फिलीपींस के बाद भारत दुनिया काे सबसे ज्यादा नाविक देने वाला देश कैसे बना?

फिलीपींस के बाद भारत दुनिया काे सबसे ज्यादा नाविक देने वाला देश कैसे बना?

काला सागर में रूसी जल क्षेत्र में एक व्यावसायिक जहाज एमवी ओमोरफी पर हुए हमले में एक भारतीय क्रू मेम्बर की मौत हो गई है. इस पर कुल दस क्रू मेम्बर थे, इनमें से तीन भारतीय थे. इसके ठीक एक दिन बाद रूसी हमले में एमवी गोल्डन लियो जहाज पर सवार चार भारतीय क्रू सदस्यों की मौत हुई है. दोनों ही हादसों पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए दुनिया से कहा है कि अगर हम ऐसा न कर सके तो पूरी सप्लाई चेन बिगड़ सकती है. ध्यान रहे, जहाज पर तैनात रहने वाली वर्क फोर्स में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. पहले नंबर पर फिलीपींस है. हाल के दिनों में समुद्री जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों से सवाल उठ रहे हैं.

फिलीपींस के बाद भारत दुनिया काे सबसे ज्यादा नाविक देने वाला देश कैसे बना?

पूरी दुनिया में कुल 25.65 लाख नाविक कार्यरत हैं. इनमें 10.49 लाख अधिकारी और बाकी अन्य सदस्य हैं. दुनिया के टॉप पांच देश मिलकर अकेले 56 फीसदी से ज्यादा नाविक समुदाय की हिस्सेदारी रखते हैं. बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग की ओर से साल 2026 की ताजी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के टॉप पांच देश और समुद्री सेवा में उनके लोगों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता. फिलीपींस, भारत, चीन, रूस और इंडोनेशिया दुनिया को सबसे जयादा नाविक देने वाले देश हैं.

आइए, समझते हैं कि भारत दुनिया की शिपिंग इंडस्ट्री का बड़ा टैलेंट पूल कैसे है? फिलिपींस के बाद भारत नाविकों का सबसे बड़ा सप्लायर क्यों?

विशाल तटरेखा और समुद्री परंपरा

भारत की तटरेखा बहुत लंबी है. गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का समुद्र से गहरा संबंध है. इन क्षेत्रों के कई परिवारों की आजीविका समुद्र से जुड़ी रही है. मछली पकड़ना, बंदरगाहों पर काम करना और समुद्री व्यापार भारत में पुराने समय से होता रहा है. इस कारण समुद्री जीवन भारतीय समाज के लिए नया नहीं है. तटीय इलाकों के युवाओं में जहाजों पर काम करने की रुचि स्वाभाविक रूप से अधिक मिलती है.

तटीय इलाकों के युवाओं में जहाजों पर काम करने की रुचि स्वाभाविक रूप से अधिक मिलती है. फोटो: Pexels

बड़ी युवा आबादी

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है. देश में बड़ी संख्या में युवा हर साल नौकरी की तलाश में निकलते हैं. समुद्री क्षेत्र उनके लिए अच्छा करियर विकल्प बनता है. जहाज पर नौकरी कठिन होती है. कई महीनों तक परिवार से दूर रहना पड़ता है. काम के घंटे लंबे हो सकते हैं. समुद्र का मौसम भी चुनौतीपूर्ण होता है. फिर भी अच्छी आय, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और करियर की प्रगति इस क्षेत्र को आकर्षक बनाती है. भारतीय युवा कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार रहते हैं. यही गुण उन्हें वैश्विक शिपिंग कंपनियों की पसंद बनाता है.

भारतीयों की मजबूत उपस्थिति भी एक वजह

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में अंग्रेजी का बहुत महत्व है. जहाजों पर अलगअलग देशों के लोग साथ काम करते हैं. कप्तान किसी एक देश का हो सकता है. इंजीनियर दूसरे देश का हो सकता है. चालक दल के सदस्य कई अन्य देशों से आ सकते हैं. ऐसी स्थिति में अंग्रेजी साझा भाषा बनती है.

भारतीय नाविकों की अंग्रेजी समझ और संवाद क्षमता सामान्यत अच्छी मानी जाती है. भारत में स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थानों में अंग्रेजी का उपयोग व्यापक है. यह क्षमता भारतीय नाविकों को दूसरे देशों के नाविकों पर बढ़त देती है. वे विदेशी अधिकारियों और बंदरगाह कर्मचारियों से बात कर सकते हैं.

मजबूत समुद्री शिक्षा व्यवस्था भी अहम

भारत में समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण की अच्छी व्यवस्था है. देश में कई समुद्री प्रशिक्षण संस्थान हैं. यहां डेक कैडेट, मरीन इंजीनियर, इलेक्ट्रोटेक्निकल अधिकारी, रेटिंग और अन्य समुद्री पेशों की पढ़ाई कराई जाती है. इन संस्थानों में विद्यार्थियों को जहाज संचालन, नेविगेशन, इंजन रखरखाव, सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन सिखाया जाता है. उन्हें समुद्र में आग लगने, दुर्घटना होने, जहाज छोड़ने और जीवन रक्षक उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. भारतीय संस्थान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रशिक्षण देने की कोशिश करते हैं. इससे भारतीय नाविकों की स्वीकार्यता बढ़ती है.

तकनीकी कौशल में बढ़त भारतीयों को ले जाती है आगे

आधुनिक जहाज केवल मशीनों से नहीं चलते. वे डिजिटल सिस्टम, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत संचार तकनीक से लैस होते हैं. इंजन रूम में जटिल उपकरण होते हैं. नेविगेशन सिस्टम में सैटेलाइट, रडार और इलेक्ट्रॉनिक चार्ट का उपयोग होता है. भारत के युवाओं की तकनीकी शिक्षा में रुचि अधिक है. इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी की पढ़ाई करने वाले युवाओं को समुद्री क्षेत्र में भी अवसर मिलते हैं. भारतीय मरीन इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इस वजह से विशेष मांग में रहते हैं. जहाज मालिक ऐसे लोगों को पसंद करते हैं जो तकनीक समझते हों और समस्या आने पर तुरंत समाधान खोज सकें.

भारत में समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण की अच्छी व्यवस्था है. फोटो: Pexels

अनुशासन और काम के प्रति जिम्मेदारी

समुद्र में लापरवाही की कोई जगह नहीं होती. एक छोटी गलती भी बड़ा नुकसान कर सकती है. जहाज, माल, पर्यावरण और चालक दल की सुरक्षा हर समय जरूरी होती है. भारतीय नाविकों को उनके अनुशासन और जिम्मेदार व्यवहार के लिए जाना जाता है. वे नियमों का पालन करते हैं. वे कठिन समय में धैर्य रखते हैं. जहाज पर हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. कप्तान से लेकर इंजन विभाग और डेक क्रू तक, सभी को मिलकर काम करना होता है. भारतीय नाविक इस टीम संस्कृति में अच्छी तरह ढल जाते हैं.

भारतीय अधिकारियों की बढ़ती मांग

पहले भारतीय नाविकों की पहचान मुख्य रूप से क्रू और तकनीकी श्रेणियों में थी. अब भारतीय अधिकारी भी बड़ी संख्या में जहाजों पर नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं. भारतीय कप्तान, मुख्य इंजीनियर, डेक अधिकारी और मरीन इंजीनियर दुनिया भर के जहाजों पर काम कर रहे हैं. इस बदलाव का कारण बेहतर शिक्षा और समुद्री अनुभव है. भारतीय नाविक अब सिर्फ नौकरी करने वाले कर्मचारी नहीं हैं. वे संचालन, सुरक्षा, रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. यह भारत की समुद्री क्षमता के लिए सकारात्मक संकेत है.

विदेशों में काम करने का आकर्षण

समुद्री नौकरी में आय अच्छी हो सकती है. कई नाविक विदेशी मुद्रा में कमाते हैं. इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरती है. छोटे शहरों और तटीय जिलों के युवाओं के लिए यह जीवन बदलने वाला अवसर बन सकता है. जहाजों पर काम करने से दुनिया देखने का मौका भी मिलता है. नाविक अलगअलग देशों, संस्कृतियों और बंदरगाहों को देखते हैं. यह अनुभव उन्हें आत्मविश्वासी और व्यावहारिक बनाता है. इसी कारण कई युवा समुद्री करियर को सम्मानजनक विकल्प मानते हैं.

भारत के सामने अभी भी चुनौतियां

भारत की स्थिति मजबूत है, लेकिन चुनौतियां भी हैं. समुद्री प्रशिक्षण की गुणवत्ता हर संस्थान में समान नहीं है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कुछ युवाओं को नौकरी पाने में कठिनाई होती है. प्रशिक्षण की लागत भी कई परिवारों के लिए बड़ी समस्या बनती है. मानसिक स्वास्थ्य भी एक अहम मुद्दा है. नाविक लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हैं. समुद्र में अकेलापन महसूस हो सकता है. काम का दबाव भी रहता है. कंपनियों और सरकार को नाविकों के कल्याण पर अधिक ध्यान देना होगा. समुद्री क्षेत्र में महिलाओं के लिए अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या अभी बहुत कम है.

भविष्य में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण

वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्र के रास्ते होता है. तेल, गैस, अनाज, मशीनें, कपड़े, दवाइयां और कंटेनर समुद्री जहाजों से दुनिया भर में पहुंचते हैं. इसलिए कुशल नाविकों की जरूरत आगे भी बनी रहेगी. भारत के पास युवा आबादी, अंग्रेजी क्षमता, तकनीकी कौशल और समुद्री प्रशिक्षण का मजबूत आधार है. यदि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़े, रोजगार व्यवस्था बेहतर हो और नाविकों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए, तो भारत और आगे बढ़ सकता है. फिलिपींस के बाद भारत की स्थिति मजबूत है. आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री के सबसे महत्वपूर्ण टैलेंट हब में बदल सकता है. भारत के नाविक केवल जहाज नहीं चला रहे हैं. वे देश की वैश्विक पहचान और समुद्री अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ा रहे हैं.

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