
संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर और भारतपाकिस्तान संघर्ष पर दिए गए बयान के बाद भारत ने जवाबी हमला बोला। भारत ने पाकिस्तान पर झूठ और छल का आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने के गंभीर परिणाम होंगे।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शुक्रवार रात ‘जवाब देने के अधिकार’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की नीतियों, सेना के प्रभाव और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की वास्तविकता उसके प्रतिनिधियों के बयानों से अलग है और आतंकवाद को लेकर उसका रवैया न भारत के लिए और न ही दुनिया के लिए लाभकारी है।
शहबाज शरीफ ने उठाया कश्मीर का मुद्दा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में करीब 23 मिनट का संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने कश्मीर मुद्दा उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘समय पर हस्तक्षेप’ को दिया।
शरीफ ने ट्रंप के ‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बची। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है, ताकि क्षेत्र में दोबारा 2025 जैसे संघर्ष की स्थिति न बने।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर उपदेश देना विडंबनापूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में वास्तविक फैसले सेना लेती है और राजनीतिक नेतृत्व उसके प्रभाव में काम करता है।
गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को आजीवन कानूनी छूट दिए जाने की व्यवस्था सामने आई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की वास्तविकता उसके प्रतिनिधियों के बयानों से नहीं छिप सकती।
भारत की प्रथम सचिव ने कहा, “सालदरसाल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।”
11 सितंबर हमले का जिक्र कर पाकिस्तान को घेरा
भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बयान के संदर्भ में 11 सितंबर 2001 के अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों का भी उल्लेख किया। गहलोत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शरीफ की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब करीब दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी मनाई थी।
उन्होंने कहा कि इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।
गहलोत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।
कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख
शहबाज शरीफ के कश्मीर संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पेटल गहलोत ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मूकश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।
उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मूकश्मीर का मुद्दा उठाते हुए वहां के लोगों के अधिकारों और सुरक्षा की स्थिति पर सवाल किए। गहलोत ने कहा कि रावलाकोट के लोगों से वहां हुई हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछा जाना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों और हालिया चुनावों में धांधली के आरोपों का भी उल्लेख किया।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र, आतंकवाद पर सख्त संदेश
भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले और उसके बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। गहलोत ने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया।
उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। गहलोत ने यह भी कहा कि इससे उन व्यवस्थाओं पर सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।
अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी पाकिस्तान को घेरा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर पाकिस्तान की आलोचना की। पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार को दुनिया जानती है।
उन्होंने पाकिस्तान की व्यवस्था में ईशनिंदा कानूनों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक असहिष्णुता पर ऐसे शासन की टिप्पणियां विरोधाभासी हैं, जिस पर खुद अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि खोखले बयानों से दुनिया को गुमराह नहीं किया जा सकता।