार के आकार और वित्तीय ताकत के मामले में अडानी पोर्ट्स का स्तर इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
- वार्षिक कार्गो हैंडलिंग: वित्तीय वर्ष 202425 के दौरान अडानी पोर्ट्स ने रिकॉर्ड 420 मिलियल मिट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल किया, जो हर साल तेजी से बढ़ रहा है.
- मार्केट कैपिटलाइजेशन: APSEZ भारत की सबसे मूल्यवान लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक है, जिसका मार्केट कैप करीब 4 लाख करोड़ रुपए है.
- मार्केट शेयर: भारत में समुद्र के रास्ते आनेजाने वाले हर 4 टन कार्गो में से 1 टन और हर 2 में से 1 कंटेनर अडानी के पोर्ट से होकर गुजरता है.
- नेटवर्क इंटीग्रेशन: अडानी सिर्फ बंदरगाह नहीं चलाता, बल्कि पोर्ट्स के साथ 100+ मालगाड़ियां, 10 से अधिक ड्राई पोर्ट्स , और लाखों वर्ग फीट के कोल्ड स्टोरेज व लॉजिस्टिक्स पार्क भी संचालित करता है.
अडानी की फ्यूचर स्ट्रैटिजी
अडानी का पोर्ट मॉडल केवल जहाजों को खड़ा करने और सामान उतारने तक सीमित नहीं है. उनकी रणनीति को 3 मुख्य स्तंभों में समझा जा सकता है:
- ट्रांसपोर्ट टू लॉजिस्टिक्स: जहाजों से सामान उतारने से लेकर उसे ट्रेन या ट्रक के जरिए सीधे फैक्टरी तक पहुँचाने का पूरा एकीकृत नेटवर्क .
- SEZ और इंडस्ट्रियल पार्क: मुंद्रा जैसे बंदरगाहों के पास विशाल स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन बनाए गए हैं, जहां कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां लगाती हैं और सीधे पोर्ट से कच्चा माल मंगाकर तैयार माल निर्यात करती हैं.
- ट्रांसशिपमेंट हब पर कब्जा: कोलंबो, विझिंजम और हाइफा के जरिए अडानी दुनिया के उन रूटों पर नियंत्रण बना रहा है जहां से अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाज गुजरते हैं.
क्या है 2030 का टारगेट
अडानी ग्रुप का लक्ष्य वर्ष 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर बनना है. भारत के विशाल समुद्र तट पर अपना एकछत्र राज स्थापित करने के बाद, अब अडानी का ध्यान यूरोप, अफ्रीका और मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों को आपस में जोड़ने पर है. यही कारण है कि दुनिया भर की सरकारें और इंफ्रास्ट्रक्चर विश्लेषक अडानी के हर नए ग्लोबल पोर्ट सौदे पर बारीक नजर रखते हैं. वित्त वर्ष 2026 में, APSEZ ने 501 mt कार्गो संभाला. पोर्ट ऑपरेटर का लक्ष्य 2030 तक कार्गो हैंडलिंग क्षमता को 1 बिलियन टन तक बढ़ाना है, और तब तक 850 MT कार्गो संभालने की उम्मीद है. यह टग्स और ऑफशोर सपोर्ट वेसल्स के अपने बेड़े को अभी के 136 से बढ़ाकर 200 से ज़्यादा करके मरीन सर्विसेज बिजनेस को बढ़ाने की भी योजना बना रही है.
निवेश को एक लाख करोड़ तक बढ़ाना
APSEZ के अनुसार वह क्षमता बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें से 63,000 करोड़ रुपए घरेलू पोर्ट्स बिजनेस को बढ़ाने के लिए तय किए गए हैं. इंटरनेशनल पोर्ट विस्तार के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 7,000 करोड़ रुपए तय किया गया है, जो मुख्य रूप से कोलंबो टर्मिनल के दूसरे फेज के निर्माण के लिए है. इस कैपिटल एक्सपेंडिचर में रणनीतिक मर्जर और अधिग्रहण शामिल नहीं हैं. हालांकि मार्च के आखिर में पोर्ट ऑपरेटर के पास 12,193 करोड़ रुपए की कैश और कैश के बराबर के असेट्स थे, लेकिन उस पर कुल 55,103 करोड़ रुपए का कर्ज है.
6 महीने में निवेशकों को 22 फीसदी की कमाई
अगर बात अडानी पोर्ट के शेयरों की करें तो बीते 6 महीने में 22 फीसदी का रिटर्न दिया है. जबकि मौजूदा साल में करीब 17 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. अगर बात एक साल की करें तो निवेशकों को करीब 24 फीसदी की कमाई कराई है. जबकि बीते 5 साल में अडानी पोर्ट के शेयरों ने 156 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. करीब 20 बरस में कंपनी ने निवेशकों को 835 फीसदी का रिटर्न दिया है. अगर बात आज यानी बुधवार की करें तो करीब 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है. जिसके बाद कंपनी का शेयर 1726.30 रुपए पर कारोबार कर रही है. जबकि कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी का शेयर 1,720.45 रुपए पर भी गया.