
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक नए और आधुनिक विधान भवन की योजना अब आकार लेने लगी है। प्रस्तावित नया विधान भवन भारतीय स्थापत्य कला और आधुनिक तकनीक के मेल का उदाहरण होगा। गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की करीब 245 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस विशाल विधायी परिसर को कमल के फूल से प्रेरित डिजाइन में विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने प्रस्तावित मॉडल को सोशल मीडिया पर साझा किया है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। करीब 5,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 202930 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसा विधायी परिसर तैयार करना है, जो आने वाले दशकों की जरूरतों को पूरा कर सके।
कैसा होगा नया विधान भवन का डिजाइन?
प्रस्तावित नए विधान भवन की सबसे खास बात इसका डिजाइन होगा। ऊपर से देखने पर इसकी संरचना कमल की पंखुड़ियों जैसी दिखाई देगी। कमल भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विकास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। डिजाइन के अनुसार बीच में विधानसभा का मुख्य सभागार होगा। चारों ओर प्रशासनिक कार्यालय, पुस्तकालय और शोध केंद्र विकसित किए जाएंगे। परिसर को आधुनिक सुविधाओं और हरित तकनीक से लैस किया जाएगा।
कितनी होगी क्षमता और क्याक्या सुविधाएं मिलेंगी?
नए विधायी परिसर में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़ी क्षमता वाली व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। परियोजना में शामिल होंगे 700 सीटों वाला विधानसभा सदन, 200 सीटों वाली विधान परिषद, 1,000 सीटों वाला संयुक्त अधिवेशन हॉल, 5,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग, आधुनिक सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, विधायक आवास, डिजिटल बैठक कक्ष, शोध केंद्र और पुस्तकालय प्रस्तावित परिसीमन के बाद विधानसभा सदस्यों की संभावित बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए भवन की क्षमता तय की गई है।
कैसे चुना गया कमल वाला मॉडल?
लखनऊ विकास प्राधिकरण के अनुसार, नए विधान भवन के डिजाइन के लिए देशभर की 48 कंसल्टेंट एजेंसियों ने अपने प्रस्ताव दिए थे। इनमें से 12 डिजाइनों का प्रस्तुतीकरण देखने के बाद तीन प्रस्ताव शासन को भेजे गए। इनमें कमल के आकार वाले डिजाइन को प्राथमिकता दी गई है। अब एलडीए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
पर्यावरण का भी रखा जाएगा ध्यान
नए विधायी परिसर को पर्यावरण अनुकूल बनाने की योजना है। इसके लिए सौर ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन व्यवस्था, हरित क्षेत्र का विकास, ऊर्जा बचाने वाली आधुनिक तकनीजैसी सुविधाएं शामिल की जाएंगी।
75 जिलों के जनप्रतिनिधियों के लिए होगी विशेष व्यवस्था
नए परिसर की एक बड़ी विशेषता यह भी होगी कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जनप्रतिनिधियों के लिए अलगअलग बैठक और समन्वय क्षेत्र बनाए जाएंगे। इससे जिलों से जुड़े विकास कार्यों, योजनाओं और स्थानीय समस्याओं पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
परियोजना के लिए बजट में प्रावधान
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 202627 के बजट में इस परियोजना के मास्टर प्लान और कंसल्टेंट चयन प्रक्रिया के लिए 100 करोड़ रुपये का टोकन प्रावधान किया है।
102 साल पुराना है वर्तमान विधान भवन का इतिहास
उत्तर प्रदेश का मौजूदा विधान भवन अपनी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इसकी आधारशिला 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने रखी थी। करीब छह वर्ष बाद 21 फरवरी 1928 को इसका उद्घाटन हुआ। उस समय इसे ‘काउंसिल हाउस’ कहा जाता था। इसके निर्माण में करीब 21 लाख रुपये खर्च हुए थे। मिर्जापुर के चुनार बलुआ पत्थरों से बने इस भवन की अष्टकोणीय गुंबद, रोमन और भारतीय स्थापत्य शैली की नक्काशी, वाराणसी के कारीगरों की जालियां और पच्चीकारी इसकी खास पहचान हैं।
नया विधान भवन क्यों जरूरी?
मौजूदा विधान भवन ऐतिहासिक और गौरवशाली विरासत है, लेकिन बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों, भविष्य में संभावित सदस्यों की संख्या और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए नए परिसर की योजना बनाई जा रही है। नया विधान भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती प्रशासनिक जरूरतों और भविष्य की विधायी व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया जाने वाला आधुनिक केंद्र होगा।
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