ट्रंप का टैरिफ बम! जेनेरिक दवा पर 2 साल 0 टैक्स, फिर 200% की बड़ी मार, कैसा होगा भारत पर असर

ट्रंप का टैरिफ बम! जेनेरिक दवा पर 2 साल 0 टैक्स, फिर 200% की बड़ी मार, कैसा होगा भारत पर असर

अमेरिकी प्रशासन ने वैश्विक फार्मास्युटिकल बाजार में एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक कदम उठाते हुए विदेशी जेनेरिक दवाओं के आयात पर एक नए टैरिफ स्ट्रक्चर की घोषणा की है. इस नीति का सीधा मकसद अमेरिका में दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत तथा चीन जैसे देशों से आने वाली सस्ती जेनेरिक दवाओं पर अपनी निर्भरता को खत्म करना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 1 अगस्त से दो साल तक 0 फीसदी टैरिफ लगेगा. इसके बाद, टैरिफ की दर एक साल के लिए 100 फीसदी और उसके बाद 200% कर दी जाएगी. आइए इस फैसले की बारीकियों, इसके टाइमलाइन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके असर को आसान भाषा में समझते हैं.

ट्रंप का टैरिफ बम! जेनेरिक दवा पर 2 साल 0 टैक्स, फिर 200% की बड़ी मार, कैसा होगा भारत पर असर

ट्रंप के टैरिफ फैसले की अहम बातें

  1. ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह कदम अमेरिका में जेनेरिक दवा बनाने का काम वापस लाने के लिए उठाया गया है. जो कंपनियां तय समयसीमा के अंदर प्लांट और उपकरण नहीं बनाएंगी, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा.
  2. ट्रंप अपनी ‘मोस्टफेवर्डनेशन’ दवा मूल्य निर्धारण नीति के जरिए दवा बनाने वाली कंपनियों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे कीमतें कम करके उतनी ही करें जितनी ज़्यादा आय वाले दूसरे देशों में लोग चुकाते हैं.
  3. US फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, अमेरिका में बिकने वाली 90 फीसदी से ज्यादा दवाएं जेनेरिक होती हैं.
  4. ट्रंप ने कहा कि पेटेंट वाली, ब्रांडेड या नई तरह की दवाओं के लिए नीति में कोई बदलाव नहीं होगा.
  5. दुनिया की सबसे बड़ी दवा कंपनियों ने पिछले साल अमेरिकी सरकार के साथ समझौते किए थे, जिनके तहत अरबों डॉलर की दवाओं को टैरिफ से छूट दी गई थी.
  6. ट्रंप ने अप्रैल में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत अमेरिका में आयात की जाने वाली ब्रांडेड दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी. यह तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि निर्माता सरकार के दवा मूल्य निर्धारण समझौतों को स्वीकार न कर लें या अपने उत्पादों को देश के भीतर बनाने का वादा न करें.

On Truth Social, US President Donald Trump posted, “Effective August 1st, 2026, all Generic Drugs being brought into the United States will continue to have a tariff of zero per cent for a two year period of time, after which the tariff will be raised to 100% for a one year pic.twitter.com/WMF3D7SpKg

— ANI July 21, 2026

क्या है ट्रंप का नया जेनेरिक ड्रग टैरिफ प्लान?

पहला चरण : अगले 2 वर्षों तक अमेरिका में आयात की जाने वाली किसी भी जेनेरिक दवा पर कोई नया टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. यह दो साल की मोहलत इसलिए दी गई है ताकि अमेरिकी बाजार में दवाओं की तत्काल किल्लत न हो और दवा कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन शिफ्ट करने का समय मिल सके.

दूसरा चरण : दो साल की संक्रमण अवधि खत्म होते ही विदेशी जेनेरिक दवाओं पर सीधे 100% का आयात शुल्क लागू कर दिया जाएगा.

तीसरा चरण : अगले चरण में इस सीमा को बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा, जिससे विदेशी दवाओं का अमेरिकी बाजार में आयात करना बेहद खर्चीला और लगभग अव्यवहारिक हो जाएगा.

ट्रंप का मास्टरप्लान

  • मेड इन अमेरिका’ का एजेंडा: अमेरिका चाहता है कि उनके नागरिक जो दवाएं खाते हैं, उनका निर्माण अमेरिकी धरती पर ही अमेरिकी वर्कफोर्स द्वारा किया जाए.
  • सप्लाई चेन और राष्ट्रीय सुरक्षा: कोविड19 महामारी और वैश्विक तनाव के दौरान अमेरिका ने महसूस किया कि जीवनरक्षक दवाओं के लिए विदेशी देशों पर अत्यधिक निर्भरता उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकती है.
  • चीन और भारत पर निर्भरता कम करना: वर्तमान में अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कुल जेनेरिक दवाओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत और चीन से आयात किया जाता है.

भारत की ओर से अमेरिका को किए जाने वाला फार्मा एक्सपोर्ट

साल

महीना

US मिलियन डॉलर

2025

अप्रैल

41.05

2025

मई

46.10

2025

जून

50.60

2025

जुलाई

49.87

2025

अगस्त

44.79

2025

सितंबर

45.79

2025

अक्टूबर

40.79

2025

नवंबर

41.23

2025

दिसंबर

53.09

2026

जनवरी

51.95

2026

फरवरी

47.42

स्रोत: वाणिज्य विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार

भारतीय फार्मा सेक्टर पर क्या होगा असर?

भारत को ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है और अमेरिकी बाजार भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है. अमेरिका में खपत होने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाएं भारत से जाती हैं.

  1. अल्पकालिक राहत: दो साल तक 0% टैरिफ रहने के कारण भारतीय कंपनियों को तुरंत कोई वित्तीय झटका नहीं लगेगा. इस अवधि में भारत से निर्यात जारी रहेगा और कंपनियों के पास नई रणनीति बनाने का समय होगा.
  2. दीर्घकालिक चुनौती: 2 साल बाद जब 100% और 200% का टैरिफ लागू होगा, तो भारतीय कंपनियों की दवाएं अमेरिकी बाजार में काफी महंगी हो जाएंगी. इससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर भारी दबाव आएगा.
  3. अमेरिका में लोकल मैन्युफैक्चरिंग का दबाव: भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में बने रहने के लिए या तो अमेरिका में अपने खुद के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने होंगे या फिर अमेरिकी स्थानीय कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर करने होंगे, जिससे उनकी लागत बढ़ जाएगी.

अमेरिका को सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट

आईईबीएफ के आंकड़ों के अनुसार भारत नॉर्थ अमेरिका, अफ्रीका, EU, ASEAN, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन , मिडिल ईस्ट, एशिया, CIS और यूरोप के अन्य इलाकों में फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करता है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष 2025 के दौरान, भारत ने दुनिया भर के 200 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट किया है. भारत का लगभग 50% एक्सपोर्ट नॉर्थ अमेरिका और यूरोप जैसे कड़े नियमों वाले बाज़ारों में होता है. वित्त वर्ष 2025 में भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक्सपोर्ट के टॉप पाँच देश USA, UK, ब्राज़ील, फ्रांस और साउथ अफ्रीका थे.

वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत से सबसे ज़्यादा इंपोर्ट करने वाले देशों में USA, UK और ब्राज़ील शामिल थे, जिनकी हिस्सेदारी क्रमश 34.61%, 3.01% और 2.56% थी. वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत से सबसे ज़्यादा इंपोर्ट करने वाले देशों में USA, UK और साउथ अफ्रीका शामिल थे, जिनकी हिस्सेदारी क्रमश 34.06%, 2.91% और 2.40% थी. वित्त वर्ष 2024 में इन देशों को भारत का फार्मा प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट इस प्रकार था: US को 8.73 बिलियन डॉलर, UK को 784.32 मिलियन डॉलर, साउथ अफ्रीका को 718.54 मिलियन डॉलर, नीदरलैंड को 699.16 मिलियन डॉलर और फ्रांस को 667.49 मिलियन डॉलर.

USFDA के लेटेस्ट इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, अप्रैल 2023 तक USFDA की मंज़ूरी वाली भारतीय फ़ॉर्मूलेशन कंपनियों को 6,316 मार्केट ऑथराइज़ेशन मिले थे, जो किसी भी दूसरे देश की तुलना में सबसे ज़्यादा हैं. 2022 की पहली छमाही में 350 के मुक़ाबले 2023 की पहली छमाही में कुल 410 Type II DMFs जमा किए गए, जो 17% की बढ़ोतरी को दिखाता है. इसके अलावा, जनवरी 2023 तक भारतीय कंपनियों द्वारा फ़ाइल किए गए DMFs की संख्या 4,505 थी.

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