देश में एकबार फिर होगी नोटबंदी! रिजर्व बैंक ने कर ली पूरी तैयारीजानें पूरी खबर

देश में एकबार फिर होगी नोटबंदी! रिजर्व बैंक ने कर ली पूरी तैयारीजानें पूरी खबर

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से देश में प्लास्टिक के नोट छापने की तैयारी के बाद से ‘पॉलीमर’ शब्द हर तरफ चर्चा में है. रिजर्व बैंक की मुद्रा छपाई वाली यूनिट यानी RBI नोट मुद्रण ने बैंक नोटों के लिए खास पॉलीमर सबस्ट्रेट्स की खरीद के लिए एक ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट इनवाइट किया है.

देश में एकबार फिर होगी नोटबंदी! रिजर्व बैंक ने कर ली पूरी तैयारीजानें पूरी खबर

इस कदम से देश में प्लास्टिक की मुद्रा लाने की केंद्रीय बैंक की योजनाओं को बल मिलता दिख रहा है. आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह पॉलीमर होता क्या है? यह आम प्लास्टिक से कैसे अलग है और हमारे नोटों के लिए यह कितना सुरक्षित और टिकाऊ साबित होगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं पॉलीमर का पूरा साइंस और इसका महत्व.

आखिर क्या होता है पॉलीमर?
पॉलीमर ग्रीक भाषा के 2 शब्दों से मिलकर बना है. पहला है ‘Poly’ यानी कई और ‘Mer’ यानी भाग या इकाइयां. अब वैज्ञानिक भाषा में कहें तो पॉलीमर असल में मैक्रोमॉलिक्यूल यानी अणु होते हैं. ये रिपीट होने वाली छोटीछोटी केमिकल यूनिट्स के आपस में जुड़ने से बनते हैं. इन छोटी इकाइयों को मोनोमर कहा जाता है. इसे आप एक चेन या मोतियों की माला की तरह समझ सकते हैं, जहां हर एक मोती एक मोनोमर है और पूरी माला एक पॉलीमर है.

कितने तरह के पॉलीमर
पॉलीमर हमारे आसपास हर जगह मौजूद हैं. इन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है. एक है नैचुरल पॉलीमर और दूसरा है सिंथेटिक पॉलीमर.

प्राकृतिक पॉलीमर: ये प्रकृति में अपने आप पाए जाते हैं. उदाहरण के लिए हमारे शरीर में मौजूद DNA, पौधों से मिलने वाला सेलुलोज जिससे कपास और कागज बनता है. इसके साथ ही सिल्क, ऊन और प्राकृतिक रबर.

सिंथेटिक या कृत्रिम पॉलीमर: इन्हें इंसानों की तरफ से लैब या फैक्ट्रियों में रसायनों की मदद से बनाया जाता है. जैसे प्लास्टिक , नायलॉन, टेफ्लॉन, पीवीसी और सिंथेटिक रबर.

नोटों में इस्तेमाल होने वाला खास पॉलीमर क्या है?
RBI जिस पॉलीमर का इस्तेमाल नोट छापने के लिए करने जा रहा है, उसे तकनीकी भाषा में BOPP बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन कहा जाता है. यह आम कैरी बैग वाले प्लास्टिक जैसा बिल्कुल नहीं होता है. इस बीओपीपी की बात करें तो यह खास तरह की प्लास्टिक शीट होती है, जिसे दोनों दिशाओं यानी लंबाई और चौड़ाई में खींचकर मजबूत और पारदर्शी बनाया जाता है. यह बेहद पतली यानी लगभग 90 माइक्रोन होने के बावजूद आसानी से फटती या मुड़ती नहीं है.

कागज के पारंपरिक नोट के मुकाबले पॉलीमर क्यों बेहतर है?
आज के दौर में भारत में छपने वाले नोट 100 प्रतिशत कॉटन के कागज से बनते हैं. पॉलीमर नोटों पर शिफ्ट होने के पीछे कई बड़े कारण हैं. पारंपरिक पेपर नोट 1 से 2 साल तक चलते हैं. ये जल्दी फटते और गंदे होते हैं. वहीं पॉलीमर नोट की बात करें तो कागजी नोटों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक चलते हैं. पेपर नोट पानी और पसीने से जल्दी गल भी जाते है. वहीं पॉलीमर वॉटरप्रूफ होते हैं. इन पर पानी या केमिकल का असर नहीं होता.

सिक्योरिटी की बात करें तो पेपर नोट में जालसाजी संभव है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वहीं पॉलीमर की बात करें तो इसमें पारदर्शी विंडो और आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण नकली नोट बनाना नामुमकिन होता है. एक और अहम फैक्टर पर्यावरण का भी है. पेपर नोट की बात करें तो इसको बारबार छापना पड़ता है, जिसमें अधिक संसाधन लगते हैं. वहीं पॉलीमर टिकाऊ होते हैं और पुराने होने पर इन्हें रिसाइकल करके अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं.

क्या पॉलीमर नोटों में कोई चुनौती भी है?
हर नई तकनीक की तरह इसके भी कुछ तकनीकी पहलू हैं. इसमें लागत से लेकर मोड़ने में समस्या से लेकर मशीनों में बदलाव तक शामिल है. आइए सभी पहलू पर एक एक करके नजर डालते हैं.
शुरुआती लागत: पॉलीमर सबस्ट्रेट को बनाने और उस पर छपाई करने की शुरुआती लागत सामान्य कागजी नोटों से अधिक होती है. हालांकि लंबे जीवनकाल के कारण लंबे समय में यह किफायती साबित होते हैं.
मोड़ने में दिक्कत: शुरुआत में इन्हें मोड़ने और फोल्ड करने में आम जनता को थोड़ी असुविधा हो सकती है क्योंकि ये कागज की तरह पूरी तरह क्रीज नहीं पकड़ते.

मशीनों में बदलाव: एटीएम और नोट गिनने वाली मशीनों के सेंसर को इन नोटों के हिसाब से रीकैलिब्रेट करना पड़ता है.
पॉलीमर सिर्फ विज्ञान की एक खोज नहीं, बल्कि आधुनिक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने का एक बड़ा जरिया है. ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और वियतनाम जैसे कई देश पहले ही पूरी तरह पॉलीमर करेंसी अपना चुके हैं. अब भारत भी इस आधुनिक और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है.

पिछले महीने ही RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा देश में ऐसे नोट पेश करने के कदम की पुष्टि कर चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय बैंक कम कीमत वाले नोटों जैसे कि 10 और 20 रुपये से पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है. इसके लिए हजारों की संख्या में पॉलीमर शीट्स की जरूरत पड़ेगी.

सुरक्षा और सामग्री से जुड़ी सख्त शर्तें
इस टेंडर में शामिल शर्तों के अनुसार इस प्रोजेक्ट को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की गतिविधियों से पूरी तरह से दूर रखा जाएगा. इसमें इन देशों से कच्चे माल की आपूर्ति पर रोक और वहां से जुड़े रहे कर्मियों की तैनाती पर प्रतिबंध शामिल हैं. इसके अलावा सप्लायर को यह प्रमाणित भी करना होगा कि पॉलीमर सबस्ट्रेट में किसी भी प्रकार की जानवरों की चर्बी या DNA शामिल नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *