Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन अब तक कई सवालों के जवाब नहीं मिल सके हैं. हत्या के बाद संदिग्ध केयरटेकर वरुण कुमार फरार है. उसकी तलाश में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी, करीब 12 टीमें और वरिष्ठ अधिकारी जुटे हैं. पुलिस मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. इधर, अमेरिका में रहने वाला राकेश अग्रवाल का इकलौता बेटा सिद्धांत उर्फ सिद्ध करीब 12 हजार किलोमीटर का सफर तय कर भोपाल पहुंचा. शुक्रवार को उसने अपने पिता को मुखाग्नि दी. इस दौरान बड़ी संख्या में IASIPS अधिकारी, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे.

12000 KM का सफर तय कर भोपाल पहुंचा बेटा
पिता की हत्या की खबर मिलने के बाद सिद्धांत अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुआ था. भोपाल पहुंचने के बाद शुक्रवार को उसने पिता का अंतिम संस्कार किया. इस दौरान परिवार के लोगों के साथ बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और परिचित भी मौजूद रहे. सिद्धांत की अमेरिकी पत्नी ने भी राकेश अग्रवाल को श्रद्धांजलि दी. एक तरफ परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जुटा था तो दूसरी तरफ पुलिस संदिग्ध केयरटेकर वरुण कुमार की तलाश में अलगअलग जगहों पर दबिश दे रही थी.
हत्या के बाद लाखों के सामान लेकर भागने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि वारदात के बाद वरुण कुमार घर से फरार हो गया. पुलिस के मुताबिक, वह अपने साथ लाखों रुपए के जेवर, नकदी, मोबाइल और कुछ अन्य सामान लेकर गया है. CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसके भागने के रूट का पता लगाने की कोशिश की है. जांच के मुताबिक, रात करीब 2:40 बजे वरुण घर से बाहर निकला था. घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर लगे CCTV कैमरे में वह हाथ में पिट्ठू बैग और एक झोला लिए दिखाई दिया. इसके बाद वह करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर भदभदा चौराहे पहुंचा. वहां से उसने ऑटो रिक्शा लिया. ऑटो पॉलीटेक्निक चौराहा और कमला पार्क होते हुए भोपाल रेलवे स्टेशन की तरफ गया.
भोपाल स्टेशन से ट्रेन में बैठकर हुआ फरार
पुलिस के मुताबिक, वरुण स्टेशन से कुछ दूरी पहले ऑटो से उतर गया और पैदल भोपाल जंक्शन पहुंचा. यहां वह प्लेटफॉर्म नंबर 6 से होकर प्लेटफॉर्म नंबर 2 की तरफ गया. जांच में सामने आया है कि रात करीब 3:30 बजे वह दिल्ली लाइन की एक ट्रेन में सवार होकर भोपाल से निकल गया. इसके बाद पुलिस ने झांसी, ग्वालियर और आगरा रूट के रेलवे स्टेशनों के CCTV फुटेज खंगालना शुरू कर दिया.
पुलिस को उसके ग्वालियर तक पहुंचने के भी सुराग मिले हैं. रात करीब 2:52 बजे उसे एक व्यक्ति के साथ बाइक पर देखे जाने की बात सामने आई है. इसके बाद ट्रेन से जाने की जानकारी मिली. बीना के बाद ग्वालियर स्टेशन के CCTV कैमरों में भी उसके फुटेज मिलने की बात पुलिस जांच में सामने आई है.
राकेश का मोबाइल बीना में हुआ एक्टिव
जांच में पुलिस को एक और अहम सुराग मिला है. पुलिस के मुताबिक, वरुण के पास राकेश अग्रवाल का मोबाइल भी था. यह मोबाइल बीना में कुछ समय के लिए एक्टिव हुआ और इसके बाद बंद हो गया. अब पुलिस मोबाइल लोकेशन, CCTV फुटेज और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर वरुण तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. पुलिस को उम्मीद है कि इन सुरागों से उसके आगे के रूट और संभावित ठिकाने का पता चल सकता है.
4 राज्यों में चल रहा तलाश अभियान
वरुण की तलाश के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है. करीब 12 पुलिस टीमें अलगअलग स्थानों पर भेजी गई हैं. 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी उसकी तलाश में लगाए गए हैं. एक DCP और दो एडिशनल DCP स्तर के अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं. पुलिस की टीमें मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में भी संभावित ठिकानों पर पहुंच रही हैं. पंजाब के नाभा में वरुण के रिश्तेदारों से पूछताछ की गई है.
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आगरा और मथुरा में रहने वाले उसके आधा दर्जन से ज्यादा रिश्तेदारों से भी जानकारी जुटाई गई है. दिल्ली में भी पुलिस ने उसके संपर्क में रहने वाले लोगों से पूछताछ की है. वरुण का परिवार ग्वालियर की वाल्मीकि कॉलोनी में रहता है. पुलिस ने उसके पिता से भी पूछताछ की, लेकिन उसके ठिकाने को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली.
हत्या से 3 दिन पहले ही घर में आया था वरुण
पुलिस की जांच में केयरटेकर की नियुक्ति को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं. राकेश अग्रवाल कुछ दिन पहले बीमार हुए थे. उनकी देखभाल के लिए एक एजेंसी के जरिए केयरटेकर रखा गया था. एजेंसी ने पहले विनोद नाम के व्यक्ति को भेजा था. उसके छुट्टी पर जाने के बाद वरुण कुमार को राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए भेजा गया. बताया गया है कि वरुण ने हत्या से महज तीन दिन पहले ही घर में काम शुरू किया था.
एजेंसी संचालक के मुताबिक, वरुण करीब 25 दिन से एजेंसी के संपर्क में था. उसने आधार कार्ड और पटियाला पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़े दस्तावेज दिए थे. हालांकि, एजेंसी ने इन दस्तावेजों का अपने स्तर पर सत्यापन नहीं कराया था. अब पुलिस इस पूरे पहलू की भी जांच कर रही है.
क्या सबूत मिटाने की कोशिश की गई?
जांच के दौरान पुलिस को घर के अंदर कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे वारदात के बाद सबूत मिटाने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस के मुताबिक, एक गैस सिलेंडर की पिन में कुछ फंसाया गया था, जबकि दूसरे सिलेंडर का रेगुलेटर खुला मिला. इसके अलावा प्रेस का प्लग काटकर उसके तार सीधे स्विच बोर्ड में लगाए गए थे और प्रेस को कपड़े के ऊपर चालू छोड़ दिया गया था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि कहीं आग लगाकर हत्या के सबूत मिटाने की कोशिश तो नहीं की गई थी.
पालतू कुत्ते भी जांच के दायरे में
राकेश अग्रवाल के बंगले में तीन पालतू कुत्ते भी थे. परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक, ये कुत्ते आमतौर पर किसी अनजान व्यक्ति को देखकर भौंकते थे, लेकिन हत्या वाली रात उन्होंने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी. इसी वजह से पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं कुत्तों को कोई नशीला पदार्थ तो नहीं दिया गया था.
पुराने आर्थिक विवाद की भी जांच
पुलिस राकेश अग्रवाल के पुराने आर्थिक विवादों की भी जानकारी जुटा रही है. करीब 11 महीने पहले उन्होंने अपने पुराने परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था. आरोप था कि कंपनी में निवेश पर ज्यादा रिटर्न देने का झांसा देकर रकम ली गई, लेकिन न मूल रकम वापस मिली और न मुनाफा. इस मामले में चालान भी पेश किया जा चुका है. हालांकि, पुलिस को अभी तक इस पुराने आर्थिक विवाद और राकेश अग्रवाल की हत्या के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला है. इसके बावजूद जांच के तहत उनके पुराने लेनदेन और विवादों की जानकारी जुटाई जा रही है.
पत्नी को अस्पताल से मिली छुट्टी
हत्या की वारदात में घायल राकेश अग्रवाल की पत्नी निशि अग्रवाल को स्वास्थ्य में सुधार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. पुलिस ने उनसे भी पूछताछ कर घटना से जुड़ी जानकारी जुटाई है. अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि राकेश अग्रवाल की हत्या के पीछे असली वजह क्या थी? क्या वारदात सिर्फ लूट के लिए की गई या इसके पीछे कोई और कारण भी था, इसकी जांच की जा रही है. फिलहाल केयरटेकर वरुण कुमार पुलिस की पकड़ से बाहर है. उसके पकड़े जाने के बाद ही हत्या की पूरी वजह और वारदात का क्रम स्पष्ट हो सकेगा.