फेसबुक पर ”डोरिस विलियम” बनकर 68 लाख ठगे, गिरफ्तार

फेसबुक पर ”डोरिस विलियम” बनकर 68 लाख ठगे, गिरफ्तार
फेसबुक पर ”डोरिस विलियम” बनकर 68 लाख ठगे, गिरफ्तार

कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: सोशल मीडिया पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीयों को प्रेमजाल में फंसा करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा एसटीएफ ने किया है। इस नाइजीरियन गिरोह के सदस्य को एसटीएफ ने दिल्ली में गिरफ्तार किया है। यूपी एसटीएफ व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के संयुक्त ऑपरेशन में आरोपी को दबोचा गया। उसके पास से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद हुई है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

एसटीएफ एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी ओबासे प्रॉस्पर निवासी इमो स्टेट, नाइजीरिया है। वह दिल्ली के राजू पार्क इलाके में रह रहा था। उसके पास से पांच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट भी बरामद किए गए हैं। कार्रवाई शनिवार शाम एनसीबी की दिल्ली जोनल यूनिट, आरके पुरम में एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम ने की। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। एएसपी के मुताबिक गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय युवकयुवतियों से दोस्ती करता था। इसके बाद महंगे उपहार, डॉलर और पाउंड भेजने का झांसा दिया जाता था। फिर खुद को कस्टम या आयकर अधिकारी बताकर एयरपोर्ट पर पार्सल और विदेशी मुद्रा पकड़े जाने की कहानी बताता था। इसके बाद कस्टम ड्यूटी, जीएसटी तथा अन्य शुल्क के नाम पर रकम ऐंठते थे।

डालीगंज के युवक से ठगे थे 68 लाख
एएसपी विशाल विक्रम के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि डालीगंज निवासी एक युवक से ”डोरिस विलियम” नाम की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल के जरिए दोस्ती की। इसके बाद उससे 68 लाख रुपये ठग लिये। पीड़ित की शिकायत पर थाना मड़ियांव में वर्ष 2026 में रिपोर्ट दर्ज किया गया था। इसी मामले में एसटीएफ ने 15 मई 2026 को नाइजीरियन नागरिक यूचेनवा को गिरफ्तार किया था, जबकि ओबासे प्रॉस्पर फरार चल रहा था। एसटीएफ की साइबर टीम जब उसकी तलाश में दिल्ली पहुंची तो सूचना मिली कि आरोपी साइबर ठगी के साथ मादक पदार्थों की तस्करी में भी शामिल है। इसके बाद एनसीबी के साथ संयुक्त छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

मेडिकल वीजा पर आया था भारत
एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह 2023 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था, लेकिन वीजा समाप्त होने के बाद भी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहा था। उसने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्य अब भी दिल्ली में रहकर सोशल मीडिया के जरिए फर्जी विदेशी प्रोफाइल बनाकर साइबर ठगी और ड्रग्स तस्करी कर रहे हैं। एसटीएफ अब गिरोह के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है तथा अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

 

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