
लखनऊ, अमृत विचार उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालन के क्षेत्र में एतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में पशुओं के लिए अस्पताल बनाने जा रही है। इन अस्पतालों में पशुओं का अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति से इलाज किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इन अस्पतालों में पशुओं को वह सभी सुविधाएं मिलेंगी जो नागरिकों को आधुनिक अस्पतालों में मिलती हैं। विभाग ने अस्पताल के डिजाइन की स्वीकृति भी दे दी है साथ ही अस्पताल के निर्णाण की लागत भी निर्धारित कर दी है।
प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित किए गए इस एतिहासिक परियोजना को पशुधन के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जा रहा है। इस अस्पताल में न सिर्फ गोवंश, महिश वंशीय जानवरों का इलाज होगा बल्कि घरेलू पेट्स, बकरियों, भेड़ों आदि का भी इलाज होगा। ताकि जो उद्यमी बकरी, भेड़ आदि का पालन कर रहे हैं, उन्हें भी यह सुविधा मिलती रहे।
परियोजना के मुताबिक इन अस्पतालों में आईसीयू, बेंटिलेटर, तक की सुविधा मिलेगी। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। मंडल मुख्यालय में स्थापित होने वाले अस्पतालों में ही दवाओं का स्टोर होगा। अनुदानित लागत पर दवाएं भी मिलेंगी। अधिकारियों के मुताबिक 403 अस्पताल बनने हैं, जिसे मंडल मुख्यालय, जिला मुख्यालय और विकास खंड क्षेत्र में बांटा जाएगा। प्राथमिक इलाज पीएचसी और सीएचसी के तर्ज पर किया जाएगा। जानवर की स्थिति गंभीर होने पर उसे जिला और मंडल मुख्यालय रेफर किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम ने बताया कि पूरे प्रदेश में जानवरों, पेट्स आदि से जुड़ी सुविधाओं का अध्ययन कराया गया तब पता चला कि वेटिनरी अस्पताल की बहुत आवश्यकता है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पशुपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन होगा। विभाग का उद्देश्य दुग्ध के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना और इस क्षेत्र में अत्यधिक रोजगार सृजन करना है।
| अस्पताल की श्रेणी | प्रस्तावित लागत |
|---|---|
| मंडल मुख्यालय अस्पताल, मेडिसिन स्टोर व कोल्ड रूम सहित | 1147.24 लाख रुपये |
| जिला मुख्यालय अस्पताल, मेडिसिन स्टोर सहित | 1100.99 लाख रुपये |
| ब्लॉक स्तरीय अस्पताल, टाइप1 ट्रांजिट रेजीडेंस सहित | 282.62 लाख रुपये |
| प्राथमिक स्तरीय अस्पताल | 121.07 लाख रुपये |