Lucknow News : राजनाथ सिंह ने नव चिकित्सकों को दिया मंत्र सेवा, संवेदना और सीखने की जिज्ञासा को बनाएं जीवन का आधार 

Lucknow News : राजनाथ सिंह ने नव चिकित्सकों को दिया मंत्र सेवा, संवेदना और सीखने की जिज्ञासा को बनाएं जीवन का आधार 
Lucknow News : राजनाथ सिंह ने नव चिकित्सकों को दिया मंत्र सेवा, संवेदना और सीखने की जिज्ञासा को बनाएं जीवन का आधार 

लखनऊ। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में नव चिकित्सकों को सेवा, समर्पण और संवेदना का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि जीवन में आप जिस भी स्थान पर रहें और जिस भी परिस्थिति में काम करें, अपने पेशे के प्रति लिया गया संकल्प कभी न भूलें। यही संकल्प आपकी सबसे बड़ी पहचान और पूंजी बनेगा।

उन्होंने कहा कि अब तक विद्यार्थी के रूप में जिम्मेदारियां निभा रहे थे, लेकिन आज से आप चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे में प्रवेश कर रहे हैं। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम है।

रक्षामंत्री ने अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. पॉल फार्मर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने गरीब और पिछड़े देशों के लोगों तक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका संदेश था कि यह सोच कि कुछ लोगों का जीवन दूसरों से कम महत्वपूर्ण है, दुनिया की अधिकांश बुराइयों और अन्याय की जड़ है।

उन्होंने नव चिकित्सकों से कहा कि कुछ मरीजों के पास इलाज के कई विकल्प और पर्याप्त संसाधन होते हैं, लेकिन सामान्य और गरीब मरीज डॉक्टर के पास केवल उम्मीद लेकर आता है। इसलिए हर मरीज का बिना किसी भेदभाव के समान भाव से इलाज करें। यही भारत की सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक परंपरा का मूल संस्कार है।

सुषेण वैद्य का उदाहरण देते हुए बताई चिकित्सा की असली भावना

राजनाथ सिंह ने रामचरितमानस के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब युद्ध में लक्ष्मण जी घायल हुए थे, तब लंका के राजवैद्य सुषेण ने उनका उपचार किया। उन्होंने यह नहीं देखा कि घायल योद्धा किस पक्ष का है, बल्कि उनके सामने केवल एक जीवन था, जिसे बचाना उनका धर्म था।

उन्होंने कहा कि यही चिकित्सा का वास्तविक दर्शन है और यही भावना सफेद कोट को मानवता का प्रतीक बनाती है। डॉक्टरों को प्रत्येक मरीज के साथ समान संवेदना और समर्पण के साथ व्यवहार करना चाहिए।

मरीज की बातों में छिपा होता है बीमारी का संकेत

रक्षामंत्री ने नव चिकित्सकों को धैर्य का महत्व समझाते हुए प्रसिद्ध चिकित्सक सर विलियम ऑस्लर के कथन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मरीज की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए, क्योंकि कई बार बीमारी का निदान उसी की बातों में छिपा होता है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले लोग अत्यंत व्यस्त और तनावपूर्ण वातावरण में रहते हैं। ऐसे में उन्हें अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। योग और ध्यान को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को कई बार रात के एक, दो और तीन बजे तक मरीजों की सेवा के लिए अस्पताल पहुंचना पड़ता है, इसलिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

तकनीक के साथ करुणा भी जरूरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सिंथेटिक बायोलॉजी, जीन एडिटिंग और प्रिसिजन मेडिसिन जैसी तकनीकों ने चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं। ऐसे में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने केजीएमयू की पहली महिला कुलपति प्रोफेसर डॉ. सरोज यादव गौड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि 79 वर्ष की आयु में भी उन्होंने पीएचडी में प्रवेश लेकर साबित किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर उन्होंने कहा कि तकनीक चिकित्सा में मददगार हो सकती है, लेकिन वह किसी मां को यह भरोसा नहीं दे सकती कि उसका बच्चा जरूर ठीक हो जाएगा। वह किसी बुजुर्ग का हाथ पकड़कर भावनात्मक सहारा भी नहीं दे सकती।

उन्होंने कहा कि मशीनें उपचार में सहायता कर सकती हैं, लेकिन मरीज के मन का दर्द नहीं समझ सकतीं। इसलिए डॉक्टरों को तकनीक के साथ संवेदनशीलता और करुणा को भी अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाना होगा।

नई सोच और सवालों से आगे बढ़ता है विज्ञान

रक्षामंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर बड़ा परिवर्तन तब शुरू हुआ, जब किसी व्यक्ति ने स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस किया। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति भी ऐसे ही साहसी और जिज्ञासु लोगों के प्रयासों से संभव हुई है। उन्होंने नव चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे ज्ञान, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।

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