मंदी के बादलों के बीच विदेशी निवेशकों की बल्लेबल्ले, पहली तिमाही में बाजार को पीछे छोड़ा

मंदी के बादलों के बीच विदेशी निवेशकों की बल्लेबल्ले, पहली तिमाही में बाजार को पीछे छोड़ा

जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय शेयर बाजार भारी उतारचढ़ाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, तब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के स्मार्ट दांव ने सबको हैरान कर दिया. जियो पॉलिटिकल टेंशन, वैश्विक ब्याज दरों पर असमंजस के बीच बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स का प्रदर्शन मिलाजुला रहा. लेकिन विदेशी फंड मैनेजर्स ने सही सेक्टर्स और शेयरों के चुनाव से न सिर्फ बाजार के इस तूफान को बेअसर किया, बल्कि निफ्टी और सेंसेक्स को काफी पीछे छोड़ते हुए बंपर रिटर्न हासिल किया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आखिर बड़े FPIs ने वॉलाटिलिटी के बीच यह चमत्कार कैसे किया? उन्होंने किन सेक्टर्स पर दांव लगाया और आम निवेशकों के लिए इसमें क्या बड़ी सीख है? आइए, आसान और सरल भाषा में समझते हैं…

कितना दिया रिटर्न?

जून तिमाही में भारतीय इक्विटी में भरोसा बनाए रखने का फायदा गोल्डमैन सैक्स, कैपिटल ग्रुप और दूसरे बड़े विदेशी फंड्स को मिला. यह वह समय था जब ईरान संकट के तुरंत बाद ज्यादातर विदेशी निवेशक स्थानीय रिस्की एसेट्स से बाहर निकल रहे थे. ‘प्राइम डेटाबेस’ की एक स्टडी के अनुसार, जून तिमाही में टॉप 20 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों में से कम से कम 75 फीसदी के भारत में मौजूद पोर्टफोलियो की वैल्यू में 10 फीसदी से 37 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई. यह बढ़ोतरी इसी दौरान सेंसेक्स और निफ्टी से हुई कमाई से कहीं ज्यादा थी. इस स्टडी में तिमाही के आखिर में पोर्टफोलियो की वैल्यू का इस्तेमाल किया गया था.

कोरिया की तुलना में कम मुनाफा

यह सच है कि उस दौरान साउथ कोरिया और ताइवान में सेमीकंडक्टर से मिले जबरदस्त मुनाफे की तुलना में, मुंबई में मुनाफा शायद उतना ज्यादा नहीं रहा. फिर भी, तेल की कीमतों में भारी उतारचढ़ाव और ग्लोबल शिपिंग रेट्स में तेजी के बावजूद शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारत का बाजार स्टॉक चुनने वालों के लिए एक बेहतरीन जगह है, जहां पोर्टफोलियो से मिलने वाला रिटर्न मुख्य इंडेक्स के रिटर्न से काफी अलग हो सकता है. पोर्टफोलियो की वैल्यू में बढ़ोतरी स्टॉक से होने वाले मुनाफे और नई खरीदारी, दोनों की वजह से हो सकती है, हालांकि एनालिस्ट का कहना है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों की पहचान करने से भी इस बढ़ोतरी में बड़ा योगदान मिला होगा.

क्या कहते हैं जानकार?

बे कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर और CIO केयूर मजूमदार ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हाल की बिकवाली मुख्य रूप से इंडेक्स में ज्यादा वेटेज वाले शेयरों, खासकर बैंकों और IT कंपनियों में हुई है, जबकि कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों और नए ज़माने के बिजनेस ने शानदार प्रदर्शन किया है. जिन फंड्स ने ब्रॉडर मार्केट में सही शेयरों को चुना, उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है. कैपिटल ग्रुप, INQ होल्डिंग्स LLC, फिडेलिटी, IFC इमर्जिंग एशिया फंड, गोल्डमैन सैक्स, इंटरनेशनल अपॉर्चुनिटीज फंड, इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स, नॉर्दर्न TK वेंचर्स, नालंदा और GQG पार्टनर्स जैसे FPI के फंड और पोर्टफोलियो बेंचमार्क की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.

कैसा रहा शेयर बाजार का परफॉर्मेंंस?

इस तिमाही के दौरान सेंसेक्स में लगभग 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि निफ्टी 6.8 फीसदी बढ़ा. भारत के ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स और भी तेज़ी से बढ़े, जिसमें BSE मिडकैप 150 और BSE स्मॉलकैप 250 में क्रमश 17% और 24.5% की बढ़ोतरी हुई. इसकी तुलना में, डॉलर के हिसाब से चीन में 22.2%, ताइवान में 46.3% और दक्षिण कोरिया में 64.24% की बढ़ोतरी हुई. MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स, जिसमें ये सभी देश शामिल हैं, में 23% की बढ़ोतरी हुई. इसके बाद से पूर्वी एशियाई सूचकांकों में काफी गिरावट आई है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े ट्रेड आंशिक रूप से कम हो गए हैं.

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