सरकार नीट पेपर लीक मामले में विपक्ष के हमलों और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच गतिरोध तोड़ने की कोशिश कर रही है।

नीट पेपर लीक मामले में विपक्ष के हमलों के साथसाथ युवाओं के विरोध प्रदर्शन का सामना कर रही केंद्र सरकार अब जंतरमंतर से लेकर संसद तक गतिरोध तोड़ने की कोशिश में जुट गई है।
पेपर लीक मामले में संसद में चर्चा के लिए सरकार के एलान के बाद एक भाजपा सांसद की ओर से लोकसभा में नियम193 के तहत चर्चा कराने का नोटिस दिया गया। वहीं, जंतरमंतर पर बैठे आंदोनकारियों से भी बातचीत शुरू करने का रास्ता निकाला जा रहा है।
जबकि लोकसभा में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस को सहयोगी समाजवादी पार्टी का ही साथ नहीं मिला। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि इस्तीफा बाद में भी हो सकता है, लेकिन छात्रों पर हुई बर्बरता पर पहले चर्चा होनी चाहिए।
इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर गंभीर चिंता जताई और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए छात्रों और युवाओं का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह सड़कों के बजाय संसद में मुद्दा उठाए।
बुधवार सुबह से ही सरकार की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मुलाकात के संकेत दिए जाने लगे। सीजेपी नेताओं ने पिछली बार की तरह जेपी नड्डा या किसी मंत्री के दफ्तर या आवास पर जाकर मिलने से इनकार दिया। उन्होंने धरना स्थल पर आकर मिलने की शर्त रखी और बाद में किसी तीसरे स्थान पर बैठक होने की चर्चा भी चली।
सूत्रों के अनुसार, सरकार और सीजेपी नेताओं के बीच बैकडोर बातचीत का चैनल शुरू हो गया है और थोड़ी प्रगति होने के बाद ही औपचारिक मुलाकात का समय और जगह तय की जाएगी।
सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार: रिजीजू
दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने लोकसभा में कहा, “सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस देश के युवाओं के भविष्य के लिए एक सार्थक चर्चा हो, सरकार यही चाहती है।” लेकिन कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल चर्चा शुरू करने से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अड़ गए।
रिजीजू और वेणुगोपाल के बीच चल रही तकरार के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस और भाजपा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए चर्चा शुरू करने पर जोर दिया। सपा प्रमुख ने साफ किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कभी भी हो सकता है।
राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार छात्रों की आकांक्षाओं को पूरा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उनके साथ कोई अन्याय न हो। अपने छात्रों की हर चिंता को सुनना और उसका समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी नेता लोगों, खासकर युवाओं को गुमराह करने के लिए बनावटी गुस्सा दिखा रहे हैं। हम युवाओं की भावनाओं और चिंताओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं। लोकतंत्र में चर्चा के लिए संसद ही सही मंच है। अगर विपक्ष जनहित के मुद्दे उठाने के प्रति गंभीर है, तो उसे मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलने देना चाहिए।
स्पीकर बिरला से मिले प्रधान
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को संसद में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, सरकार की ओर से लोकसभा में यह बताने के तुरंत बाद कि वह नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा कराने को तैयार है, प्रधान ने बिरला से भेंट की।
पवार और सुले की पीएम से मुलाकात से चर्चा गर्म
इस बीच एनसीपी के प्रमुख शरद पवार और सुप्रिया सुले की संसद भवन के भीतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात ने नई चर्चा को जन्म दे दिया। शरद पवार और सुप्रिया सुले मंगलवार को जंतरमंतर पर धरने पर बैठे नेताओं से मिलने गए थे।
सुले बाद में राहुल गांधी के धरने में भी गई थीं। सुले पहले ही महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर राजग का साथ देने का संकेत दे चुकी हैं। ऐसे में यह मुलाकात भी अहम है। माना जा रहा है कि सोमवार तक स्थिति सामान्य हो सकती है।
भाजपाकांग्रेस के एक दूसरे पर हमले
भाजपा और कांग्रेस के बीच एकदूसरे विरुद्ध हमले जारी रहे। एक तरफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोमवार को हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही प्रधानमंत्री की ओर से माफी की मांग भी जोड़ दी। वहीं, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने नीट आंदोलन के नाम पर फेक न्यूज, झूटे नैरेटिव और भ्रामक दावों से देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।
भाजपा का राहुल गांधी पर हमला
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरनाप्रदर्शन करने पर तीखा हमला बोला। उनके आचरण को असामाजिक और उच्च पद की गरिमा का उल्लंघन बताया।
दिल्ली में बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेता ने राहुल गांधी के राजनीतिक वंश पर कटाक्ष करते हुए उन्हें याद दिलाया कि वह तो एक ऐसे परिवार से हैं जिसने तीन प्रधानमंत्रियों को देखा है। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के आवास के गेट पर धरने पर बैठे।
उनके पिता राजीव गांधी प्रधानमंत्री रहे, उनकी दादी इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और उनके परदादा जवाहरलाल नेहरू भी देश के प्रधानमंत्री थे। उन्हें प्रधानमंत्री आवास की गरिमा का पता होना चाहिए। इसके बावजूद जिस प्रकार का असामाजिक व्यवहार उन्होंने दर्शाया है, वह अत्यंत निंदनीय है।
कांग्रेस नेता की ‘जिद’ पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि क्या देश राहुल गांधी के मनमाने तरीके से चलेगा? क्या आप बस वहां बैठकर अराजक तरीके से काम करेंगे? सरकार नीट मुद्दे पर बहस के लिए तैयार थी, लेकिन फिर आप पीछे हट गए? क्या यह देश आपकी लाठी से चलेगा? क्या यह आपके घमंड से चलेगा? राहुल गांधी, आप असामाजिक रहे हैं। मैं आपके पूरे आचरण की निंदा करता हूं।
प्रसाद ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि सुरक्षा और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए यह आवश्यक था। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों पर भी जोर दिया।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्र को तोड़ने का प्रयास कर रही है और देशद्रोही तत्वों के साथ जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी किसी भी तरह सत्ता में आना चाहते हैं।
उन्होंने राहुल के सोरोस फाउंडेशन के साथ संबंधों की जांच की भी मांग की। निशिकांत ने कहा कि मुझे लगता है कि गांधी परिवार देशद्रोहियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। कल जंतरमंतर पर क्या हुआ? जिस तरह से तलवारें लहराई गईं और इसे इस्लामी देशों का समर्थन मिला, उससे साफ है कि कांग्रेस ऐसे लोगों के साथ मिलकर घिनौनी हरकतें कर रही है। यह राष्ट्र को तोड़ने का स्पष्ट प्रयास है।
भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी ने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान किससे मुलाकात की? उन्होंने किस इस्लामी देशों के अधिकारियों से बात की? उन्होंने किस चीनी अधिकारियों से मुलाकात की? सरकार को सोरोस फाउंडेशन द्वारा उनकी फंडिंग की पूरी जांच करनी चाहिए।
आंदोलन और अनशन खत्म करेंगे वांगचुक, रखी शर्त
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन और साथ ही आंदोलन खत्म करने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार के सामने शर्त रखी है कि आंदोलनकारी युवाओं के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
यदि सरकार की तरफ से बिना किसी शर्त के आश्वासन दिया जाता है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। अन्यथा अनशन जारी रहेगा। 28 जून से अनशन कर रहे वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एवं जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर यह बात कही।
जेपी नड्डा ने भी पत्रकारों को बताया कि वह जल्द ही वांगचुक को जवाब देंगे। माना जा रहा है कि सरकार सकारात्मक है और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना भी नहीं चाहती है। लेकिन, असामाजिक तत्वों को माफ नहीं किया जा सकता है।
मंगलवार की रात दोनों मंत्रियों ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल जाकर वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की थी। वांगचुक फिलहाल मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से यहां स्थानांतरित किया गया था।
इस्तीफे की मांग के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने स्कूली शिक्षा पर राज्यों से की चर्चा
नीट पेपर लीक मामले पर जहां एक और विपक्षी दल और आंदोलित छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए है, वहीं इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री प्रधान मंत्रालय से जुड़े अपने कामकाज व बैठकों में व्यस्त दिखे।
बुधवार को उन्होंने नई दिल्ली में आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने स्कूली शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए राज्यों को हर संभव मदद का भी भरोसा दिया।