टर्मिनल कैंसर से जूझते पिता का लास्ट मैसेज वायरल, क्या होती है ये बीमारी, एक्सपर्ट से जानें हर डिटेल

टर्मिनल कैंसर से जूझते पिता का लास्ट मैसेज वायरल, क्या होती है ये बीमारी, एक्सपर्ट से जानें हर डिटेल

पिता और बेटे का एक इमोशनल वीडियो वायरल हो रहा है. पिता को टर्मिनल कैंसर है और वो अपने आखिरी मैसेज में महज 4 से 5 साल के बेटे को जरूरी चीजें समझा रहा है. मां और बहनों की देखरेख ठीक से करना…ऐसी कई बातें उस मजबूर पिता ने अपने बेटे को समझाईं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उस मजबूर पिता को टर्मिनल कैंसर ने अपनी चपेट में लिया हुआ था. यहां हम आपको ये बताने जा रहे हैं टर्मिनल कैंसर आखिर क्या होता है? इसमें इलाज का प्रोसेस कैसा होता है? क्या इससे बचाव संभव है?

टर्मिनल कैंसर से जूझते पिता का लास्ट मैसेज वायरल, क्या होती है ये बीमारी, एक्सपर्ट से जानें हर डिटेल

एक्सपर्ट बताते हैं कि टर्मिनल कैंसर… इस गंभीर बीमारी की एंड स्टेज है. इस स्टेज में पहुंचने के बाद डॉक्टर या हॉस्पिटल मरीज के कैंसर को खत्म करने पर फोकस नहीं करते. बल्कि कोशिश करते हैं कि पेशेंट को कंफर्टेबल लाइफ दी जाए. एक्सपर्ट से जानें इसके बारे में सबकुछ…

क्या होता है टर्मिनल कैंसर?

मनीष सैनी का कहना है कि टर्मिनल कैंसर्स हैं और दूसरे कैंसर्स लगभग एक जैसे नहीं होते हैं. आज की डेट में लंग, ब्रेस्ट या दूसरे कैंसर के होने पर उन्हें खत्म करने के लिए ट्रीटमेंट दिए जाते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि हम टर्मिनल कैंसर उनको बोलते हैं जब ट्रीटमेंट का असर होना कोई फायदेमंद पेशेंट को नहीं हो रहा है या डिजीज प्रोग्रेस कर रही है. इसके अलावा आगे के ट्रीटमेंट को देने का कोई फायदा नहीं हो पाता. ऐसे में सिर्फ हमारा जो मोटिव रहता है, पेशेंट को एक कंफर्टेबल लाइफ प्रोवाइड करने का रहता है क्योर का नहीं रहता है.

View this post on Instagram

A post shared by CHUTIYAPA 3M ❤

कैंसर टर्मिनल क्यों हो जाता है?

ऐसा तब होता है जब कैंसर समय के साथ इतना बढ़ जाता है कि वह शरीर के दूसरे अंगों तक फैल जाता है या उपलब्ध इलाज का उस पर असर बंद हो जाता है. कुछ मामलों में कैंसर इलाज के बाद भी दोबारा लौट आता है या लगातार बढ़ता रहता है. वहीं कुछ मरीजों की शारीरिक स्थिति ऐसी हो जाती है कि वे आगे का इलाज सहन नहीं कर पाते. ऐसी स्थिति में बीमारी को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं रहता, इसलिए हमारा उद्देश्य मरीज को दर्द और तकलीफ से राहत देना, लक्षणों को नियंत्रित रखना और उन्हें जितना संभव हो उतनी आरामदायक और सम्मानजनक जीवन गुणवत्ता देना होता है.

टर्मिनल कैंसर के लक्षण

इसके भी लक्षण होते हैं जो बताते हैं कि कंडिशन टर्मिनल कैंसर पर पहुंच गई है. इसमें बॉडी में थकान रहना, भूख कम लगना या कन्फ्यूजन रहना, स्लीप पैटर्न का खराब हो जाना, खाना निगलने में परेशानी होना, वेट लॉस होना, सांस लेने में तकलीफ या कभी कभी बीपी फ्लक्चुऐट होना, शामिल है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसे में पेशेंट्स को कंफर्टेबल लाइफ प्रोवाइड करना और एक एंड ऑफ लाइफ केयर देना हम सबकी जिम्मेदारी बन जाती है.

कैसे करें इसकी रोकथाम

इसकी रोकथाम का एक मुख्य कारण यही रहता है कि हमें जो कुछ प्रॉपर प्रिवेंटिव मेजर्स हैं उनको फॉलो करना चाहिए. जैसे कि अपनी जीवनशैली में स्मोकिंग और अल्कोहल को नजरअंदाज करना चाहिए. खाने पीने में हमें प्रोसेस्ड मीट, ज़्यादा मसाले वाला खाना या सॉल्टेड फूड कम लेना चाहिए और प्रॉपर ग्रीन वेजिटेबल्स, फ्रेश फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स का उपयोग ज़्यादा करना चाहिए.

इन बातों का रखें ध्यान

प्रॉपर हेल्थ स्क्रीनिंग जो जैसे कि ब्रेस्ट कैंसर के संबंधित या जो कोलन और जो हमारे लंग कैंसर के संबंधित स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल्स हैं, उनको फॉलो करना चाहि. सर्विक्स कैंसर के संबंधित हम वैक्सीनेशन के प्रोटोकॉल से सर्विक्स कैंसर की रोकथाम कर सकते हैं. स्क्रीनिंग एट द राइट एज इज़ इक्वली इम्पॉर्टेंट.

दूसरी बात है कि जिन लोगों की फैमिली हिस्ट्री बहुत स्ट्रॉन्ग है कैंसर की, जैसे ब्रेस्ट कैंसर की, ओवरी या कोलोरेक्टल कैंसर्स होते हैं, इनमें प्रॉपर जेनेटिक काउंसलर या डॉक्टर से मिलकर समय पर स्क्रीनिंग अर्ली एज में स्टार्ट करवाना चाहिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *