बुजुर्गों की मदद के लिए साल में 200 से ज्यादा यात्राएं! इस शख्स की कहानी जीत लेगी आपका दिल

बुजुर्गों की मदद के लिए साल में 200 से ज्यादा यात्राएं! इस शख्स की कहानी जीत लेगी आपका दिल
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Viral Post : चीन के हुबेई प्रांत में रहने वाले 39 वर्षीय टियान रुई इन दिनों अपनी अनोखी पहल की वजह से सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहे हैं. कभी कूरियर डिलीवरी का काम करने वाले टियान अब उन बुजुर्गों के लिए परिवार की तरह बन चुके हैं, जिनके बच्चे नौकरी या बेहतर भविष्य की तलाश में उनसे हजारों किलोमीटर दूर रहते हैं.

टियान पहाड़ी इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों से मिलने के लिए साल में 200 से ज्यादा बार सफर करते हैं. वह उनके लिए दवाइयां, राशन और जरूरत का सामान लेकर जाते हैं. लेकिन टियान का काम केवल सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं है. कई बुजुर्गों के लिए उनकी सबसे बड़ी जरूरत किसी अपने से बातचीत करना और कुछ पल साथ बिताना है.

बुजुर्गों को सामान से ज्यादा चाहिए साथ

टियान बताते हैं कि पहाड़ों में रहने वाले बुजुर्गों से मिलने पर उन्हें अक्सर एक ही बात महसूस होती है. उन्हें सिर्फ दवा या खाने-पीने का सामान नहीं चाहिए, बल्कि किसी ऐसे इंसान की जरूरत है जो बैठकर उनकी बातें सुने. एक करीब 80 वर्षीय महिला तो हर मुलाकात के बाद टियान से पूछती हैं कि वह अगली बार कब आएंगे. उनके लिए टियान की यात्रा सिर्फ एक डिलीवरी नहीं, बल्कि अपनों के आने जैसा इंतजार बन चुकी है.

इसी तरह बोलीविया में करीब 17 हजार किलोमीटर दूर रहने वाला एक बेटा भी अपने माता-पिता तक दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए टियान की मदद लेता है.

टियान जब भी पहाड़ों में जाते हैं, वहां रहने वाले बुजुर्गों से मुलाकात के छोटे-छोटे वीडियो रिकॉर्ड करते हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बाद में उन्हें एडिट करके विदेश या दूसरे शहरों में रहने वाले परिवार के सदस्यों तक पहुंचाते हैं.

उनके बनाए वीडियो कभी-कभी परिवार के लिए बेहद भावुक याद बन जाते हैं. टियान ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग का वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिनकी करीब चार महीने बाद मौत हो गई. बाद में वही वीडियो उनके परिवार के लिए पिता की आखिरी यादों में से एक बन गया.

बिना मुनाफे के निभा रहे हैं जिम्मेदारी

चीन में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संख्या बड़ी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 तक करीब 11.8 करोड़ बुजुर्ग अकेले रह रहे थे, जिन्हें वहां ‘एम्प्टी नेस्ट’ बुजुर्ग कहा जाता है. टियान इस काम से कोई मुनाफा नहीं कमाते. वह मुख्य रूप से पेट्रोल का खर्च लेते हैं और बाकी काम अपनी इच्छा से करते हैं. उनके लिए यह सिर्फ सामान पहुंचाने का काम नहीं, बल्कि उन परिवारों के बीच दूरी कम करने की कोशिश है, जहां बच्चे दूर हैं और माता-पिता पहाड़ों में अकेले हैं.

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