
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के ‘चलो संसद’ मार्च ने सियासी माहौल गरमा दिया। हजारों प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर कूच करने, पुलिस से झड़प और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश के बीच ऐसा माहौल बना कि संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करनी पड़ी।
हालांकि दिन के आखिर में घटनाक्रम ने बड़ा मोड़ लिया, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने और आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का ऐलान कर दिया। दीपके ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई है और उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात भी हुई है। इसी के साथ यह सवाल उठने लगा है कि क्या सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है?
क्या सरकार ने मान लीं CJP की मांगें?
फिलहाल सरकार की ओर से CJP की सभी मांगें स्वीकार किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सरकार और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता शुरू होने को आंदोलन की पहली बड़ी सफलता माना जा रहा है। इसी पहल के बाद अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त करते हुए कार्यकर्ताओं से आंदोलन स्थगित करने की अपील की। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर मांगों पर चर्चा की। अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है।
अभिजीत को लेकर सौरव दास का बड़ा दावा
सौरव दास ने नड्डा से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘मैंने और आशुतोष रांका ने करीब 2 घंटे इंतजार के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से 10 मिनट की मुलाकात की। हमने हमारी मांगों को लिखित में सौंपा है उन्होंने आगे बातचीत का आश्वासन दिया है. हम उसी प्रक्रिया में लगे हुए हैं. इसी बीच बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने जैसी खबरें भी आ रही हैं.’
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने ट्वीट किया, ‘पुलिस ने अभिजीत दिपके को उठा लिया है! हम सभी सांसदों से अपील करते हैं कि वे तुरंत सड़कों पर उतरे छात्रों के समर्थन में खड़े हों! पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से कार्रवाई कर रही है और उनकी पिटाई कर रही है।’
संसद मार्च बना हाईवोल्टेज ड्रामा
सोमवार सुबह जंतरमंतर से शुरू हुआ ‘चलो संसद’ मार्च कुछ ही घंटों में उग्र हो गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ते हुए संसद मार्ग तक पहुंच गए। दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने उन्हें रोकने के लिए पहले चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ आगे बढ़ी तो आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि कुछ गर्मी और भगदड़ के कारण बेहोश भी हो गए। संसद के भीतर प्रधानमंत्री समेत सभी सांसद मौजूद थे, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों ने संसद भवन की सुरक्षा तत्काल और कड़ी कर दी।
सोनम वांगचुक के मुद्दे ने भी पकड़ी सुर्खियां
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद संसद मार्च में शामिल होना चाहते थे। अदालत से अनुमति नहीं मिलने पर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शिक्षा में जवाबदेही सुनिश्चित करने का भरोसा देती है तो वांगचुक भी अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
विपक्ष भी आया साथ
इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी खुला समर्थन मिला। आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय, इकरा हसन और प्रिया सरोज सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के मंच से सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी जंतरमंतर पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की और उनके विरोध के अधिकार का समर्थन किया।
फिलहाल क्या स्थिति है?
दिनभर चले हंगामे और टकराव के बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। CJP का कहना है कि अब सरकार के साथ बातचीत के नतीजों का इंतजार किया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से अभी तक किसी भी मांग को स्वीकार करने की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह साफ है कि आंदोलन थमा जरूर है, लेकिन खत्म नहीं हुआ है।