
रायबरेली, अमृत विचार। शारदा सहायक नहर के तेज बहाव ने सिंचाई विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। रायबरेली से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित बेहटा पुल के अंतिम छोर पर नीचे की ओर अचानक पानी का रिसाव शुरू हो गया। पानी का दबाव इतना अधिक था कि पुल के मुख के निचले हिस्से की मिट्टी कटकर बहने लगी। रिसाव की जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग में हड़कंप मच गया। पिछले तीन दिनों से विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर डटे हुए हैं और रिसाव को रोकने के लिए दिनरात अभियान चला रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुशील यादव ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने के साथ ही बचाव और मरम्मत कार्य की लगातार निगरानी की। पानी के दबाव को कम करने के लिए सबसे पहले शारदा सहायक नहर के 229 प्वाइंट को बंद किया गया। इसके बाद पानी को सई नदी की ओर मोड़कर नहर के संबंधित हिस्से में जलस्तर और बहाव को नियंत्रित किया गया।
पानी का ठहराव होने के बाद गुरुवार से बेहटा पुल पर रिसाव रोकने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया। विभाग ने दो जेसीबी मशीनों, मिट्टी ढोने वाले डंपरों, हजारों मिट्टी भरी बोरियों और बड़ी संख्या में श्रमिकों को मौके पर लगाया। सिंचाई विभाग के करीब आधा दर्जन जिम्मेदार अधिकारी लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहकर काम की निगरानी करते रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने पुल पर ही टेंट लगाकर रातभर निगरानी की, ताकि किसी भी तरह की चूक न हो।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पुल के नीचे जिस स्थान से पानी का रिसाव हो रहा था, वहां की मिट्टी पानी के तेज बहाव में कटकर बह गई। इससे रिसाव का वास्तविक स्थान स्पष्ट हो गया। इसके बाद आननफानन में मरम्मत कार्य शुरू किया गया और श्रमिकों को नहर में उतारकर मिट्टी से भरी बोरियों से अस्थायी बांध तैयार किया गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। लगातार प्रयासों के बाद शनिवार को रिसाव को काफी हद तक नियंत्रित करने में सफलता मिली।
अधिशासी अभियंता सुशील यादव ने बताया कि रिसाव पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। विभागीय अधिकारी और कर्मचारी दिनरात मौके पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है और जल्द ही रिसाव को पूरी तरह रोकने का काम पूरा कर लिया जाएगा।
मिट्टी बहने से स्पष्ट हुआ पानी रिसाव, वरना होती और परेशानी
बेहटा पुल के नीचे पानी का रिसाव शुरू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती रिसाव के वास्तविक स्थान का पता लगाना था। तेज बहाव के कारण पुल के निचले हिस्से की मिट्टी धीरेधीरे कटकर पानी के साथ बहती जा रही थी। इससे रिसाव का स्थान लगातार गंभीर रूप ले सकता था। हालांकि मिट्टी के बह जाने से पानी के प्रवेश का बिंदु स्पष्ट हो गया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मरम्मत कार्य शुरू करने में मदद मिली। विभाग ने तत्काल पानी का बहाव नियंत्रित किया और श्रमिकों को नहर में उतारकर मिट्टी से भरी बोरियों की मदद से अस्थायी बांध बनाया। दो जेसीबी और डंपरों की मदद से भी राहत कार्य तेज किया गया। अधिकारियों की लगातार निगरानी और दिनरात चले अभियान के बाद रिसाव को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है।