पहले के दौर में स्कूल में पढ़ाई के दौरान लंबे बालों को लेकर शिक्षक और स्कूल प्रबंधन काफी सख्त हुआ करते थे. जो भी छात्र लंबे बाल रखता था, उसकी शिकायत घर तक पहुंच जाती थी. बदलते दौर में ऐसी शिकायतें कम हो गईं, लेकिन आज भी कुछ स्कूल ऐसे हैं जो अनुशासन को सर्वोपरि मानते हैं. ऐसा ही एक मामला कानपुर में सामने आया है, जहां स्कूल ने एक छात्र को लंबे बाल कटवाने के लिए कहा. कई बार चेतावनी देने के बावजूद जब छात्र ने बाल नहीं कटवाए, तो स्कूल ने उसका नाम ही काट दिया. अब छात्र के परिजन न्याय के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं.

शुक्रवार को डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह का जनता दर्शन चल रहा था. उसी दौरान एक महिला अपने बेटे के साथ पहुंची. महिला ने बताया कि उसका बेटा केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र है. महिला के अनुसार, वह अपनी मां के निधन के कारण बेटे के साथ 20 दिन के लिए बाहर गई थी.
वापस आने पर जब उसका बेटा आवेदन लेकर स्कूल पहुंचा, तो उसे कक्षा में बैठने नहीं दिया गया और टीसी थमा दी गई. महिला चाहती थी कि उसके बेटे का दोबारा स्कूल में दाखिला कराया जाए.
स्कूल से नाम काटने का यह कारण डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह के गले नहीं उतरा, तो उन्होंने छात्र से सच्चाई पूछी. पूछताछ में पता चला कि छात्र को लंबे बाल रखने का शौक है और इसके लिए उसे कई बार टोका भी जा चुका है. इसके बावजूद छात्र ने अपने बाल छोटे नहीं करवाए.
ऐसे में अनुशासनहीनता के आधार पर स्कूल ने उसका नाम काट दिया. वजह सामने आने के बाद जनता दर्शन में मौजूद अन्य लोग भी चौंक गए. डीएम ने भी छात्र को समझाया कि यह उम्र पढ़ाई करने की है, ताकि उसका भविष्य बेहतर बन सके. यह समय लंबे बाल रखकर स्कूल जाने और फैशन करने का नहीं है.
परिजनों ने भी डीएम को भरोसा दिलाया कि आगे से ऐसा नहीं होगा और वे खुद अपने बेटे के बाल कटवा देंगे. फिलहाल, डीएम ने स्कूल प्रबंधन से बात करने की बात कही है.