
कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार : साइबर अपराध में रविवार को एक बड़े गिरोह का खुलासा किया गया। इसके नौ सदस्य दबोचे गये। वहीं दो मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह म्यूल अकाउंट नेटवर्क का बड़ा गिरोह है। कार्रवाई के दौरान विभिन्न बैंकों के 50 एटीएम/डेबिटक्रेडिट कार्ड, कई पासबुक और चेकबुक बरामद की गई हैं।
जांच में सामने आया कि बरामद बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था। इसमें सबसे अधिक इंडियन बैंक व एसबीआई के म्यूल खाते खुलवाये गये। इन दोनों बैंकों में 15 खातों की डिटेल पुलिस के हाथ लगी है। जिनका प्रयोग साइबर ठगी में किया गया है।
पुलिस के अनुसार, बरामद एटीएम कार्डों में सबसे अधिक इंडियन बैंक के आठ, एसबीआई के सात, एक्सिस बैंक के चार कार्ड मिले। इसके अलावा पीएनबी के चार, बैंक ऑफ बड़ौदा के तीन, एचडीएफसी के तीन, बंधन बैंक के तीन, आईसीआईसीआई के दो, यूनियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक व कोटक महिंद्रा के दोदो, फेडरल बैंक, आरबीएल, आईडीएफसी, जीओ बैंक, एयू स्माल फाइनेंस बैंक, आईडीबीआई बैंक, नैनीताल बैंक, फिनो बैंक्र केनरा बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्रा के एकएक खाते मिले हैं। इन खातों की जांच की जा रही है। इसे खुलवाने में किन कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका रही। इसकी भी जांच शुरू हो गई। इनमें कुछ खाते मोहम्मद शोएब तथा आजम खान के नाम पर संचालित पाए गए।
एनसीआरपी पर दर्ज हुईं थी 10 शिकायतें
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक, बरामद खातों की जांच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर की गई। जिसमें सामने आया कि कई खातों पर पहले से साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिलीं। इंडियन बैंक के खाते पर दो, एचडीएफसी बैंक के खाते पर तीन, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते पर एक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते पर एक तथा एचडीएफसी बैंक के एक अन्य खाते पर दो शिकायतें दर्ज पाई गईं।
इससे स्पष्ट हुआ कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल अपने कब्जे में ले लेता था। इसके बाद इन खातों की जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से विदेशी, विशेष रूप से चीनी साइबर ठगों तक पहुंचाई जाती थी।
टेलीग्राम और डिजिटल वॉलेट से भेजते थे जानकारी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी टेलीग्राम और डिजिटल वॉलेट के जरिए खातों की जानकारी, ट्रांजैक्शन और अन्य संवेदनशील सूचनाओं का आदानप्रदान करते थे। समयसमय पर चैट और डिजिटल साक्ष्य भी डिलीट कर देते थे। इसी आशंका के चलते आरोपियों को हिरासत में लिया गया, ताकि वे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट न कर सकें। साइबर ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद आरोपी एटीएम और चेकबुक के जरिए नकदी निकाल लेते थे। इसके बाद अपना कमीशन काटकर शेष रकम साथियों की मदद से यूएसडीटी में परिवर्तित कर डिजिटल वॉलेट के माध्यम से विदेशी ठगों को भेज दी जाती थी। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है।