Quick Samachar: आम आदमी कम समय में बेहतर रिटर्न पाने के लिए शेयर बाजार में निवेश करता है, लेकिन अधिकाश निवेशकों को पता नहीं होता है कि शेयर बाजार से होने वाली कमाई पर टैक्स देना पड़ा है. अगर आप भी शेयर बाजार में इंवेस्ट करते हैं तो आपको ये जरूर जान लेना चाहिए कि शेयर बाजार से होने वाली कमाई पर किस फॉर्मूले से टैक्स लगता है. हालांकि, टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि निवेशक ने शेयर कितने समय तक अपने पास रखे और कमाई निवेश, ट्रेडिंग या डिविडेंड के जरिए हुई है. विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार से होने वाली आय को मुख्य रूप से कैपिटल गेन, ट्रेडिंग इनकम और डिविडेंड इनकम के रूप में वर्गीकृत किया जाता है. इन सभी पर अलगअलग नियमों के तहत टैक्स लगाया जाता है.

डिविडेंड से लेकर F&O तक, शेयर बाजार से की कमाई पर कितना देना होगा इनकम टैक्स? यहां जानें पूरा गणित​
डिविडेंड से लेकर F&O तक, शेयर बाजार से की कमाई पर कितना देना होगा इनकम टैक्स? यहां जानें पूरा गणित​

लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के नियम

अगर कोई निवेशक किसी सूचीबद्ध कंपनी के शेयर 12 महीने से अधिक समय तक अपने पास रखने के बाद बेचता है, तो उससे होने वाला लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहलाता है.

मौजूदा नियमों के तहत एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का LTCG पूरी तरह टैक्स मुक्त है. यदि लाभ 1.25 लाख रुपये से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा.

वहीं, यदि शेयर खरीदने के 12 महीने के भीतर बेच दिए जाते हैं, तो होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है. इस पर 20 प्रतिशत की फ्लैट दर से टैक्स लगाया जाता है.

ट्रेडिंग और F&O से कमाई पर कैसे लगता है टैक्स?

नियमित रूप से ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए टैक्स नियम अलग हैं. इंट्राडे ट्रेडिंग से होने वाली आय को सट्टा आधारित बिजनेस इनकम माना जाता है. यह आय व्यक्ति की कुल सालाना आय में जुड़ जाती है और उस पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है.

इसी तरह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस से होने वाला लाभ नॉनस्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है. इस आय पर भी निवेशक की टैक्स स्लैब के हिसाब से कर देनदारी तय होती है.

डिविडेंड पर भी देना पड़ता है टैक्स

यदि किसी कंपनी से निवेशक को डिविडेंड प्राप्त होता है, तो यह राशि उसकी कुल आय में जोड़ दी जाती है. इसके बाद निवेशक जिस टैक्स स्लैब में आता है, उसी के अनुसार डिविडेंड आय पर टैक्स लगाया जाता है.

सरचार्ज और सेस का भी रखें ध्यान

कैपिटल गेन या ट्रेडिंग से होने वाली आय पर लगने वाले टैक्स के अलावा कुल टैक्स देनदारी पर 4 प्रतिशत हेल्थ एंड एजुकेशन सेस भी लागू होता है. अधिक आय वाले करदाताओं पर सरचार्ज भी लग सकता है. ऐसे में शेयर बाजार में निवेश करने वालों को रिटर्न दाखिल करते समय सभी नियमों को ध्यान में रखकर टैक्स की सही गणना करनी चाहिए.