भारत में इंटरनेट क्रांति का नया दौर! जल्द पूरी तरह बदलने वाला है Jio और Airtel का ‘डिजिटल गेम’

भारत में इंटरनेट क्रांति का नया दौर! जल्द पूरी तरह बदलने वाला है Jio और Airtel का ‘डिजिटल गेम’

सरकार नेट न्यूट्रैलिटी नियमों की समीक्षा करने पर विचार कर रही है. इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को गेमिंग, हेल्थकेयर, ऑटोनॉमस गाड़ियां और स्मार्ट फैक्ट्री जैसी खास सेवाओं के लिए अलगअलग कनेक्टिविटी या इंटरनेट स्पीड देने और आम मोबाइल यूज़र्स और कंपनियों से अलगअलग रेट वसूलने की इजाज़त मिल सकती है. मौजूदा नियम टेलीकॉम कंपनियों को ऐसी सेवाएं देने से रोकते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी में तेजी से हो रहे बदलावों, खासकर 5G स्लाइसिंग की वजह से मौजूदा नेट न्यूट्रैलिटी नियम बहुत सख्त और पुराने लगने लगे हैं.

भारत में इंटरनेट क्रांति का नया दौर! जल्द पूरी तरह बदलने वाला है Jio और Airtel का ‘डिजिटल गेम’

नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इंटरनेट के साथ बिना किसी भेदभाव के एक जैसा व्यवहार किया जाए. इसमें स्पीड और लेटेंसी भी शामिल है. किसी भी कंटेंट को जानबूझकर ब्लॉक या धीमा नहीं किया जाना चाहिए, न ही किसी खास कंटेंट को प्राथमिकता वाली स्पीड या बेहतर ट्रीटमेंट दिया जाना चाहिए. भारत में ये नियम आधिकारिक तौर पर 2018 में लागू किए गए थे. हालांकि, 2022 में देश में 5G सेवाएं शुरू होने के बाद से इन नियमों के लागू होने को लेकर, खासकर 5G स्लाइसिंग के मामले में, उलझन और अस्पष्टता पैदा हो गई है. इसी वजह से सरकार को इनकी समीक्षा करने पर विचार करना पड़ रहा है.

ट्राई को सुझाव देने को कहा

मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हमने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया को इस मामले पर काम करने और यह सुझाव देने के लिए कहा है कि नेट न्यूट्रैलिटी नियमों में क्या बदलाव या स्पष्टीकरण शामिल किए जाने चाहिए. यूरोपीय यूनियन के देश और अन्य देश अभी नेट न्यूट्रैलिटी नियमों की समीक्षा कर रहे हैं, जबकि अमेरिका ने फेडरल नेट न्यूट्रैलिटी नियमों को कैंसल कर दिया है.

अमेरिका के कुछ राज्यों के अपने नेट न्यूट्रैलिटी नियम हैं. हालांकि, अधिकारी ने जोर देकर कहा कि ‘वॉल्ड गार्डन’ वाले तरीके या कामकाज को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट फ्री रहेगा और किसी खास वेबसाइट जैसे चुनिंदा कंटेंट को पैसे देकर प्राथमिकता वाला ट्रीटमेंट देने की इजाजत नहीं होगी.

स्लाइसिंग कैसे काम करती है

  1. 5G स्लाइसिंग के तहत, टेलीकॉम कंपनियां एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर कई स्लाइस बना सकती हैं. हर स्लाइस एक स्वतंत्र नेटवर्क की तरह काम करता है, जहाँ जरूरत के हिसाब से बैंडविड्थ को कस्टमाइज किया जा सकता है.
  2. स्लाइसिंग की वजह से टेलीकॉम कंपनियां गेमिंग, हेल्थकेयर, ऑटोनॉमस गाड़ियाँ, स्मार्ट फ़ैक्टरी और रोबोटिक्स जैसे खास कामों के लिए वर्चुअल नेटवर्क चला सकती हैं.
  3. हर स्लाइस किसी खास सर्विस के लिए काम कर सकता है, जबकि सर्फिंग और कंटेंट देखने जैसी सामान्य इंटरनेट सर्विस एक अलग स्लाइस पर बिना किसी बदलाव के चलती रहेंगी.
  4. हालांकि 5G स्लाइसिंग पर रोक लगाने वाले कोई खास नियम नहीं हैं, लेकिन अलग या खास सर्विस देने के लिए इसका इस्तेमाल करने को प्राथमिकता देने के कारण नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है.
  5. भारती एयरटेल ने पहले ही एक सर्विस शुरू की है जो अपने पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर स्पीड और लेटेंसी जैसी अलग सर्विस देने के लिए 5G स्लाइसिंग का इस्तेमाल करती है. इस सर्विस की अभी सेक्टर रेगुलेटर और डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशंस जांच कर रहे हैं.
  6. इसी तरह, रिलायंस जियो ने घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में कवरेज और क्षमता को बेहतर बनाने के लिए 5G स्लाइसिंग क्षमताओं का इस्तेमाल करने की योजना की घोषणा की है.
  7. अमेरिका, यूके, सिंगापुर, मलेशिया और चीन जैसे देश कस्टमर्स को अलगअलग तरह की सर्विस देने के लिए 5G नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल करते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *