
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने इतिहास रच दिया। महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी हेइडी क्वाच को फाइनल में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स के जूडो इतिहास में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं।
यह उपलब्धि सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय जूडो के लिए नया अध्याय मानी जा रही है।
गोल्ड जीतने के बाद CM योगी और यूपी पुलिस का जताया आभार
स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता डे ने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश पुलिस में मिली नौकरी को दिया। उन्होंने कहा, “मैं यूपी पुलिस में हूं। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का धन्यवाद करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी। इस नौकरी से मुझे सहारा मिला। इसी की बदौलत मैं यहां तक पहुंची और गोल्ड मेडल जीत सकी।”
अस्मिता वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस में सबइंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं।
https://twitter.com/myogiadityanath/status/2083241912329494954?s=20
साइकिल रिपेयर की दुकान से शुरू हुआ सफर
22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता डे का बचपन एक साधारण परिवार में बीता। उनके पिता अर्जुन कुमार डे साइकिल रिपेयर का काम करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया।
दिलचस्प बात यह है कि अस्मिता ने शुरुआत जूडो से नहीं, बल्कि 800 मीटर दौड़ से की थी। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनकी मुलाकात एक कोच से हुई, जिसने उन्हें जूडो अपनाने की सलाह दी। यही फैसला उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
खेलो इंडिया से TOPS तक का सफर
अस्मिता की शुरुआती ट्रेनिंग बेलोनिया विद्यापीठ कोचिंग सेंटर में कोच बीना देबनाथ के मार्गदर्शन में हुई। इसके बाद उन्होंने त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में माणिक लाल देब के साथ प्रशिक्षण लिया।
स्कूल प्रतियोगिताओं और खेलो इंडिया में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें वर्ष 2018 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भोपाल रीजनल सेंटर में प्रशिक्षण का मौका मिला। यहां अनुभवी कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय टीम और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप तक अपनी जगह बनाई।
लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया शानदार प्रदर्शन
अस्मिता डे ने वर्ष 2022 में थाईलैंड में आयोजित एशियन कैडेट एवं जूनियर जूडो प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर त्रिपुरा की पहली जूडो खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।
इसके बाद उन्होंने:
* 2023 में मकाऊ जूनियर एशिया कप में गोल्ड मेडल जीता।
* कुवैत एशियन ओपन में सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
* 2025 में मोरक्को के कैसाब्लांका अफ्रीकन ओपन में पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय गोल्ड जीता।
* 2026 एशियन सीनियर चैंपियनशिप में पांचवां स्थान हासिल कर अपनी क्षमता साबित की।
राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कई स्वर्ण पदक जीते और 202324 में जूनियर नेशनल चैंपियन बनीं।
ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के दम पर जीता गोल्ड
ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में अस्मिता डे ने क्वार्टर फाइनल में स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद सेमीफाइनल में समर शॉ को मात देकर फाइनल में जगह बनाई।
फाइनल मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वाच के खिलाफ एक समय वह पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की। मुकाबला ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचा, जहां निर्णायक थ्रो के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी बधाई
अस्मिता डे की ऐतिहासिक सफलता पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अस्मिता डे ने वैश्विक मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने इस उपलब्धि को देश की बेटियों के साहस, अनुशासन, संकल्प और परिश्रम का प्रेरणादायक उदाहरण बताया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।