
भारत और पाकिस्तान भले ही आज अलग-अलग देशों में बंटे हुए हैं, लेकिन दोनों जगहों की खान-पान और लाइफस्टाइल में आज भी कई समानताएं देखने को मिलती हैं. रोटी भी ऐसी ही चीज है, जो दोनों देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रही है. भारत में जहां नान, पराठा, रुमाली रोटी से लेकर कई तरह की पारंपरिक रोटियां बनाई जाती हैं, वहीं पाकिस्तान में भी अलग-अलग इलाकों की अपनी खास रोटियां हैं. इन्हीं में से एक है मुल्तान की मशहूर ‘डोली रोटी’, जिसका रिश्ता सिर्फ स्वाद से नहीं, बल्कि करीब 100 साल पुरानी एक दिलचस्प परंपरा से जुड़ा हुआ है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कंटेंट क्रिएटर अक्सा जट ने मुल्तान की इसी खास रोटी के बारे में जानकारी दी है. वीडियो में वह बताती हैं कि करीब 100 साल पहले मुल्तान में शादी के समय दुल्हन की डोली के साथ यह रोटी रखी जाती थी. हालांकि, इसे सिर्फ दुल्हन के लिए नहीं रखा जाता था. यह बारात के लोगों के लिए रास्ते का खाना हुआ करता था. आज के दौर में शादी में कुछ घंटों का सफर तय करके बारात आसानी से दुल्हन के घर पहुंच जाती है, लेकिन पुराने समय में ऐसा नहीं था. उस वक्त न तो आज जैसी सड़कें थीं और न ही हर किसी के पास कार या दूसरे साधन उपलब्ध थे. कई बार बारात को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कई दिन लग जाते थे.
कई दिनों के सफर के लिए था खाने का इंतजाम
अक्सा जट के मुताबिक, पुराने समय में लोग घोड़ों और तांगों से सफर करते थे. लंबी दूरी की यात्रा में सबसे बड़ी समस्या खाने-पीने की होती थी. रास्ते में हर जगह खाना मिलना आसान नहीं था और बारात में बड़ी संख्या में लोग भी शामिल होते थे. ऐसे में ऐसी चीज की जरूरत थी, जिसे पहले से तैयार करके लंबे सफर के दौरान आसानी से खाया जा सके. इसी जरूरत ने डोली रोटी को खास बना दिया. मीठी रोटी को डोली में रख दिया जाता था, ताकि रास्ते में जब किसी को भूख लगे तो वह इसे खा सके. इस तरह यह रोटी सिर्फ एक व्यंजन नहीं रही, बल्कि उस समय की यात्रा और शादी की जरूरत का हिस्सा बन गई.
कभी सिर्फ मीठी होती थी डोली रोटी
बताया जाता है कि पुराने समय में डोली रोटी मुख्य रूप से मीठी बनाई जाती थी. इसे इस तरह तैयार किया जाता था कि वह सफर के दौरान खाने के काम आ सके. समय के साथ इसके स्वाद और बनाने के तरीके में भी बदलाव आया. आज डोली रोटी के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं. इसमें खोया और कीमा जैसी चीजों का इस्तेमाल भी किया जाने लगा है. यानी एक समय बारात के लंबे सफर का सहारा रही यह रोटी अब स्वाद और स्थानीय पहचान का हिस्सा बन चुकी है. दशकों से रोटी बना रहा है मुल्तान का मशहूर रोटी वाला
अक्सा जट ने अपने वीडियो में मुल्तान के मशहूर फहीम रोटी वाले की दुकान भी दिखाई. बताया जाता है कि यहां लंबे समय से इस तरह की पारंपरिक रोटी बनाई जा रही है. दुकान पर मिलने वाली डोली रोटी आज भी लोगों को मुल्तान की पुरानी परंपराओं और खान-पान की याद दिलाती है. इस रोटी की खासियत यह है कि इसे देखने और खाने के साथ-साथ इसके पीछे की कहानी भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ाती है. एक साधारण सी रोटी कैसे कभी बारात के कई दिनों के सफर का जरूरी खाना हुआ करती थी, यह बात आज के समय में काफी अनोखी लगती है.
बंटवारे के बाद भी नहीं भूली गई यह परंपरा
इस वीडियो को अक्सा जट ने अपने इंस्टाग्राम @aqsajutt1212 पर शेयर किया है. वीडियो पर एक भारतीय यूजर का कमेंट भी काफी खास रहा. उन्होंने बताया कि उनके परिवार का रिश्ता बंटवारे से पहले मुल्तान से था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, मुल्तान से भारत आने के कई साल बाद भी उनकी दादी डोली रोटी बनाया करती थीं. यह बात दिखाती है कि खाने की परंपराएं सिर्फ एक जगह या सीमा तक सीमित नहीं रहतीं. लोग जब एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं, तब भी अपने साथ स्वाद, यादें और पुरानी रिवायतें लेकर जाते हैं. डोली रोटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज मुल्तान की यह रोटी सोशल मीडिया के जरिए फिर चर्चा में है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी इसे और खास बनाती है. कभी लंबी यात्रा के दौरान बारातियों का पेट भरने वाली यह मीठी रोटी आज एक पुरानी परंपरा, बदलते खान-पान और बंटवारे से पहले की साझा संस्कृति की याद दिलाती है.