Jammu Kashmir Hidden Temple: जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में छिपा है चमत्कारी धाम, जहां हर साल उमड़ता है भक्तों का सैलाब..

Jammu Kashmir Hidden Temple: जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में छिपा है चमत्कारी धाम, जहां हर साल उमड़ता है भक्तों का सैलाब..
Jammu Kashmir Hidden Temple: जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में छिपा है चमत्कारी धाम, जहां हर साल उमड़ता है भक्तों का सैलाब..

जम्मू-कश्मीर में इस समय पवित्र अमरनाथ यात्रा चल रही है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां की एक ओर यात्रा भी बेहद लोकप्रिय मानी जाती है, जिसका नाम है मचैल माता यात्रा। पहले इस यात्रा में सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोग ही शामिल होते थे। लेकिन धीरे-धीरे दिल्ली, यूपी, हरियाणा समेत तमाम राज्यों के लोग भी मचैल माता के दर्शन करने के लिए आने लगे हैं। कहते हैं 32 किलोमीटर की ये पैदल यात्रा भक्तों को ऐसा दिव्य अनुभव कराती है, जिसे श्रद्धालु जीवन भर नहीं भूल पाते। मान्यता है जो कोई भी मचैल माता के दर्शन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

जम्मू-कश्मीर में कहां स्थित है मचैल माता का मंदिर

मचैल माता का मंदिर जम्मू के किश्तवाड़ जिले में स्थित है। ये मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। इस मंदिर का नाम मचैल गांव से ही पड़ा है, इसी कारण से लोग इसे मचैल माता मंदिर कहकर पुकारते हैं। ये मंदिर गर्मियों में खुला रहता है लेकिन अत्यधिक बर्फबारी के समय विशेष रूप से दिसंबर, जनवरी और फरवरी में बंद कर दिया जाता है। सावन महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है क्योंकि इस दौरान मचैल माता की छड़ी यात्रा का आयोजन किया जाता है।

मचैल मंदिर का इतिहास

  • स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, एक बार एक गड़रिया अपनी भेड़ों को चराने के लिए इस स्थान पर आया था। तभी उसे एक गुफा से तेज प्रकाश आता दिखाई दिया। कहते हैं जब वह अंदर गया तो उसे वहां मां का दिव्य रूप दिखाई दिया। इसके बाद ये बात धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई और इस स्थान पर भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।
  • वहीं एक अन्य मान्यता अनुसार, इस स्थान की खोज साल 1980 में एक साधु द्वारा की गई थी, जिन्हें यहां पर दिव्य आभा का अनुभव हुआ था। फिर उन्होंने ये बात लोगों को बताई और फिर यहां मंदिर का निर्माण हुआ।
  • स्थानीय लोगों का ये भी मानना है कि यह स्थान प्राचीन काल में साधना स्थल हुआ करता था। यहां ऋषि-मुनि मां दुर्गा की आराधना किया करते थे। लेकिन समय के साथ यह स्थान जंगलों और पहाड़ों में छिप गया था। लेकिन मां की कृपा से यह स्थान फिर से लोगों के सामने आया और यहां मंदिर का निर्माण किया गया।
  • कहते हैं 1987 से ठाकुर कुलवीर सिंह ने यहां छड़ी यात्रा शुरू की थी, जो आज तक चली आ रही है। इस छड़ी यात्रा में हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ये छड़ी यात्रा अगस्त के पूरे महीने चलती है। मान्यता है इस यात्रा के दौरान भक्तों को यहां कई अलौकिक और चमत्कारी घटनाओं का अनुभव होता हैं।

मचैल माता मंदिर का महत्व

मान्यता है कि मचैल माता मंदिर के दर्शन करने आए लोग कभी खाली हाथ नहीं लौटते। माता अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। कहते हैं जो लोग संतान सुख से वंचित हैं उनकी ये मनोकामना माता अवश्य पूरी करती हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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