National Mango Day: आम का नाम कैसे पड़ा चौसा और लंगड़ा, राष्ट्रीय फल से जुड़ी रोचक बातें

National Mango Day: आम का नाम कैसे पड़ा चौसा और लंगड़ा, राष्ट्रीय फल से जुड़ी रोचक बातें

आम…. भारतीयों का वो पंसदीदा फल, जिसके लिए कुछ लोग तो गर्मी तक का इंतजार करते हैं. कच्चे आम की चटनी, मैंगो शेक या फिर इसे काटकर खाना… हर तरीके से इस फल का स्वाद शानदार लगता है. भारत में आम का इतिहास करीब 5000 साल पुराना बताया जाता है. भारत में इसके कुछ टाइप सबसे पॉपुलर हैं, जिसमें दशहरी, चौसा और लंगड़ा का नाम शामिल है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हर साल, 22 जुलाई का दिन नेशनल मैंगो डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है. आम का कल्चर, स्वाद और पोषण के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए नेशनल मैंगो डे मनाया जाता है. साल 2005 में नेशनल मैंगो बोर्ड बनाया गया था और बताया जाता है कि ये आम की खपत को बढ़ाने के उद्देश्य से काम करता है.

National Mango Day: आम का नाम कैसे पड़ा चौसा और लंगड़ा, राष्ट्रीय फल से जुड़ी रोचक बातें

बच्चे हो या बड़े… अमूमन हर कोई इस फल का दीवाना होता है. पर क्या आप जानते हैं कि इसके पॉपुलर टाइप चौसा और लंगड़ा का नाम कैसे पड़ा. चलिए आपको आम से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट्स बताते हैं.

कहां से शुरू हुई आम की खेती

बताया जाता है कि साउथ एशिया से आम की खेती शुरू हुई थी और भारत में इसका इतिहास करीब 5000 साल पुराना है. भारत अकेला ऐसा देश है जो पूरी दुनिया के मैंगो प्रोडक्शन में 50 फीसदी का योगदान देता है. आम के भारत में इतिहास की बात करें तो ऐसा बताया जाता है कि सबसे पहले नॉर्थ ईस्ट के राज्य में इसे उगाया गया था.

साउथ इंडिया में आम को शुरू में मांगा और आमकाय कहते थे. इसके बाद साल 1498 में पुर्तगाली व्यापारी ने आम को मंगा कहना शुरू किया. धीरेधीरे इसे मैंगो पुकारा जाने लगा. इसके स्वाद के कारण लोकप्रियता बढ़ने लगी.

कहते हैं कि मुगल शासन के दौरान भी आम की खेती को खूब बढ़ावा दिया जाता था. इस काल में तोता परी, रातौल और केसर आम को ज्यादा उगाया जाता था. सन 1700 में आम को विदेश में भी पहचान मिलने लगी. 1740 में ये फल वेस्टइंडीज में लोगों का फेवरेट बन गया.

क्यों है भारत का राष्ट्रीय फल

भारत में फलों के दीवाने आम को खाना बहुत पंसद करते हैं. इसे इंडिया का नेशनल फ्रूट कहे जाने का बड़ा कारण खेती है. अकेला भारत पूरी दुनिया का 50 फीसदी आम उगाता है. इसमें हर तरह के टाइप होते हैं. राज्यों के हिसाब से बात करें तो यूपी का दशहरी, बिहार का जर्दालू, महाराष्ट्र का अल्फांसो, पश्चिम बंगाल का हिमसागर, आंध्र प्रदेश का बंगनपल्ली और गुजरात का केसर मशहूर है. केरल के कन्नूर जिले के कन्नपुरम को देसी मैंगो हेरिटेज एरिया बताया जाता है. क्योंकि यहां आम की करीब 200 वैरायटी उगाई जाती हैं.

लंगड़ा और चौसा नाम कैसे पड़ा

लंगड़े आम की कहानी लंगड़े आम का स्वाद हल्का खट्टा और मीठा है. इसके नाम के पीछे रोचक कहानी बताई जाती है. कहते हैं कि इसकी उगाई करने वाला एक किसान विकलांग था. जब उसने आम उगाया और मार्केट में उसे बहुत पंसद किया गया तो लोगों ने ये जानना चाहा ये कहां का आम है. जब ये पता चला कि नई किस्म के आम को उगाने वाला किसान विकलांग है तो इसे लंगड़ा आम पुकारा जाने लगा. वैसे ये महज एक कहानी भी हो सकती है.

चौसा नाम कैसे पड़ा आम के इस टाइप को नाम शेरशाह सूरी ने दिया था. कहते हैं कि साल 1539 में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को बिहार के चौसा नाम की जगह पर युद्ध में हराया था. इस जीत का जश्न यहीं रखा गया और यहां आम का स्वाद भी चखा गया. आम की जो किस्म यहां खाई गई उसे चौसा नाम दिया गया.

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