Quick Samachar: Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने मंगलवार सुबह अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी। रिपोर्ट में चढ़ावे में कथित हेरफेर, चोरी और कमीशनखोरी से जुड़े कई अहम बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और चढ़ावे की गणना व्यवस्था में अनियमितताओं की आशंका भी जताई गई है। SIT ने इन पहलुओं से जुड़े कई दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए हैं।

रिपोर्ट में उन गवाहों के बयान भी शामिल किए गए हैं, जिन्होंने जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। CM योगी ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
मंदिर प्रबंधन में हुए तीन बड़े बदलाव
चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थाओं में कई अहम बदलाव किए हैं। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच पूरी होने के बाद SIT ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को भेजी गई है।
अब दरी पर बैठकर हो रही नोटों की गिनती
पहले दानपात्र से निकले नोटों की गिनती टेबलकुर्सी पर बैठकर की जाती थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया जमीन पर दरी और कालीन बिछाकर कराई जा रही है। दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावे की गिनती तक हर चरण की वीडियोग्राफी की जा रही है। कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट पर सख्त तलाशी भी ली जा रही है।
पुराने कर्मचारियों की जगह नई टीम
नोट गिनने की जिम्मेदारी अब केवल 40 विश्वसनीय सेवादारों को दी गई है। पहले से जुड़े कुछ कर्मचारियों और बैंक कर्मियों को हटाकर नई टीम तैनात की गई है। सुरक्षा बढ़ाने के लिए छह नए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और वीडियो स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
ट्रस्टियों की भूमिका सीमित
सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव फिलहाल मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासनिक फैसलों से दूर हैं। वर्तमान में ट्रस्ट के पदेन सदस्य और अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की निगरानी में व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।
जांच के दायरे में प्रबंधन की लापरवाही
SIT की जांच में केवल चोरी या हेरफेर की घटनाओं को ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी में हुई चूक को भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किन स्तरों पर ऐसी कमियां रहीं, जिनकी वजह से चढ़ावे की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए।
तीन हिस्सों में तैयार हुई SIT रिपोर्ट
जांच रिपोर्ट को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है
आपराधिक जांच: चढ़ावे, जेवरात या अन्य संपत्तियों में हेरफेर के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान।
वित्तीय ऑडिट: मंदिर में आए दान, बैंक लेनदेन, टेंडर प्रक्रिया और संपत्ति संबंधी मामलों की समीक्षा।
सुधार संबंधी सुझाव: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिशें।
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रिपोर्ट में बड़े नामों का जिक्र होने की चर्चा
सूत्रों का दावा है कि जांच में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका और निगरानी संबंधी जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इसी बीच यह चर्चा भी तेज है कि रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने में देरी हुई है और उच्च स्तर पर इस पर मंथन जारी है। जांच एजेंसियां और प्रशासन अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि जांच निष्पक्ष हो, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो और भविष्य में चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
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