Tata Sons पर RBI की सख्त नजर! ‘अपर लेयर NBFC’ घोषित, अब मानने होंगे बैंकों जैसे कड़े नियम

Tata Sons पर RBI की सख्त नजर! ‘अपर लेयर NBFC’ घोषित, अब मानने होंगे बैंकों जैसे कड़े नियम

भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को टाटा संस को ‘अपर लेयर नॉनबैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी’ के तौर पर वर्गीकृत किया. जून से लागू हुए नए नियमों के तहत, 1 ट्रिलियन रुपए से ज्यादा एसेट वाली NBFCs को ‘अपर लेयर’ में रखा जाता है. इससे उन पर सख्त रेगुलेटरी निगरानी होती है और उन्हें तीन साल के अंदर लिस्ट होना ज़रूरी हो जाता है. मार्च 2026 तक 2 ट्रिलियन रुपए से ज्यादा के स्टैंडअलोन एसेट के साथ, टाटा संस इसी कैटेगरी में आती है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। ‘अपर लेयर’ में बड़ी और सिस्टम के लिए अहम NBFCs शामिल होती हैं. अपने बड़े साइज, आपस में जुड़े होने और फाइनेंशियल सिस्टम में अपनी अहमियत की वजह से इन पर ज्यादा रेगुलेटरी और सुपरवाइज़री निगरानी रखी जाती है.

Tata Sons पर RBI की सख्त नजर! ‘अपर लेयर NBFC’ घोषित, अब मानने होंगे बैंकों जैसे कड़े नियम

सरेंडर के आवेदन पर विचार

टाटा संस को NBFC कैटेगरी के तहत कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर पहचाना जाता है. कंपनी को अब पब्लिक होना है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या सेंट्रल बैंक उसके CIC रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के आवेदन को स्वीकार करेगा. RBI ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि आवेदन पर अभी विचार किया जा रहा है. RBI ने कहा कि इस लिस्ट में टाटा संस को शामिल करने से उसके NBFC रजिस्ट्रेशन को छोड़ने के पेंडिंग आवेदन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी एक ऐसी NBFC होती है जिसका मुख्य काम ग्रुप कंपनियों में निवेश करना होता है. नियमों के अनुसार, इसकी कुल संपत्ति का कम से कम 90 फीसदी हिस्सा ऐसी कंपनियों के इक्विटी शेयरों, प्रेफरेंस शेयरों, बॉन्ड, डिबेंचर, डेट या लोन में लगा होना चाहिए.

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