
नई दिल्ली: दुनिया भर में अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों की अपनी अनूठी परंपराएं हैं। इन्हीं में से एक है ‘फामादिहाना’ (Famadihana), जिसे दुनिया की सबसे अनोखी अंतिम संस्कार संबंधी परंपराओं में गिना जाता है। यह परंपरा अफ्रीकी द्वीपीय देश मैडागास्कर (Madagascar) के कुछ समुदायों में आज भी निभाई जाती है।
क्या है फामादिहाना परंपरा?
फामादिहाना का अर्थ है “हड्डियों को पलटना” (Turning of the Bones)। इस रस्म के दौरान परिवार के लोग कुछ वर्षों के अंतराल पर अपने पूर्वजों के अवशेषों को पारिवारिक समाधि (कब्र) से सम्मानपूर्वक बाहर निकालते हैं, उन्हें नए रेशमी कफन में लपेटते हैं और फिर धार्मिक व पारिवारिक अनुष्ठान करते हैं।
शोक नहीं, यादों का उत्सव
इस परंपरा के दौरान परिवार और रिश्तेदार एकत्रित होकर संगीत, नृत्य और सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं। कई लोग पूर्वजों के अवशेषों को कंधे पर उठाकर पारंपरिक संगीत के बीच सम्मानपूर्वक जुलूस भी निकालते हैं। इसका उद्देश्य शोक मनाना नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को सम्मान देना और उनकी स्मृतियों का उत्सव मनाना होता है।
क्यों निभाई जाती है यह रस्म?
मैडागास्कर के कुछ समुदायों की मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी पूर्वज परिवार का हिस्सा बने रहते हैं। उनका विश्वास है कि पूर्वजों का सम्मान करने और समय-समय पर उन्हें याद करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इसी कारण फामादिहाना को प्रेम, सम्मान और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।
हर जगह नहीं निभाई जाती यह परंपरा
ध्यान देने वाली बात यह है कि फामादिहाना पूरे मैडागास्कर में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से मेरिना (Merina) और बेटसिलियो (Betsileo) जैसे कुछ समुदायों द्वारा ही निभाई जाती है। आधुनिक समय में आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस परंपरा का प्रचलन कुछ क्षेत्रों में कम भी हुआ है, लेकिन यह अब भी मैडागास्कर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
फामादिहाना दुनिया की उन परंपराओं में शामिल है, जो यह दिखाती हैं कि अलग-अलग संस्कृतियों में पूर्वजों को याद करने और सम्मान देने के तरीके कितने विविध और अनोखे हो सकते हैं।
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