क्यों टिकी हैं SBI Mutual Fund के IPO पर नजरें? टकटकी लगाए बैठा है 2 फीसदी का ‘श्राप’!

क्यों टिकी हैं SBI Mutual Fund के IPO पर नजरें? टकटकी लगाए बैठा है 2 फीसदी का ‘श्राप’!

पिछले कुछ सालों में भारत के अरबों डॉलर के IPO ने मिलाजुला रिटर्न दिया है, और देश के कई बड़े IPO में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है. SBI फंड्स मैनेजमेंट, जिसने मंगलवार को अपना 9,813 करोड़ रुपये का IPO लॉन्च किया, अब यह देखेगा कि क्या एक मजबूत पैरेंट कंपनी वाली और मुनाफा कमाने वाली मार्केट लीडर कंपनी इस रिकॉर्ड को बेहतर बना सकती है.

क्यों टिकी हैं SBI Mutual Fund के IPO पर नजरें? टकटकी लगाए बैठा है 2 फीसदी का ‘श्राप’!

13 बड़े IPO के एनालिसिस से पता चलता है कि आठ IPO अपने एडजस्टेड इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि पांच IPO 13 जुलाई तक नुकसान में रहे हैं. इस ग्रुप का मीडियन रिटर्न 2 फीसदी से थोड़ा ज्यादा है, जिससे पता चलता है कि मुनाफा कुछ ही स्टॉक्स तक सीमित रहा है.

भारत के अरबों डॉलर के IPO का परफॉर्मेंस कैसा रहा?

9,000 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाने वाले IPO में ‘एटरनल’ सबसे ज्यादा फ़ायदे में रही है, जो अपने इश्यू प्राइस से 275 फीसदी ऊपर गई है. HDFC लाइफ इंश्योरेंस और कोल इंडिया ने भी अच्छा रिटर्न दिया है, जबकि टाटा कैपिटल में लगभग 11 फीसदी की बढ़त हुई है. दूसरी ओर, न्यू इंडिया एश्योरेंस को अपने एडजस्टेड इश्यू प्राइस से 77 फीसदी का नुकसान हुआ है, जबकि NMDC में 72 फीसदी की गिरावट आई है. जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और One97 कम्युनिकेशंस भी अपने ऑफर प्राइस से काफ़ी नीचे ट्रेड कर रहे हैं. भारत के सबसे बड़े IPO, हुंडई मोटर इंडिया में लिस्टिंग के लगभग दो साल बाद भी 2 फीसदी से कम की बढ़त हुई है. HDB फाइनेंशियल सर्विसेज भी अपने ऑफर प्राइस से बस थोड़ी ही ऊपर है.

साइज से ज्यादा सेफ्टी नहीं मिली

परफ़ॉर्मेंस से पता चलता है कि बड़े इश्यू साइज और जानेमाने ब्रांड होने से निवेशकों को रिटर्न की गारंटी नहीं मिली. ऑफर के समय वैल्यूएशन, लिस्टिंग के बाद कमाई में बढ़ोतरी और बिजनेस के नेचर ने ज्यादा बड़ी भूमिका निभाई है.

पब्लिक सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के IPO की कीमत ऐसी तय की गई थी जिसे बाद में निवेशक सही नहीं मान पाए. One97 कम्युनिकेशंस जैसी नई जमाने की कंपनियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि मार्केट लिस्टिंग के बाद मुनाफा कमाने का साफ रास्ता देखना चाहता था.

बेहतर परफ़ॉर्मेंस करने वाली कंपनियों का बिजनेस आमतौर पर पहले से जमा हुआ था, उनकी कमाई बढ़ रही थी या लंबे समय में उनका मुनाफा उनके IPO वैल्यूएशन के बराबर आ गया था. ‘एटरनल’ इसका एक बड़ा उदाहरण है, हालांकि लिस्टिंग के बाद काफी उतारचढ़ाव के बाद उसे यह फायदा मिला.

SBI फंड्स के साथ मजबूत फाइनेंशियल स्थिति

SBI फंड्स मैनेजमेंट, म्यूचुअल फंड के तिमाही औसत एसेट्स अंडर मैनेजमेंट के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है. मार्च 2026 तक यह 12.5 लाख करोड़ रुपए का मैनेजमेंट कर रही थी और इसकी मार्केट हिस्सेदारी 15.3 फीसदी थी.

वित्त वर्ष 2026 में इसके ऑपरेशन्स से होने वाली कमाई 22 फीसदी बढ़कर 4,389 करोड़ रुपए हो गई, जबकि मुनाफा बढ़कर 3,067 करोड़ रुपए हो गया. कंपनी ने 79 फीसदी का EBITDA मार्जिन और लगभग 51 फीसदी का रिटर्न ऑन इक्विटी दर्ज किया.

यह IPO पूरी तरह से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और Amundi की तरफ से ‘ऑफर फॉर सेल’ है. SBI फंड्स को इस इश्यू से कोई पैसा नहीं मिलेगा. प्राइस बैंड 545574 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है, जिससे ऊपरी स्तर पर कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपए हो जाती है.

क्या कह रहे हैं जानकार?

ईटी की रिपोर्ट में निर्मल बांग ने कहा कि SBI फंड्स की मार्केट लीडरशिप, बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, प्रॉफिटेबिलिटी और इंडस्ट्री का अच्छा आउटलुक निवेश के पक्ष में हैं. प्राइस बैंड के अपर लेवल पर, IPO की वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2026 की कमाई का 38.1 गुना और एंटरप्राइज वैल्यू से EBITDA का 33.6 गुना है. निर्मल बांग ने कहा कि यह HDFC एसेट मैनेजमेंट और ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट जैसी लिस्टेड कंपनियों की वैल्यूएशन से कम है.

आनंद राठी ने भी कहा कि कंपनी का स्केल, एसेटलाइट बिजनेस मॉडल और रिटेल फ्रेंचाइजी, SBI और Amundi के सपोर्ट के साथ मिलकर इसकी ताकत हैं. हालांकि, उन्होंने इस इश्यू को ‘पूरी तरह से कीमत वाला’ बताया.

इससे यह तय हो सकता है कि क्या SBI फंड्स कई पिछले बिलियनडॉलर IPOs से बेहतर रिटर्न दे सकता है या नहीं. इसका फाइनेंशियल परफॉर्मेंस बाजार में बड़े ऑफर्स के साथ आने वाली कई नुकसान वाली कंपनियों की तुलना में बेहतर है. फिर भी, एक अच्छी क्वालिटी वाला बिजनेस भी कमजोर शेयरहोल्डर रिटर्न दे सकता है जब निवेशक शुरुआत में बहुत ज्यादा कीमत चुकाते हैं.

कंपनी को बाजार में गिरावट, निवेशकों द्वारा पैसा निकालने , मैनेजमेंट फीस पर दबाव और कम फीस वाले पैसिव प्रोडक्ट्स की ओर झुकाव से भी जोखिम का सामना करना पड़ता है. इसकी कमाई एसेट्स अंडर मैनेजमेंट और कैपिटलमार्केट की स्थितियों से गहराई से जुड़ी हुई है.

SBI फंड्स के पास कई बड़े IPOs के खराब रिकॉर्ड को चुनौती देने के लिए स्केल, प्रॉफिटेबिलिटी और डिस्ट्रीब्यूशन की पहुंच है. हालांकि, इससे मिलने वाला फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कमाई इतनी तेजी से बढ़ सकती है कि उस वैल्यूएशन को बनाए रख सके जिस पर निवेशक इसमें पैसा लगा रहे हैं.

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