मंदिरों के दर्शन, कब्रिस्तान की सैर, कितनी तरह का होता है टूरिज्म? जानें और घूम आएं​

मंदिरों के दर्शन, कब्रिस्तान की सैर, कितनी तरह का होता है टूरिज्म? जानें और घूम आएं​

पर्यटन का मतलब सिर्फ छुट्टी मनाना नहीं है. लोग अलगअलग कारणों से यात्रा करते हैं. कोई आराम चाहता है. कोई नई जगह और संस्कृति जानना चाहता है. कुछ लोग तीर्थ करने जाते हैं. वहीं कुछ यात्रियों को रोमांच, प्रकृति या नए स्वाद आकर्षित करते हैं. यात्रा का उद्देश्य बदलने पर उसकी श्रेणी बदल सकती है. फिर भी, आम तौर पर पर्यटन के कई प्रमुख रूप पहचाने जाते हैं. धार्मिक यात्रा से लेकर डार्क टूरिज्म तक, हर प्रकार का अपना अनुभव और उद्देश्य होता है. पूरी दुनिया हर साल 27 सितंबर को टूरिज्म डे के रूप में मनाती है.

इस दिवस को मनाने की शुरुआत साल 1980 में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने की थी. इस साल की थीम डिजिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पर्यटन को नया रूप देना है. इसका उद्देश्य भविष्य में पर्यटन के अनुभव को बेहतर बनाने और तकनीक की भूमिका तय करना है. आइए, विश्व पर्यटन दिवस के बहाने समझते हैं कि कितनी तरह का पर्यटन यानी टूरिज्म चलन में हैं? किनकिन उद्देश्यों से लोग करते हैं यात्राएं?

एडवेंचर टूरिज्म

रोमांच यानी एडवेंचर पर्यटन उन लोगों के लिए है जिन्हें रोमांचक गतिविधियां पसंद हैं. ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रॉक क्लाइम्बिंग और रिवर राफ्टिंग इसके कुछ प्रमुख उदाहरण हैं. कुछ लोग बंजी जंपिंग, स्काइडाइविंग, स्कूबाडाइविंग और पैराग्लाइडिंग भी करते हैं. ऐसी यात्रा में सुरक्षा, प्रशिक्षण और सही तैयारी जरूरी है. गतिविधि चुनने से पहले मौसम, उपकरण और प्रशिक्षक की जानकारी लेना अच्छा रहता है. हर एडवेंचर अनुभव हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता.

एडवेंचर पर्यटन उन लोगों के लिए है जिन्हें रोमांचक गतिविधियां पसंद हैं. फोटो: pixabay

कल्चरल और हेरिटेज टूरिज्म

सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन में लोग किसी जगह के इतिहास, कला, वास्तुकला और परंपराओं को समझने जाते हैं. ऐतिहासिक स्मारक, पुराने शहर, संग्रहालय, मंदिर और किले इस तरह की यात्रा का हिस्सा हो सकते हैं. भारत में इस तरह के पर्यटन के कई उदाहरण हैं. ताजमहल, खजुराहो के मंदिर और देश के अलगअलग हिस्सों के किले यात्रियों को इतिहास और स्थापत्य से परिचित कराते हैं. स्थानीय कला, संगीत और त्योहार भी किसी क्षेत्र की संस्कृति समझने में मदद करते हैं.

कल्चरल और हेरिटेज टूरिज्म. फोटो: pixabay

एजुकेशनल टूरिज्म

शैक्षिक पर्यटन में यात्रा सीखने के उद्देश्य से की जाती है. स्कूल या कॉलेज के विद्यार्थी संग्रहालय, ऐतिहासिक स्थल, विज्ञान केंद्र और विश्वविद्यालय देखने जा सकते हैं. कुछ यात्री कार्यशाला, प्रशिक्षण या छोटे पाठ्यक्रम में भाग लेने के लिए भी यात्रा करते हैं. ऐसी यात्राएं किताबों में पढ़ी जानकारी को वास्तविक जगहों से जोड़ती हैं. इससे विद्यार्थियों को नए विषयों में रुचि लेने का अवसर मिलता है.

कुछ लोग शांति, चिंतन और आत्मिक जुड़ाव की तलाश में जाते हैं. फोटो: pixabay

रिलिजियस टूरिज्म

धार्मिक पर्यटन में लोग आस्था, पूजा या आध्यात्मिक अनुभव के लिए यात्रा करते हैं. तीर्थ यात्रा इसका प्रमुख रूप है. भारत में वाराणसी, अयोध्या, मथुरा, तिरुपति और अन्य धार्मिक स्थल बड़ी संख्या में यात्रियों को आकर्षित करते हैं. दुनिया के अलगअलग हिस्सों में भी लोग अपने धर्म से जुड़े पवित्र स्थलों पर जाते हैं. कुछ यात्रियों के लिए यह यात्रा पूजा का अवसर होती है. कुछ लोग शांति, चिंतन और आत्मिक जुड़ाव की तलाश में जाते हैं. धार्मिक यात्रा में स्थानीय रीतिरिवाजों और स्थल के नियमों का सम्मान करना जरूरी है.

कॉरपोरेट टूरिज्म

व्यापार या कॉरपोरेट पर्यटन काम से जुड़ी यात्रा है. लोग बैठक, सम्मेलन, व्यापार मेले और प्रदर्शनियों में शामिल होने के लिए दूसरे शहरों या देशों में जाते हैं. ऐसी यात्राओं में मुख्य उद्देश्य काम होता है, लेकिन यात्रियों को खाली समय में स्थानीय जगहें देखने का मौका भी मिल सकता है.

तरहतरह के स्वाद की चाहत में घूमना गैस्ट्रोनॉमी टूरिज्म है. फोटो: pixabay

गैस्ट्रोनॉमी टूरिज्म

खानपान पर्यटन में स्थानीय भोजन यात्रा का मुख्य आकर्षण होता है. यात्री क्षेत्रीय व्यंजन चखते हैं, खाद्य बाजारों में जाते हैं या खाना बनाने की कक्षाओं में हिस्सा लेते हैं. किसी शहर या इलाके के स्वाद से उसकी संस्कृति और जीवनशैली की झलक मिल सकती है. भोजन उत्सव और स्थानीय भोजन यात्राएं भी इस अनुभव का हिस्सा बन सकती हैं.

इकोटूरिज्म

इकोटूरिज्म में प्रकृति को करीब से देखने और उसका सम्मान करने पर जोर होता है. जंगल, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और प्राकृतिक क्षेत्र इसके उदाहरण हैं. जिम्मेदार इकोटूरिज्म का लक्ष्य स्थानीय पर्यावरण पर कम असर डालना है. यात्रियों को कचरा न फैलाने, वन्यजीवों से दूरी रखने और स्थानीय समुदायों का सम्मान करने की सलाह दी जाती है. केवल प्राकृतिक जगह पर जाना अपने आप में इकोटूरिज्म नहीं बन जाता. यात्रा का तरीका भी मायने रखता है.

डार्क टूरिज्म को पसंद करने वालों की संख्या बढ़ रही है. फोटो: pixabay

डार्क एंड थीम टूरिज्म

डार्क टूरिज्म में लोग उन जगहों पर जाते हैं जो युद्ध, त्रासदी, आपदा, ऐतिहासिक कब्रिस्तान या दुखद ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी हों. ऐसी जगहों की यात्रा का उद्देश्य इतिहास को समझना और प्रभावित लोगों की स्मृति का सम्मान करना हो सकता है. थीम पर्यटन इससे व्यापक है. इसमें किसी खास रुचि के आधार पर यात्रा की जाती है. उदाहरण के लिए, फिल्म से जुड़ी जगहें, भूतिया माने जाने वाले स्थान या किसी विशेष विषय पर आधारित आकर्षण. ऐसी जगहों पर संवेदनशीलता और सम्मान बनाए रखना जरूरी है.

हेल्थवेलनेस टूरिज्म

स्वास्थ्य और वेलनेस पर्यटन में लोग सेहत, आराम और बेहतर जीवनशैली से जुड़े अनुभवों के लिए यात्रा करते हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। योग, ध्यान, आयुर्वेद, स्पा और स्वास्थ्यकेंद्रित रिट्रीट इसके उदाहरण हैं. मेडिकल टूरिज्म में लोग इलाज या चिकित्सा प्रक्रिया के लिए दूसरी जगह जाते हैं. इसे वेलनेस यात्रा से अलग भी देखा जा सकता है, क्योंकि इसका उद्देश्य अक्सर चिकित्सकीय उपचार होता है. यात्रा तय करने से पहले सुविधाओं और विशेषज्ञों की जानकारी जांचना जरूरी है.

अकेले घूमने यानी सोलो ट्रैवेलिंग का ट्रेंड भी पॉपुलर है. फोटो: pixabay

इन दिनों यात्रा के कौनसे ट्रेंड चर्चा में हैं?

  • स्लो ट्रैवल: इसमें कई जगहें देखने के बजाय किसी एक स्थान पर अधिक समय बिताया जाता है. यात्री स्थानीय जीवन, भोजन और संस्कृति को समझने की कोशिश करते हैं. इससे यात्रा कम भागदौड़ वाली महसूस हो सकती है.
  • वेलनेस रिट्रीट: तनाव से राहत और आराम के लिए कुछ यात्री योग, ध्यान या स्वास्थ्यकेंद्रित कार्यक्रम चुनते हैं. अपने शहर के पास छोटे वेलनेस रिट्रीट भी लोगों को आकर्षित कर सकते हैं. इसे कभीकभी कोकूनिंग वेलनेस कहा जाता है, जहां ध्यान आराम और सुरक्षित, शांत वातावरण पर होता है.
  • अनुभवकेंद्रित यात्रा: कई यात्री केवल प्रसिद्ध जगहें देखने तक सीमित नहीं रहना चाहते. वे स्थानीय भोजन, कला, हस्तशिल्प या रोजमर्रा के जीवन से जुड़े अनुभव तलाशते हैं. ऐसे अनुभव यात्रा को अधिक व्यक्तिगत बना सकते हैं.
  • सोलो ट्रैवल: अकेले यात्रा करना भी कई लोगों की पसंद बन रहा है. इससे यात्री अपनी सुविधा के अनुसार कार्यक्रम बना सकते हैं. अकेले यात्रा करते समय ठहरने की जगह, स्थानीय परिवहन और सुरक्षा की पहले से जानकारी लेना उपयोगी है.
  • डिजिटल नोमैड यात्रा: डिजिटल नोमैड वे लोग हैं जो काम के साथ अलगअलग जगहों पर रहकर यात्रा करते हैं. इंटरनेट की उपलब्धता और काम का लचीला समय इस तरह की जीवनशैली को संभव बना सकता है. यात्रा से पहले रहने की सुविधा, काम का समय और आवश्यक नियम समझना जरूरी है.

भारत में पर्यटकों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं. फोटो: pixabay

सही टूरिज्म कैसे चुनें?

यात्रा का सबसे अच्छा प्रकार वही है जो आपकी रुचि, समय और जरूरतों के अनुकूल हो. आराम चाहिए तो शांत अवकाश चुनें. इतिहास में दिलचस्पी हो तो विरासत स्थलों की यात्रा करें. प्रकृति पसंद हो तो जिम्मेदार तरीके से प्राकृतिक क्षेत्रों का अनुभव लें. चाहे तीर्थ यात्रा हो या डार्क टूरिज्म, हर जगह के लोगों, संस्कृति और नियमों का सम्मान जरूरी है. सोचसमझकर की गई यात्रा न केवल यादगार बनती है, बल्कि स्थानीय जगहों और समुदायों के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ाती है.

भारत में कौन सा पर्यटन लोकप्रिय है?

भारत में पर्यटकों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं. भौगोलिक रूप से बड़ा देश होने, शिक्षासंस्कृति, ध्यानयोग की धरती होने की वजह से यहां पर्यटकों के लिए बहुत कुछ है. यह रामकृष्ण, बुद्ध की धरती है. भारत की यही विविधता उसे विरासत पर्यटन के लिए खास बनाती है. यहां यात्रियों को स्मारक, किले, मंदिर, कला और अलगअलग क्षेत्रीय परंपराएं देखने को मिलती हैं.

धार्मिक पर्यटन भी देश की यात्रा संस्कृति का जानापहचाना हिस्सा है. उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में ट्रेकिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों के विकल्प मिलते हैं. जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में वन्यजीव देखने के अवसर भी यात्रियों को आकर्षित करते हैं. किस प्रकार का पर्यटन सबसे लोकप्रिय है, इसका जवाब जगह और यात्री समूह के अनुसार बदल सकता है.

टूरिज्म से कितना फायदा?

  • विश्व पर्यटन: साल 2024 में वैश्विक यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक योगदान 10.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया. यह दुनिया की जीडीपी का लगभग 10 फीसदी था. इसी क्षेत्र ने दुनिया भर में करीब 35.7 करोड़ लोगों को रोजगार में मदद दिया.
  • भारत का पर्यटन: साल 2025 में 2.53 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए. इससे 2,76,831 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा मिली. वित्त वर्ष 202324 में पर्यटन का भारत की जीडीपी में योगदान 5.22 फीसदी आँका गया.

5 सालें में कितने भारतीयों ने विदेश यात्रा की?

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 से 2024 तक भारतीय नागरिकों की विदेश यात्राओं की संख्या निम्नवत है. नीचे दिए गए आंकड़े यह नहीं प्रमाणित करते कि इतने लोगों ने विदेश यात्राएं कीं. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि एक ही व्यक्ति ने कई बार विदेश यात्रा की. साल 2020 और 2021 में विदेश यात्राओं पर कोविड का तगड़ा असर रहा.

साल भारतीय
2020 72.9 लाख
2021 85.5 लाख
2022 2.16 करोड़
2023 2.79 करोड़
2024 3.09 करोड़

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