
नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर घिरी भाजपा सरकार को आखिरकार छात्रों के विरोध के आगे झुकना पड़ा। छात्रों के देशव्यापी विरोधप्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ऐसे वक्त में आया है, जब देशभर में लाखों छात्र सड़कों पर हैं और विपक्ष भी सड़क से लेकर संसद तक छात्रों की मांगों के समर्थन में उनके साथ डटकर खड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को जो आंदोलन शुरू किया था, वो अपने अंजाम तक पहुंचता नजर आ रहा है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफाउसका सबसे बड़ा हासिल है। जंतरमंतर से शुरू सीजेपी का प्रोटेस्ट, कैसे देशभर में फैल गयाएक नजर डालते हैं…।
3 मई को नीट की परीक्षा हुई था। इसका पेपर लीक हो गया। 12 मई को सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी। यहीं से छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी जो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की युवाओं पर एक टिप्पणी को लेकर वजूद में आईउसने परीक्षा सुधार के मुद्दे पर विरोध का एलान कर दिया।
जंतरमंतर से शुरू हुआ आंदोलन
पेपर लीक विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को आंदोलन की शुरुआत की। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में छात्र दिल्ली के जंतरमंतर पर धरने पर बैठे। शुरुआती दिनों में आंदोलन सीमित दायरे में रहा, लेकिन समय के साथ इसमें छात्रों की भागीदारी लगातार बढ़ती गई।
भूख हड़ताल से आंदोलन को मिली नई गति
28 जून को शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतरमंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे। उनके साथ आइसा की अध्यक्ष एवं पीएचडी स्कॉलर नेहा बोरा, पीएचडी स्कॉलर आमीन अमितोज और आइसा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष व शोधार्थी मनीष कुमार भी अनशन में शामिल हुए। इसके बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक समर्थन मिलने लगा और विभिन्न राज्यों से छात्र दिल्ली पहुंचने लगे।
मुख्य मांगें क्या थीं?
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। आंदोलन के दौरान परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार प्रमुख मुद्दे बने रहे।
संसद मार्च और टकराव
आंदोलन के अगले चरण में सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों के घायल होने की खबरें सामने आईं। कुछ प्रतिभागियों ने गंभीर चोट लगने और बल प्रयोग के आरोप भी लगाए।
विपक्ष भी आया समर्थन में
छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया। संसद के मानसून सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।
देशभर में फैला विरोध
दिल्ली के अलावा पटना, मुंबई, पुणे, नागपुर, प्रयागराज, वाराणसी, देहरादून, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किए। विभिन्न स्थानों पर हुए विरोध प्रदर्शनों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।
नेहा बोरा ने समाप्त किया अनशन
संसद मार्च के दिन 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद आइसा से जुड़े नेताओं ने अपना अनशन समाप्त किया। अभिनेत्री शबाना आजमी ने नेहा बोरा, आमीन अमितोज और मनीष कुमार को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। बाद में नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथसाथ छात्रों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सोनम वांगचुक ने भी खत्म किया अनशन
सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई को 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन खत्म किया। हालांकि आंदोलन जारी रहा और छात्र अपनी मांगों पर कायम रहे।
संवाद की सलाह भी आई सामने
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में युवाओं के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही।