डायना की मौत के बाद प्रिंस चार्ल्स ने गुस्से में क्या कहा था, किताब लॉन्च होने से पहले विवाद क्यों?​

डायना की मौत के बाद प्रिंस चार्ल्स ने गुस्से में क्या कहा था, किताब लॉन्च होने से पहले विवाद क्यों?​

ब्रिटेन की राजकुमारी रहीं डायना एक बार फिर चर्चा में हैं. उनके भाई चार्ल्स स्पेन्सर ने अपनी बहन पर केंद्रित एक नई किताब लिखी है, जो इसी महीने 22 सितंबर को पब्लिक डोमेन में आने वाली है. किताब का नाम स्वान सॉन्ग: डायना, माई सिस्टर है. इसी किताब के कुछ अंश कथित तौर पर पब्लिक में आने की वजह से डायना, उनके भाई, ब्रिटेन के किंग आदि एक बार फिर चर्चा में हैं. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि किताब लॉन्च होने से पहले चार्ल्स और डायना के बारे में क्याक्या नए खुलासे हुए? इससे पहले कौनकौन से दावे किए गए?

ब्रिटेन के राजघराने से जुड़ी कहानियां आज भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ाती हैं. इनमें राजकुमारी डायना का जीवन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है. उनकी शादी, तलाक, निजी रिश्ते, मीडिया से तनाव और 1997 में रोड एक्सीडेंट में हुई उनकी मौत को लेकर कई दावे सामने आए. इस किताब की थीम भी यही है. चूंकि, लेखक डायना के छोटे भाई हैं और पहली दफा इस किताब को लेकर सामने हैं. लोगों को उम्मीद है कि यह किताब पूर्व में प्रकाशित अन्य किताबों से अलग तथ्य पेश करेगी. इसीलिए इसकी चर्चा तेज हो चली है.

चार्ल्स स्पेंसर की किताब में क्या खास है?

चार्ल्स स्पेंसर के अनुसार, डायना के बारे में समय के साथ कई गलत धारणाएं लोकप्रिय हो गईं. उनका कहना है कि वह अपनी बहन की यादों और अपने अनुभवों को सीधे सामने रखना चाहते हैं. किताब में डायना के बचपन, परिवार, राजघराने में उनके जीवन और प्रिंस चार्ल्स के साथ उनके रिश्ते पर चर्चा होने की उम्मीद है. इसमें डायना की मां के रूप में भूमिका और सार्वजनिक जीवन का भी जिक्र हो सकता है. सबसे ज्यादा ध्यान 1997 में डायना की मौत के बाद के दिनों पर है. चार्ल्स स्पेंसर उस समय परिवार के बेहद करीब थे. उन्होंने डायना के अंतिम संस्कार में भावुक भाषण भी दिया था. नई किताब में वह अपने अपराधबोध, दुख और राजपरिवार के साथ हुए तनाव के बारे में खुलकर लिख सकते हैं. यह डायना के जीवन को एक भाई की नजर से देखने का अवसर देगी.

चार्ल्स स्पेंसर की बुक लॉन्च से पहले कथिततौर पर कुछ खुलासे हुए हैं.

प्रिंस चार्ल्स से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला दावा

किताब के एक कथित अंश ने पहले ही विवाद पैदा कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डायना की मौत के बाद चार्ल्स स्पेंसर और तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स के बीच अंतिम संस्कार को लेकर बहस हुई थी. स्पेंसर चाहते थे कि प्रिंस विलियम और प्रिंस हैरी अपनी मां के शवयात्रा जुलूस में जनता के सामने न चलें. उनका मानना था कि दोनों उस समय बहुत छोटे थे. उन पर पूरी दुनिया की नजर थी. यह अनुभव उनके लिए बेहद कष्टदायक हो सकता था.

दावा किया गया है कि बातचीत के दौरान प्रिंस चार्ल्स ने गुस्से में कहाहम उसे जल्द ही भूल जाएंगे. यह कथन बेहद कठोर माना जा रहा है. हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है. राजपरिवार की ओर से भी इस कथन को स्वीकार नहीं किया गया. राजमहल ने कथित तौर पर यह संकेत दिया कि लंबे समय बाद लिखी गई यादों पर दुख और व्यक्तिगत भावनाओं का असर हो सकता है. यही वजह है कि इस दावे को एक संस्मरण में दर्ज निजी याद के रूप में देखना चाहिए. इसे स्थापित तथ्य मानना अनुचित होगा.

प्रिंस चार्ल्स और राजकुमारी डायना.

किताब डायना: हर ट्रू स्टोरी के बाद मचा था तूफान

डायना और प्रिंस चार्ल्स की शादी 1981 में हुई थी. शुरू में यह विवाह ब्रिटिश जनता के लिए खुशी का बड़ा अवसर था. लेकिन कुछ वर्षों बाद दोनों के रिश्ते में तनाव की खबरें सामने आने लगीं. 1992 में एंड्रयू मॉर्टन की किताब डायना: हर ट्रू स्टोरी प्रकाशित हुई. इस किताब ने राजघराने को हिला दिया था. बाद में पता चला कि डायना ने इस किताब के लिए रिकॉर्ड की गई बातचीत के जरिए जानकारी दी थी. किताब में डायना के वैवाहिक जीवन, अकेलेपन और भावनात्मक संघर्षों का वर्णन था.

1995 में बीबीसी के एक कार्यक्रम में डायना ने मार्टिन बशीर को इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू ने राजपरिवार की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया. बाद में जांच में सामने आया कि बशीर ने इंटरव्यू हासिल करने के लिए फर्जी बैंक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था. जांच रिपोर्ट ने उनके तरीकों को गंभीर रूप से गलत बताया. चार्ल्स स्पेंसर ने ही बशीर की डायना से मुलाकात कराने में भूमिका निभाई थी. इसी कारण यह घटना उनके लिए आज भी संवेदनशील मानी जाती है. नई किताब में वह इस फैसले और उसके बाद की घटनाओं पर बात कर सकते हैं.

डायना और अल्थॉर्प एस्टेट का विवाद

डायना अपने भाई चार्ल्स स्पेंसर की संपत्ति अल्थॉर्प एस्टेट से भावनात्मक रूप से जुड़ी थीं. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 1993 में वहां स्थित गार्डन कॉटेज का इस्तेमाल करने की इच्छा जताई थी. स्पेंसर ने कथित तौर पर इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया. सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुआ. बाद में डायना भूमध्यसागरीय क्षेत्र में छुट्टियां मनाने गईं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद दोनों भाईबहन के रिश्ते में तनाव का कारण बना था. 1997 में डायना की मौत से पहले भी यह मुद्दा चर्चा में रहा. स्पेंसर ने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बहुत कम बात की है. इसलिए नई किताब में इसका विवरण पाठकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

मीडिया की लगातार निगरानी भी सवालों में

डायना के जीवन का एक बड़ा हिस्सा मीडिया की निगरानी में बीता. फोटोग्राफर उनका पीछा करते थे. उनके कपड़े, रिश्ते, यात्राएं और बच्चों से जुड़ी हर बात खबर बन जाती थी. डायना ने कई बार महसूस किया कि मीडिया उन्हें इंसान की जगह एक सार्वजनिक किरदार के रूप में देखता है. उनके समर्थकों का मानना था कि लगातार पीछा किए जाने से उनका निजी जीवन प्रभावित हुआ.

1997 में पेरिस में हुई कार दुर्घटना के समय भी कार का पीछा फोटोग्राफरों द्वारा किए जाने की बात सामने आई थी. दुर्घटना में डायना, डोडी अल फायद और चालक हेनरी पॉल की मौत हुई थी. बॉडीगार्ड ट्रेवर रीसजोन्स बच गए थे. जांच में दुर्घटना के कई कारणों पर चर्चा हुई. इनमें चालक की शराब की स्थिति, तेज गति और पीछा कर रहे फोटोग्राफरों की भूमिका शामिल थी. षड्यंत्र से जुड़े कई दावे भी किए गए. नई किताब में स्पेंसर उस दौर के मीडिया दबाव और परिवार की प्रतिक्रिया पर अपनी दृष्टि दे सकते हैं.

राजपरिवार और डायना का अंतिम संस्कार

डायना की मौत के बाद राजपरिवार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठे. कुछ लोगों को लगा कि परिवार ने जनता के दुख को समझने में देर की. डायना का अंतिम संस्कार ब्रिटेन के इतिहास की सबसे अधिक देखी गई घटनाओं में शामिल रहा. उनके दोनों बेटों का जुलूस में चलना आज भी बहस का विषय है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। चार्ल्स स्पेंसर ने उस समय अपने भाषण में मीडिया और राजपरिवार के रवैये की आलोचना की थी. उन्होंने डायना को एक ऐसी महिला के रूप में याद किया, जिसने कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोगों से जुड़ाव बनाए रखा. अब उनकी किताब उसी दौर को और निजी रूप में सामने ला सकती है. इसमें यह भी पता चल सकता है कि परिवार के भीतर फैसले कैसे लिए गए थे.

पहले के दावों पर नई रोशनी

डायना को लेकर पहले भी कई किताबें प्रकाशित हुई हैं. कुछ किताबों में उन्हें दुखी पत्नी के रूप में दिखाया गया. कुछ में उन्हें राजघराने की परंपराओं को चुनौती देने वाली महिला बताया गया. कुछ लेखकों ने दावा किया कि डायना राजपरिवार में खुद को अलगथलग महसूस करती थीं. कुछ ने कहा कि वह अपने बच्चों को सामान्य जीवन देना चाहती थीं. कई रिपोर्टस में यह भी लिखा गया कि वह राजघराने की औपचारिक सीमाओं से परेशान थीं. चार्ल्स स्पेंसर की किताब इन दावों को परिवार के अंदर से देखने का प्रयास करेगी. उनका नजरिया डायना के भाई का है. इसलिए यह किताब राजपरिवार की आधिकारिक कहानी से अलग हो सकती है. फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि संस्मरण व्यक्तिगत यादों पर आधारित होते हैं. यादें समय के साथ बदल सकती हैं. दुख और पारिवारिक विवाद उनका रंग बदल सकते हैं.

किताब से क्यों बढ़ी उम्मीद?

डायना के बारे में सैकड़ों किताबें और डॉक्यूमेंट्री बन चुकी हैं. फिर भी उनके जीवन को लेकर लोगों की रुचि खत्म नहीं हुई. इसकी एक वजह यह है कि डायना केवल राजपरिवार की सदस्य नहीं थीं. वह सामाजिक अभियानों से जुड़ीं. उन्होंने एड्स मरीजों, बेघर लोगों और बारूदी सुरंगों के खिलाफ अभियान को समर्थन दिया. उनका सार्वजनिक व्यक्तित्व मजबूत था. निजी जीवन में वह संघर्ष कर रही थीं. यह विरोधाभास आज भी लोगों को प्रभावित करता है. चार्ल्स स्पेंसर की किताब इस विरोधाभास को समझने की कोशिश कर सकती है. इसमें एक लोकप्रिय राजकुमारी के साथसाथ एक बहन, मां और परिवार की सदस्य के रूप में डायना की तस्वीर सामने आ सकती है. किताब आने से पहले सामने आए दावों ने बहस जरूर शुरू कर दी है. लेकिन अंतिम निष्कर्ष किताब के पब्लिक डोमेन में आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए.

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