Quick Samachar: ईरान और अमेरिका के बीच एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, जब दुनिया होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह से खुलने का इंतज़ार कर रही है, तब संयुक्त अरब अमीरात इस अहम रास्ते पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए एक बहुत बड़े और महत्वाकांक्षी प्लान पर काम कर रहा है. UAE के विदेश व्यापार मंत्री थानी अल जायौदी ने एक इंटरव्यू में कहा कि हम होर्मुज पर निर्भरता को शून्य करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह रास्ता खुला है या नहीं. यह खुलेगा और हमें उम्मीद है कि ऐसा जल्द ही होगा, लेकिन हम अपने नए प्लान को नहीं रोकेंगे.

ईरान की दादागिरी होगी खत्म! होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता ‘Zero’ करेगा UAE, खाड़ी देशों में छिड़ा नया ‘ऑयल वॉर’​
ईरान की दादागिरी होगी खत्म! होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता ‘Zero’ करेगा UAE, खाड़ी देशों में छिड़ा नया ‘ऑयल वॉर’​

फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर बमबारी शुरू करने के बाद से होर्मुज का रास्ता लगभग बंद हो गया है. इससे एनर्जी और अन्य सामानों की ग्लोबल सप्लाई के लिए इस जलमार्ग के महत्व का पता चला है. UAE को पहले ही इस स्ट्रेट से आंशिक रूप से बचकर निकलने का फायदा मिला है. उसने अपने पूर्वी तट पर मौजूद बंदरगाहों तक कुछ कच्चे तेल को पहुंचाने के लिए पहले से मौजूद पाइपलाइन का इस्तेमाल किया है. हाल के हफ्तों में देश होर्मुज के ज़रिए कुछ तेल कार्गो भेजने में भी कामयाब रहा है, जिसमें जहाज़ों ने पकड़े जाने से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाकर यात्रा की.

क्या है यूएई की प्लानिंग

अल जायौदी के अनुसार, UAE के प्लान का मुख्य हिस्सा डिब्बा, फुजैराह और खोर फक्कन जैसे पूर्वी बंदरगाहों का बड़े पैमाने पर विस्तार करना है, जो ओमान की खाड़ी के तट पर स्ट्रेट के बाहर स्थित हैं. उन्होंने कहा कि यूएई उसी तटरेखा पर कम से कम एक और नया बंदरगाह भी बनाएगा. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही नई पाइपलाइनों, रेल और सड़क नेटवर्क में भी भारी निवेश किया जाएगा. ये प्रोजेक्ट पूर्वी बंदरगाहों और देश के तेल व गैस क्षेत्रों तथा पेट्रोलियम सुविधाओं के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगे.

मई के मध्य में घोषित फुजैराह के जरिए कच्चे तेल के निर्यात को दोगुना करने के लिए दूसरी पाइपलाइन के निर्माण में तेजी लाने के अलावा, UAE तीसरी पेट्रोलियम पाइपलाइन बनाने पर भी विचार कर रहा है. अल जायौदी ने कहा कि देश पेट्रोकेमिकल्स, LNG और अन्य ऊर्जा उत्पादों के निर्यात को सुनिश्चित करने के लिए और विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. हालांकि उन्होंने इन प्रोजेक्ट्स की लागत और समयसीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और कहा कि ये अभी प्लानिंग के चरण में हैं, लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए शायद कई अरब डॉलर की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि दिशा तय हो चुकी है, हम आगे बढ़ने के लिए पूरी फिजिबिलिटी स्टडी कर रहे हैं. मुश्किल समय में, आप हमेशा अपनी कमियों को पहचानते हैं और उन पर काम करना शुरू करते हैं.

यूएई के लिए नहीं होगा असान

युद्ध से पहले दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता था, और इसके बंद होने से महंगाई बढ़ी है, जिसका असर ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ा है. इस स्ट्रेट पर UAE की निर्भरता कम करना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा. पाइपलाइनें शायद OPEC के इस पूर्व सदस्य देश को अपना सारा या ज़्यादातर कच्चा और रिफाइंड तेल पूर्वी बंदरगाहों तक भेजने में मदद कर सकें, लेकिन LNG और एल्युमीनियम जैसी दूसरी चीज़ों को दूसरी तरफ़ भेजना ज़्यादा मुश्किल होगा. इसके अलावा, UAE आयात के लिए अपने खाड़ी बंदरगाहों, जैसे जेबेल अली — जो एशिया के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर हब है — पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. पूर्वी बंदरगाहों से दुबई और अबू धाबी जैसे बड़े शहरों तक ट्रकों से सामान पहुंचाना ज़्यादा महंगा होगा.

दोगुनी से ज्यादा होगी एक्सपोर्ट क्षमता

अल जेयोदी ने कहा कि रेलवे के बड़े विस्तार से इन लागतों को कम किया जा सकेगा और जेबेल अली और अबू धाबी का खलीफा बंदरगाह, दोनों ही सामान के दोबारा वितरण के लिए मुख्य केंद्र बने रहेंगे. UAE अभी फारस की खाड़ी में एक LNG एक्सपोर्ट टर्मिनल चलाता है. देश खाड़ी में ही एक और प्रोजेक्ट बना रहा है, जिससे उसकी एक्सपोर्ट क्षमता दोगुनी से भी ज़्यादा हो जाएगी. ईरान पर USइजरायल के हमलों — जिनकी वजह से तेहरान ने खाड़ी के दूसरे देशों पर हमला किया — ने उस देश को एक अभूतपूर्व झटका दिया, जिसने अपनी इकॉनमी को मुक्त व्यापार और समुद्री आवाजाही पर खड़ा किया है और जो मध्य पूर्व के युद्धों से दूर रहा है. ईरान ने UAE पर लगभग 3,000 ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो किसी भी दूसरे देश पर किए गए हमलों से ज़्यादा थीं. हालांकि ज़्यादातर हमलों को रोक दिया गया, लेकिन कुछ हमलों ने पूर्वी तट पर फुजैराह समेत ज़रूरी एनर्जी और बंदरगाह सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया.

ये लाइन साबित हुई लाइफलाइन

UAE ने खोर फक्कन के ज़रिए कार्गो आयात और फुजैराह से तेल निर्यात बढ़ाकर होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के असर को कुछ हद तक कम किया है. तेल क्षेत्रों से फुजैराह बंदरगाह तक मौजूद 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली पाइपलाइन एक अहम लाइफलाइन साबित हुई. अल ज़ेयोदी ने कहा कि कई चीज़ों को लानेले जाने में एयर कार्गो ने बड़ी भूमिका निभाई — हालांकि समुद्री रास्ते की तुलना में इसमें लागत बहुत ज़्यादा आई. मिस्र और भारत जैसे देशों के बंदरगाहों पर कार्गो की डिलीवरी और क्लीयरेंस की प्रक्रिया ने भी इसमें मदद की. देश की अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज़ के महत्व को रेखांकित करते हुए, UAE ने लगातार कहा है कि ईरान को इसे फिर से खोलना चाहिए और बिना रोकटोक आवाजाही की अनुमति देनी चाहिए. अमेरिका, यूरोप और खाड़ी के अन्य देशों के साथ मिलकर, वह ईरान के इस दावे का विरोध कर रहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक युद्ध खत्म होने के बाद भी नेविगेशन शुल्क ले सकता है.