Quick Samachar: SIT Report On Ram Mandir: अयोध्या स्थित राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सोमवार को जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था। कोर्ट में अवकाशकालीन पीठ के न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने PIL पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में कोई ऐसी तात्कालिकता नहीं है, जिसके आधार पर बाकी मामलों से पहले इसकी सुनवाई की जाए।

सरकार ने की आवश्यक पहल: कोर्ट
मामले में कोर्ट में याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने कोर्ट से मामले तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। इस पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि कि कोर्ट में पहले से ही बहुत से मामले लंबित हैं और ऐसे में याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का कोई औचित्य नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पहले ही मामले में संज्ञान ले चुकी है और पहल कर रही है।
न्यायिक आयोग के गठन की अपील
इलाहाबाद हाई कोर्ट में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित गड़बड़ी की न्यायिक जांच की मांग करते हुए एक PIL दायर करने वाले एक अन्य याचिकाकर्ता और वकील मोती लाल कहते हैं, मैंने शनिवार को रजिस्ट्री में एक जनहित याचिका दायर की है। इसमें मैंने कथित राम मंदिर दान घोटाले का मुद्दा उठाया है, जिसमें लगभग ₹200 करोड़ के गबन का अनुमान है। ये आरोप प्रिंट मीडिया के जरिए सार्वजनिक हुए थे।
Lucknow, Uttar Pradesh: A PIL filed in Allahabad High Court seeking judicial probe into alleged Ram Temple donation misappropriation
Petitioner and Advocate Moti Lal says, “A public interest litigation has been filed by me today in the High Court registry on Saturday. In it, I… pic.twitter.com/tZi2btjMD4
— IANS June 22, 2026
आगे उन्होंने कहा कि इस PIL के जरिए मैंने मांग की है कि मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। मैंने यह भी मांग की है कि SIT की जांच पूरी होने तक मंदिर ट्रस्ट की शक्तियों पर रोक लगा दी जाए।
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SIT आज सौंप सकती है रिपोर्ट
बता दें कि में कथित दान चोरी मामले की जांच के लिए गठित SIT सोमवार को अपनी प्रारम्भिक रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। इसके लिए पूरी टीम रविवार को भी पूरी सक्रियता के साथ काम की। टीम ने रिपोर्ट में शामिल लोगों के बयान को दुरुस्त करने के लिए फिर से उन लोगों को बुला कर उनका बयान दर्ज किया।
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