नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. विजेता का ऐलान 9 अक्टूबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगा. इस बार पुरस्कार की दौड़ में कुल 287 उम्मीदवार हैं. इनमें अलगअलग क्षेत्रों की 208 हस्तियां कुल 79 संगठन शामिल हैं. नोबेल कमेटी हमेशा की तरह उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है. बावजूद इसके दावेदारों के नाम विभिन्न माध्यमों से दुनिया के सामने तैर रहे हैं.

नोबेल समिति नामांकन और विचारविमर्श से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रखती है. ऐसे में चर्चा में आए नाम विशेषज्ञों, पूर्वानुमानकर्ताओं और नामांकन करने वालों की सार्वजनिक टिप्पणियों पर आधारित हैं.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्यों चर्चा में है?
इस साल की सबसे अप्रत्याशित संभावनाओं में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी आईएसएस का नाम शामिल है. ओस्लो स्थित पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी प्रिओ के कार्यकारी निदेशक हाकोन गेरलो ने इसे देशों के बीच सहयोग का दुर्लभ प्रतीक बताया है. आईएसएस में अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा के साझेदार मिलकर काम करते हैं. स्टेशन नवंबर 2000 से लगातार आबाद है.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन. फोटो: Pixabay
खास बात यह है कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भी अमेरिकी और रूसी अंतरिक्ष सहयोग पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ. प्रिओ के मुताबिक, आईएसएस दिखाता है कि भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी साझा और शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए साथ काम कर सकते हैं. यद्यपि, आईएसएस का नाम चर्चा में होना यह नहीं बताता कि समिति ने उसे पुरस्कार के लिए चुना है. अंतिम फैसला केवल नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.
डोनाल्ड ट्रंप और मार्क कार्नी पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर की है. कुछ नेताओं और सांसदों ने उन्हें नामित करने की बात कही है. फिर भी नोबेल समिति इसकी पुष्टि नहीं करती. ट्रंप के नाम को लेकर बहस भी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़ा अमेरिकाइजरायल संघर्ष उनकी संभावित उम्मीदवारी को विवादास्पद बना सकता है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि समिति अक्सर ऐसे विकल्प पर विचार करती है जिसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जा सके.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में है. अमेरिकी टैरिफ और अन्य मुद्दों पर ट्रंप के सामने अपनी बात रखने के कारण कार्नी ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है. लेकिन विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि उन्हें पुरस्कार मिलना अमेरिकाकनाडा संबंधों पर असर डाल सकता है. कार्नी का नाम भी समिति की ओर से पुष्ट नहीं है.
कई संगठन और समूह भी दावेदारों में
इस साल के उम्मीदवारों में 79 संगठन हैं. चर्चा में आए संगठनों और समूहों में सूडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स शामिल हैं. यह स्वयंसेवकों का जमीनी राहत नेटवर्क है. सूडान के युद्ध के बीच यह लोगों तक भोजन, चिकित्सा सहायता और दूसरी जरूरी मदद पहुंचाता है. यूक्रेन के बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रन और बच्चों के अधिकारों के पैरोकार मिकोलाय कुलेबा का नाम भी सामने आया है. कुलेबा, सेव यूक्रेन के प्रमुख हैं. चर्चा इन्हें संयुक्त रूप से पुरस्कार के संभावित दावेदार के तौर पर देखती है.
पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स यानी सीपीजे का नाम भी चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों के लिए हाल के दो साल बेहद घातक रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था से जुड़े दो संस्थान, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी आईसीजे और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी, भी साथ में चर्चा में हैं. इन संस्थाओं का काम अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबदेही से जुड़ा है. दोनों को लेकर राजनीतिक समर्थन और आलोचना, दोनों मौजूद हैं.
नोबेल प्राइज.
नामांकन का मतलब पुरस्कार मिलना नहीं
नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन होना अपनेआप में समिति की मंजूरी या सम्मान नहीं है. पात्र नामांकनकर्ता किसी व्यक्ति या संगठन का नाम भेज सकते हैं. लेकिन समिति हर साल नामांकित उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक नहीं करती. समिति यह भी पुष्टि नहीं करती कि कोई खास व्यक्ति या संस्था नामांकित है या नहीं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसलिए ट्रंप, कार्नी, आईएसएस, सूडान के राहतकर्मियों या अन्य नामों को पक्का उम्मीदवार सर्वथा सही नहीं माना जाएगा. ये नाम मीडिया रिपोर्ट्स विशेषज्ञों की सूची और सार्वजनिक बयानों के आधार पर चर्चा में हैं.
शांति पुरस्कार की शर्तें क्या हैं?
नोबेल शांति पुरस्कार की बुनियाद अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में है. इस वसीयत के अनुसार पुरस्कार उस व्यक्ति को दिया जाना चाहिए जिसने राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने, स्थायी सेनाओं को खत्म करने या कम करने, और शांति सम्मेलनों के आयोजन व प्रसार के लिए सबसे अधिक या सबसे अच्छा काम किया हो.
आज पुरस्कार व्यक्ति के साथसाथ संगठन को भी दिया जा सकता है. किसी उम्मीदवार का नाम पात्र नामांकनकर्ता को प्रस्तावित करना होता है. उम्मीदवार खुद को नामांकित नहीं कर सकता. नोबेल समिति के अनुसार, पात्र नामांकनकर्ताओं में राष्ट्रीय संसदों और सरकारों के सदस्य, कुछ अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं के सदस्य, संबंधित विषयों के विश्वविद्यालयी प्रोफेसर, शांति अनुसंधान संस्थानों के निदेशक, पूर्व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और समिति के वर्तमान या पूर्व सदस्य शामिल हैं.
नामांकन से पुरस्कार तक की प्रक्रिया
नामांकन की समयसीमा आम तौर पर पुरस्कार वाले साल की 31 जनवरी होती है. 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया की अंतिम तारीख बीत चुकी है. इसके बाद समिति योग्य नामांकनों पर विचार करती है और अधिक विस्तृत जांच के लिए एक छोटी सूची तैयार करती है. यह सूची आम तौर पर सार्वजनिक नहीं होती. फिर नोबेल संस्थान के स्थायी सलाहकार और जरूरत पड़ने पर अन्य विशेषज्ञ उम्मीदवारों के काम का आकलन करते हैं.
समिति कई महीनों तक चर्चा करती है. वह सर्वसम्मति से फैसला करने की कोशिश करती है. यदि सहमति न बने, तो बहुमत से निर्णय लिया जा सकता है. साल 2026 के विजेता का ऐलान 9 अक्टूबर को ओस्लो में होगा. पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा. घोषणा से पहले सामने आने वाले नामों को अटकल या सार्वजनिक चर्चा के रूप में ही देखना चाहिए.