Gurugram hit and Run: हिट एंड रन केस में कितनी धाराएं, कितने साल की जेल? गुरुग्राम मामले से समझें​

Gurugram hit and Run: हिट एंड रन केस में कितनी धाराएं, कितने साल की जेल? गुरुग्राम मामले से समझें​

गुरुग्राम हिट एंड रन केस के आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार कर लिया गया है. इसमें पीड़ित सिया की बाइक में लगे कैमरे के फुटेज के आधार पर पुलिस ने हत्या के प्रयास की धाराएं भी जोड़ी हैं. यह धारा इसलिए लगी है क्योंकि वीडियो फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि एक्सीडेंट के बाद कार चालक रुका नहीं. सिया कुछ दूर तक सड़क पर घिसटती रही. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि हिट एंड रन केस में कितनी धाराएं लगती हैं? कितनी सजा हो सकती है?

सड़क दुर्घटना के बाद वाहन चालक का मौके से भाग जाना हिट एंड रन कहलाता है. ऐसी स्थिति में चालक घायल व्यक्ति की सहायता नहीं करता. वह पुलिस को सूचना नहीं देता. कई बार वह वाहन की पहचान छिपाने की कोशिश भी करता है. भारत में 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता यानी BNS लागू है. इस कानून ने भारतीय दंड संहिता की जगह ली है. हिट एंड रन मामलों में बीएनएस की धारा 106 सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. हालांकि, किसी मामले में लगने वाली धाराएं दुर्घटना की स्थिति, चालक की लापरवाही, घायल व्यक्ति की हालत और मृत्यु जैसे तथ्यों पर निर्भर करती हैं.

भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 क्या कहती है?

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी कुमार दुबे कहते हैं कि बीएनएस की धारा 106 लापरवाही से किसी व्यक्ति की मृत्यु से जुड़ी है. इस धारा के दो हिस्से हैं.

  • धारा 106 : यदि किसी चालक की लापरवाही या तेज गति से वाहन चलाने के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो धारा 106 लग सकती है. इस स्थिति में चालक घटना की सूचना पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को देता है. वह घायल व्यक्ति की मदद करता है. वह एंबुलेंस बुलाता है या उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करता है. इस अपराध में अधिकतम 5 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है. यह सजा हर मामले में निश्चित नहीं होती. अदालत मामले के सभी तथ्यों को देखकर फैसला करती है.

गुरुग्राम की घटना का पूरा फुटेज सामने आया है.

  • धारा 106 : यह धारा उस स्थिति से संबंधित है, जब वाहन की टक्कर से किसी की मृत्यु हो जाती है और ड्राइवर घटना की सूचना दिए बिना मौके से भाग जाता है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इस प्रावधान में 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है. शुरुआत में इस धारा को लेकर देश भर में ट्रक और बस चालकों ने विरोध किया था. इसके बाद सरकार ने धारा 106 के लागू होने को नोटिफाई नहीं किया है. इसका अर्थ है कि 10 साल की सजा को हर हिट एंड रन मामले में अपने आप लागू नहीं माना जा सकता. पुलिस और अदालत मामले की तारीख तथा लागू अधिसूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करती हैं.

धारा281 भी लग सकती है

बीएनएस की धारा 281 सार्वजनिक रास्ते पर तेज या लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ी है. यदि चालक ने वाहन को इस तरह चलाया, जिससे किसी व्यक्ति की जान को खतरा हुआ या चोट लगने की संभावना पैदा हुई, तो यह धारा लग सकती है. इस धारा का इस्तेमाल उस समय हो सकता है, जब दुर्घटना में मृत्यु नहीं हुई हो. यह धारा धारा 106 के साथ भी लगाई जा सकती है.

हिट एंड रन मामले में चोट की गंभीरता के आधार पर अलग धाराएं लग सकती हैं.

चोट लगने पर लग सकती हैं अन्य धाराएं

यदि दुर्घटना में व्यक्ति घायल होता है, तो चोट की गंभीरता के आधार पर अलग धाराएं लग सकती हैं. गंभीर चोट होने पर बीएनएस की चोट से संबंधित धाराएं लग सकती हैं. जान को खतरा पैदा करने वाली स्थिति में भी अलग आरोप लगाए जा सकते हैं. यदि चालक ने जानबूझकर वाहन से टक्कर मारी है, तो मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रह सकता. जांच में इरादा साबित होने पर हत्या या हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराएं भी लग सकती हैं. इसलिए हर दुर्घटना में एक जैसी धाराएं नहीं लगतीं.

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 दुर्घटना के बाद चालक की जिम्मेदारी बताती है. चालक को वाहन रोकना चाहिए. उसे घायल व्यक्ति को चिकित्सा सहायता दिलाने की कोशिश करनी चाहिए. उसे पुलिस को घटना की सूचना देनी चाहिए. यदि चालक घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाता है, तो उसे डॉक्टर और अस्पताल के अधिकारियों को सही जानकारी देनी चाहिए. कानून का उद्देश्य यह है कि घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज मिल सके. दुर्घटना के बाद शुरुआती समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. तुरंत इलाज मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ सकती है.

आरोपी कल्याण बैंसला.

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 187

अगर चालक दुर्घटना के बाद कानून के अनुसार जानकारी नहीं देता, तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 187 के तहत भी कार्रवाई हो सकती है. इस धारा में दुर्घटना के बाद आवश्यक जानकारी नहीं देने या पुलिस के साथ सहयोग नहीं करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है. यह धारा कई मामलों में BNS की धाराओं के साथ लग सकती है.

जुर्माने की राशि हर स्थिति में अलगअलग

कानून में जुर्माने की राशि हर स्थिति के लिए निश्चित नहीं बताई गई है. इसलिए सात लाख रुपये के जुर्माने की बात को सामान्य नियम की तरह नहीं समझना चाहिए. जुर्माना अदालत मामले की गंभीरता और लागू कानून के आधार पर तय कर सकती है.

क्या हिट एंड रन केस जमानती होता है?

जमानत का सवाल लगाई गई धाराओं पर निर्भर करता है. धारा 106 के मामले में आरोपी अदालत से जमानत मांग सकता है. धारा 106 को कठोर और गैर जमानती प्रावधान के रूप में बनाया गया था. यदि केस में मृत्यु, नशे में वाहन चलाना, गंभीर चोट, तेज गति या जानबूझकर टक्कर जैसे आरोप हों, तो जमानत कठिन हो सकती है. जमानत मिलना या न मिलना अदालत के विवेक पर निर्भर करता है. अदालत पुलिस की जांच, सबूत, आरोपी का पिछला रिकॉर्ड और घटना की गंभीरता देखती है.

पीड़िता शिवानी चौहान ‘सिया’.

कितना मुआवजा?

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 के तहत हिट एंड रन पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था है. हिट एंड रन दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को दो लाख रुपये तक मुआवजा मिल सकता है. गंभीर चोट होने पर 50 हजार रुपये तक मुआवजा मिल सकता है. मुआवजा पाने के लिए पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है. आवेदन की प्रक्रिया राज्य और संबंधित अधिकारी के अनुसार अलग हो सकती है.

दुर्घटना के बाद चालक को क्या करना चाहिए?

दुर्घटना होने पर चालक को वाहन रोकना चाहिए. उसे सबसे पहले अपनी और अन्य लोगों की सुरक्षा देखनी चाहिए. इसके बाद 112 या स्थानीय पुलिस को सूचना देनी चाहिए. घायल व्यक्ति को एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजना चाहिए. यदि भीड़ से खतरा हो, तो चालक सुरक्षित स्थान से तुरंत पुलिस थाने या पुलिस अधिकारी को सूचना दे सकता है. लेकिन सूचना दिए बिना गायब हो जाना कानूनी परेशानी बढ़ा सकता है. चालक को वाहन छिपाना, नंबर प्लेट बदलना या सबूत मिटाना नहीं चाहिए.

  • हिट एंड रन केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं है. यह गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है. बीएनएस की धारा 106 , धारा 281 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 तथा 187 महत्वपूर्ण प्रावधान हैं.
  • मृत्यु होने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है. धारा 106 के प्रभावी होने पर सूचना दिए बिना भागने वाले चालक को 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.
  • वास्तविक धाराएं और सजा घटना के तथ्यों पर निर्भर करती हैं. किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होने पर तुरंत योग्य आपराधिक वकील से सलाह लेनी चाहिए.

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