बूढ़े मांबाप के साथ रहने के लिए बेटे ने छोड़ दिया कनाडा में बनाबनाया करियर, बेंगलुरु में शुरू की नई जिंदगी

बूढ़े मांबाप के साथ रहने के लिए बेटे ने छोड़ दिया कनाडा में बनाबनाया करियर, बेंगलुरु में शुरू की नई जिंदगी

रमेश एनएन ने कनाडा में अपना सफल करियर छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया ताकि वे अपने बूढ़े मातापिता के साथ रह सकें

बूढ़े मांबाप के साथ रहने के लिए बेटे ने छोड़ दिया कनाडा में बनाबनाया करियर, बेंगलुरु में शुरू की नई जिंदगी

विदेश में जाकर काम करना कई लोगों के लिए एक सपने जैसा होता है। जो लोग ऐसा करने में कामयाब भी हो जाते हैं, वह इसे एक नई शुरुआत मानते हैं और फिर वहीं बसकर अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाते हैं। लेकिन बेंगलुरु के रमेश एनएन ने एक ऐसा फैसला किया, जिसने उन्हें न सिर्फ मानसिक शांति दी, बल्कि दूसरों के लिए एक प्रेरणा का माहौल भी बनाया।

रमेश कनाडा में सेटल थे और वहां उनकी जिंदगी अच्छे से चल रही थी। लेकिन उनके मन में सिर्फ इस बात का मलाल था कि वह अपने बूढ़े मांबाप से दूर थे और वीडियो कॉल पर बात करतेकरते उनकी आंखें भर जाती थीं। इसके बाद रमेश ने कनाडा छोड़कर भारत आने और परिवार के साथ बसने का फैसला किया।

6 साल पहले लौटे भारत

रमेश अभी आईटी फर्म कोरसेंट्रिक में इंजीनियरिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में अपने सफर के बारे में बताया है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। रमेश ने लिखा कि वह अपने परिवार के साथ वक्त बिताना चाहते थे और अपने मातापिता के साथ शारीरिक रूप से मौजूद रहना चाहते थे।

उन्होंने बताया कि एक वक्त के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि परिवार के साथ बिताने वाले वक्त को हमेशा के लिए नहीं टाला जा सकता, इसलिए करीब 6 साल पहले उन्होंने कनाडा छोड़कर भारत आने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस एक फैसले से विदेश में मिलने वाला आराम और तयशुदा जिंदगी तो छूटी ही, भारत आकर नए सिरे से करियर बनाने की चुनौती भी खड़ी हो गई।

बेंगलुरु में शुरू की नई नौकरी

रमेश ने लिखा कि उनका परिवार बेंगलुरु शिफ्ट हो गया। बेंगलुरु के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इस वजह से मुझे करियर में पीछे हटने के बजाय एक नया मौका मिला और फिर जो चीजें शुरुआत में मुश्किल लगती थी, वह अब फायदे लगने लगे।

उनके इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी है। एक ने लिखा कि मैं 2015 में अमेरिका से भारत आया था और तब पहला साल बेहद मुश्किल लगा था। लेकिन मैंने समय के साथ इसे स्वीकार कर लिया है। दूसरे यूजर ने लिखा कि परिवार ही सब कुछ है और मुझे खुशी है कि आपने घर वापस लौटने का फैसला किया।

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