‘मोक्ष के मार्ग’ वाली गुफा में फंसा श्रद्धालु, दम घुटने से मौत… तमिलनाडु में दर्दनाक हादसा

‘मोक्ष के मार्ग’ वाली गुफा में फंसा श्रद्धालु, दम घुटने से मौत… तमिलनाडु में दर्दनाक हादसा

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के विश्व प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर स्वामी मंदिर के गिरि प्रदक्षिणा मार्ग पर स्थित इडुक्कू पिल्लैयार गुफा में एक हृदयविदारक हादसा हुआ है. आंध्र प्रदेश से दर्शन करने पहुंचे 36 वर्षीय श्रद्धालु मणिकुमार संकरी गुफा से गुजरते समय बीच में ही फंस गए. काफी देर तक गुफा के भीतर फंसे रहने के कारण ऑक्सीजन की कमी और दम घुटने से उनकी जान चली गई. इस घटना के बाद से श्रद्धालुओं और परिजनों में गहरा शोक व्याप्त है.

‘मोक्ष के मार्ग’ वाली गुफा में फंसा श्रद्धालु, दम घुटने से मौत… तमिलनाडु में दर्दनाक हादसा

आंध्र प्रदेश निवासी मणिकुमार शुक्रवार रात अपने परिवार के सदस्यों के साथ तिरुवनमलाई स्थित श्री नुनुलयम्मन समेता अरुणाचलेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शनपूजन के लिए आए थे. मंदिर में दर्शन के पश्चात रात करीब 11 बजे मणिकुमार और उनका परिवार गिरि प्रदक्षिणा मार्ग पर स्थित इडुक्कू पिल्लैयार मंदिर पहुंचा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुफा के पीछे के दरवाजे से प्रवेश कर रेंगते हुए आगे के रास्ते से बाहर निकलना होता है. मणिकुमार अपने भारी शरीर के कारण गुफा के बेहद संकरे रास्ते के बीच में ही अटका रह गए.

बचाव की कोशिशें नाकाम, अस्पताल में मृत घोषित

मणिकुमार के फंसने के बाद परिजनों और अन्य श्रद्धालुओं ने उन्हें तुरंत बाहर निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. हवा की कमी और घबराहट के कारण मणिकुमार गुफा के भीतर ही बेहोश हो गए. काफी मशक्कत के बाद अन्य श्रद्धालुओं ने उन्हें किसी तरह गुफा से बाहर निकाला और 108 एम्बुलेंस के जरिए तिरुवनमलाई सरकारी अस्पताल पहुंचाया. हालांकि, परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

घटना की सूचना मिलने के बाद तिरुवनमलाई तालुका पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांचपड़ताल की. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा.

क्या है इडुक्कू पिल्लैयार मंदिर की परंपरा और विशेषता?

तिरुवनमलाई के गिरि प्रदक्षिणा मार्ग पर स्थित इडुक्कू पिल्लैयार मंदिर एक छोटी गुफानुमा संरचना है. इस मंदिर में श्रद्धालु पीछे के संकरे प्रवेश द्वार से दाखिल होते हैं और रेंगते हुए आगे के द्वार से बाहर आते हैं. विशेष रूप से तेलुगु भाषी श्रद्धालु इसे ‘मोक्ष का मार्ग’ और पापों से मुक्ति का प्रतीक मानते हैं. मान्यता है कि यहां से सफलता से बाहर आने के बाद नंदी और इडुक्कू पिल्लैयार के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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