मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की तेजी से उभरती एफएमसीजी यूनिट रिलायंस कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड जिसे ईशा अंबानी संभाल रही हैं ने देश के एफएमसीजी सेक्टर में एक बड़ा वित्तीय मील का पत्थर हासिल कर लिया है. कंपनी का एफएमसीजी बिजनेस अपनी स्थापना के बाद से पहली बार EBITDA पॉजिटिव हो गया है.

कंपनी प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि शुरुआती निवेश और आक्रामक बाजार विस्तार के दौर से गुजरने के बाद, अब आने वाली तिमाहियों में बिजनेस की प्रोफिटिबिलिटी और ऑपरेटिंग मार्जिन में और भी ज्यादा सुधार देखने को मिलेगा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह की रिपोर्ट सामने आई है. पहले ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर EBITDA पॉजिटिव होने का क्या मतलब है?
क्या है EBITDA पॉजिटिव होने का मतलब?
वित्तीय मामलों में EBITDA किसी भी कंपनी के वास्तविक परिचालन/कामकाजी मुनाफे को दर्शाता है. एफएमसीजी जैसे सेक्टर में, जहां बाजार में पैठ बनाने के लिए शुरुआती सालों में विज्ञापन, डिस्ट्रीब्यूशन और भारी डिस्काउंटिंग पर बड़ा खर्च करना पड़ता है, वहां इतनी जल्दी EBITDA पॉजिटिव होना यह दिखाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल अब अपने पैरों पर खड़ा हो चुका है. यह उपलब्धि यह साबित करती है कि रिलायंस कंज्यूमर का रेवेन्यू अब उसके दैनिक परिचालन खर्चों से अधिक हो गया है.
कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि
रिलायंस इंडस्ट्रीज का FMCG बिजनेस पहली बार EBITDAपॉजिटिव हो गया है. यह कंपनी के लिए एक अहम उपलब्धि है क्योंकि वह तेजी से अपने कंज्यूमर ब्रांड बिज़नेस को बढ़ा रही है. मैनेजमेंट को उम्मीद है कि सप्लाईचेन में निवेश पूरा होने और सेल्स बढ़ने के साथ मुनाफा और बेहतर होगा. FMCG बिजनेस, रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी कंपनी ‘रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ के तहत आता है.
RCPL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केतन मोदी ने एनालिस्ट्स को बताया कि हालांकि कंपनी का फिलहाल मुख्य फोकस मार्केट शेयर हासिल करने पर है, लेकिन बिजनेस ने पहले ही EBITDA के स्तर पर ‘ब्रेकईवन’ हासिल कर लिया है. रिलायंस के पहली तिमाही के नतीजे घोषित होने के बाद शुक्रवार को एनालिस्ट के सवालों का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि जैसेजैसे हम अपना दायरा बढ़ाएंगे और पूरी सप्लाई चेन तैयार हो जाएगी, EBITDA में सुधार होगा. अभी हमारा फोकस मार्केट शेयर बढ़ाने पर है.
1 लाख करोड़ का है टारगेट
RCPL, जिसके पास कैम्पा कोला जैसे ब्रांड हैं, ने दिसंबर में डीमर्जर के बाद पहली रिपोर्टिंग अवधि—मार्च 2026 को खत्म होने वाले चार महीनों—के दौरान 125 करोड़ रुपए का नेट लॉस दर्ज किया. जून तिमाही में ग्रॉस रेवेन्यू दोगुने से ज्यादर बढ़कर 8,600 करोड़ रुपए हो गया, हालांकि कंपनी ने इस अवधि के लिए EBITDA या नेट प्रॉफिट का खुलासा नहीं किया.
मोदी ने कहा कि सभी कैटेगरी में लीडरशिप हासिल करना हमारा लक्ष्य बना हुआ है, क्योंकि हमने घोषणा की है कि हमारा लॉन्गटर्म लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 में इस कारोबार को 1,00,000 करोड़ रुपए का बनाना है. हम अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं और लीडरशिप हासिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं. RCPL सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 30,000 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है, जिसमें से 10,000 करोड़ रुपए पहले ही निवेश किए जा चुके हैं.
डार्क स्टोर्स का विस्तार
इसके अलावा, रिलायंस रिटेल के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर दिनेश तलुजा ने कहा कि कंपनी निवेश के मामले में अनुशासित रवैया अपनाते हुए मार्केट में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए अगले 912 महीनों में अपने ‘डार्क स्टोर्स’ के नेटवर्क का विस्तार जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि इस विस्तार के लिए बहुत ज्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत नहीं होगी क्योंकि ज्यादातर डार्क स्टोर्स मौजूदा ब्रिकएंडमोर्टार आउटलेट्स के अंदर ही बनाए जाएंगे. तलुजा ने कहा कि रिलायंस रिटेल अपने डार्क स्टोर विस्तार में “अनुशासित” रहेगी. उन्होंने कहा कि हम यह देख रहे हैं कि कौन से मार्केट सही हैं, कहां काफी डिमांड है और कौन से मार्केट तैयार हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जहां मुनाफे को लेकर हमारी उम्मीदें पूरी नहीं होंगी, वहां हम उन मार्केट से पीछे हट जाएंगे.
ऑर्डर वॉल्यूम में 100 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ
ईकॉमर्स में अपेक्षाकृत देर से कदम रखने के बावजूद, रिलायंस ने पिछले तीनचार तिमाहियों में ऑर्डर वॉल्यूम में 100 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की है. तलुजा ने कहा कि ऑनलाइन चैनलों का बढ़ता योगदान कुल रेवेन्यू ग्रोथ को तेज करेगा, भले ही ईकॉमर्स और क्विक कॉमर्स में निवेश का असर निकट भविष्य में मार्जिन पर पड़ता रहेगा. पिछली तिमाही तक, ग्रॉसरी की बिक्री में ऑनलाइन का हिस्सा 13% से ज़्यादा और कपड़ों व फुटवियर की बिक्री में 27% था.
तालुजा ने कहा कि भले ही ईकॉमर्स और क्विक कॉमर्स बिजनेस में निवेश से मार्जिन पर शॉर्टटर्म दबाव दिख रहा है, लेकिन इससे तीन साल में रिटेल बिजनेस का कुल EBITDA दोगुना हो जाएगा. रिलायंस रिटेल ने लगातार तीसरी तिमाही में EBITDA मार्जिन में गिरावट दर्ज की, जिसकी वजह रेवेन्यू में ईकॉमर्स का ज़्यादा योगदान और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण फिक्स्ड कॉस्ट का बढ़ना था.
तालुजा ने कहा कि आज की दुनिया में, ग्राहकों को सर्विस देने के लिए हर जगह बहुत सारे स्टोर खोलने की ज़रूरत नहीं है. हम कुछ स्टोर रख सकते हैं और फिर ग्राहकों को उनके घर पर सामान पहुंचा सकते हैं. रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी और जैसेजैसे स्केल बढ़ेगा, ऑपरेटिंग लेवरेज का फायदा मिलेगा. इससे पॉजिटिव EBITDA में बढ़ोतरी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां फिजिकल स्टोर खोलने में समय लगता है, वहीं ऑनलाइन बिजनेस को बहुत तेजी से बढ़ाया जा सकता है.