Quick Samachar: दुनिया जून महीने के तीसरे संडे को फादर्स डे मनाती आ रही है. वर्षों से यह सिलसिला चल आ रहा है. अमीरगरीब, सब अपने तरीके से अपने पिता का मानसम्मान करते हैं. प्यार करते हैं. प्यार पाते हैं. गिफ्ट देने का भी प्रचलन हाल के वर्षों में तेज हुआ है. इस बार फादर्स डे और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की युगलबंदी भी है यानी दोनों 21 जून को ही मनाए जा रहे हैं. क्या आप जानते हैं दुनिया के अनेक देश फादर्स डे जून के तीसरे संडे को नहीं मनाते. इनकी तारीखें और तरीके कई देशों में बिल्कुल जुदा हैं. आखिर ऐसा क्यों है और अलगअलग देशों में इसके पीछे क्या कहानियां हैं?

Father’s Day 2026: थाइलैंड से भारत तक, दुनियाभर में फादर्स डे की तारीख अलग-अलग क्यों है?​

फादर्स डे की औपचारिक शुरुआत अमेरिका से हुई थी. इसकी प्रेरणा मदर्स डे से मिली थी. साल 1909 में सोनोरा स्मार्ट डोड नाम की महिला ने इसका विचार रखा. उनके पिता विलियम स्मार्ट ने अकेले ही अपनी छह संतानों को पाला था. सोनोरा चाहती थी कि जैसे मां के लिए एक दिन है, वैसे ही पिता के संघर्षों के लिए भी एक दिन होना चाहिए. उनके प्रयासों से पहली बार आधिकारिक रूप से 19 जून 1910 को फादर्स डे मनाया गया. बाद में साल 1966 में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे घोषित किया. साल 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इसे स्थायी रूप से मान्यता दी.

ज्यादातर देश जून में ही क्यों मनाते हैं?

दुनिया के लगभग 80 से ज्यादा देश जून के तीसरे रविवार को ही फादर्स डे मनाते हैं. इनमें भारत, पाकिस्तान, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे बड़े देश शामिल हैं. इसका मुख्य कारण अमेरिकी संस्कृति और मीडिया का गहरा प्रभाव है. चूंकि, इस दिन की आधुनिक शुरुआत अमेरिका में हुई थी, इसलिए वैश्विक स्तर पर इसी तिथि को सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली. यह दिन पिता के प्रति सम्मान, प्यार और कृतज्ञता जताने का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन गया है.

पहली बार आधिकारिक रूप से 19 जून 1910 को फादर्स डे मनाया गया. फोटो: Pexels

भारत: बदलती परंपरा और आधुनिकता

भारत में फादर्स डे मनाने का कोई प्राचीन रिवाज नहीं था. भारत में पितृ पक्ष जैसी धार्मिक परंपराएं हैं जहां पूर्वजों को याद किया जाता है. लेकिन फादर्स डे का आधुनिक चलन पिछले दोतीन दशक में बढ़ा है. भारत में भी यह जून के तीसरे रविवार को ही मनाया जाता है. इसे मुख्य रूप से शहरों में ज्यादा महत्व दिया जाता है. बच्चे अपने पिता के लिए केक काटते हैं या उन्हें सरप्राइज गिफ्ट देते हैं. सोशल मीडिया के आने से अब यह गाँवकस्बों तक भी पहुँच चुका है. लोग व्हाट्सएप पर अपने पिता की फोटो लगाकर प्यार जाहिर करते हैं.

थाईलैंड: 5 दिसंबर और राजा का सम्मान

थाईलैंड में फादर्स डे मनाने की कहानी बिल्कुल अलग है. यहां यह दिन 5 दिसंबर को मनाया जाता है. यह तारीख वहां के दिवंगत राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का जन्मदिन है. थाईलैंड के लोग अपने राजा को राष्ट्र का पिता मानते हैं, इसलिए उनके सम्मान में ही फादर्स डे मनाया जाता है. इस दिन थाई लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं क्योंकि पीला रंग सोमवार का प्रतीक है. राजा का जन्म भी सोमवार को हुआ था. बच्चे अपने पिता और दादा को कन्ना नाम का फूल भेंट करते हैं, जिसे प्रेम और सम्मान का प्रतीक माना जाता है.

रूस में फदर्स डे को डिफेंडर ऑफ द फादरलैंड डे कहा जाता है. फोटो: Pexels

जर्मनी: धार्मिक मान्यता और बीयर का उत्सव

जर्मनी में फादर्स डे को वाटरटैग कहा जाता है. यहां यह दिन ईस्टर के 40 दिन बाद मनाया जाता है, जिसे ईसा मसीह के स्वर्गारोहण का दिन भी कहते हैं. जर्मनी में यह दिन मई के महीने में पड़ता है. यहां मनाने का तरीका बहुत अनोखा है. जर्मनी के पुरुष समूहों में बाहर निकलते हैं. वे एक सजी हुई बैलगाड़ी या ठेले में बीयर और खाना लेकर सैर पर जाते हैं. यह पिता के साथसाथ सभी पुरुषों के लिए एक जश्न जैसा होता है. कई जगहों पर इसे पुरुष दिवस के रूप में भी जाना जाता है.

रूस: सैन्य गौरव और पितृत्व

रूस में जिसे हम फादर्स डे कहते हैं, उसे वास्तव में डिफेंडर ऑफ द फादरलैंड डे कहा जाता है. यह 23 फरवरी को मनाया जाता है. मूल रूप से यह रूसी सशस्त्र बलों में सेवा करने वाले पुरुषों के सम्मान में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह सभी पुरुषों के लिए एक विशेष दिन बन गया है. इस दिन महिलाएं अपने पिता, पति और बेटों को उपहार देकर उनका सम्मान करती हैं.

दक्षिण कोरिया: मातापिता का एक ही दिन

दक्षिण कोरिया की परंपरा सबसे अनूठी है। यहां फादर्स डे या मदर्स डे अलगअलग नहीं मनाया जाता. इसके बजाय 8 मई को पेरेंट्स डे मनाया जाता है. दक्षिण कोरियाई सरकार ने दोनों को एक ही दिन सम्मानित करने का निर्णय लिया. इस दिन बच्चे अपने मातापिता के सीने पर कार्नेसन के फूल लगाते हैं और उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं.

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड: सितंबर की वसंत

जहाँ उत्तर गोलार्ध के देश जून में मना रहे होते हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में फादर्स डे सितंबर के पहले रविवार को मनाया जाता है. इसके पीछे कोई विशेष ऐतिहासिक कारण नहीं है, बल्कि यह वहां के मौसम से जुड़ा है. सितंबर वहां वसंत ऋतु की शुरुआत होती है. वहां के लोगों का मानना है कि जून में छुट्टियां पहले ही बहुत होती हैं, इसलिए उन्होंने साल के दूसरे हिस्से में इस उत्सव को मनाने का फैसला किया.

इटली और स्पेन: संत जोसेफ की याद

यूरोप के कैथोलिक बहुल देशों जैसे इटली, स्पेन और पुर्तगाल में फादर्स डे सेंट जोसेफ डे के दिन मनाया जाता है. यह तारीख 19 मार्च है. संत जोसेफ को ईसा मसीह का पालक पिता माना जाता है, इसलिए इन देशों में इस दिन का बहुत धार्मिक महत्व है. लोग गिरजाघरों में प्रार्थना करते हैं और पारिवारिक मिलन का आयोजन करते हैं.

अलग तारीखों के बावजूद एक ही भावना

विभिन्न देशों की इन कहानियों से यह स्पष्ट है कि तारीख चाहे जो भी हो, भावना हर जगह एक जैसी है. चाहे वह थाईलैंड में अपने राजा के प्रति सम्मान हो या जर्मनी में बीयर के साथ जश्न, हर संस्कृति अपने तरीके से पिता की भूमिका को सराहती है. पिता अक्सर अपने संघर्षों को जाहिर नहीं करते. फादर्स डे जैसे दिन हमें याद दिलाते हैं कि हमें रुककर उन्हें धन्यवाद कहना चाहिए. एक पिता का हाथ पकड़कर बच्चा चलना सीखता है और उसकी छाया में रहकर उसे सुरक्षा का अहसास होता है.

पिता को सम्मान देने का महत्व

आज के भागदौड़ भरे जीवन में बच्चे अक्सर व्यस्त हो जाते हैं. ऐसे में विशेष दिन जैसे फादर्स डे परिवारों को करीब लाते हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप जून में मना रहे हैं या दिसंबर में. महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने पिता के साथ कुछ समय बिताएं और उन्हें महसूस कराएं कि वे आपके जीवन में कितने जरूरी हैं. सरल शब्दों में कहें तो फादर्स डे सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि पिता के त्याग और प्यार को सलाम करने का एक जरिया है.