रेलवे बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 202627 के लिए ‘हाउस बिल्डिंग एडवांस’ की ब्याज दरें तय कर दी हैं. हाल ही जारी किए नए आदेश के तहत रेलवे कर्मियों को अब घर बनाने के लिए महज 7.1 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर पर पैसा मिलेगा. यह फैसला सीधे तौर पर कर्मचारियों की जेब पर पड़ने वाले ईएमआई के बोझ को कम करेगा और उन्हें महंगाई के इस दौर में बड़ी आर्थिक राहत देगा.

7.1% की नई ब्याज दर
रेलवे बोर्ड की तरफ से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, नई 7.1 फीसदी की ब्याज दर 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी. यह दर 31 मार्च 2027 तक मंजूर होने वाले सभी हाउस बिल्डिंग एडवांस पर प्रभावी रहेगी. दरअसल, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 13 मई 2026 को इस संबंध में एक मेमोरेंडम जारी किया था. रेलवे बोर्ड ने उसी सरकारी आदेश को अपनाते हुए अपने कर्मचारियों के लिए भी इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है. इससे पहले के वित्तीय वर्ष में हाउस बिल्डिंग एडवांस की ब्याज दर 7.44% वार्षिक थी.
क्या है यह ‘हाउस बिल्डिंग एडवांस’?
सरकारी नौकरी करने वालों के लिए ‘हाउस बिल्डिंग एडवांस’ किसी वरदान से कम नहीं होता. यह केंद्र सरकार और रेलवे द्वारा अपने स्टाफ को दी जाने वाली एक विशेष वित्तीय सुविधा है. आज के समय में जहां बाजार के बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान होम लोन पर भारीभरकम ब्याज वसूलते हैं, वहीं HBA के तहत कर्मचारियों को बेहद रियायती दरों पर पैसा मिल जाता है. इसका सीधा मकसद यह है कि सरकारी कर्मचारी बिना किसी बड़े आर्थिक तनाव के अपने और अपने परिवार के लिए एक पक्की छत का इंतजाम कर सकें.
किनकिन कामों के लिए ले सकते हैं सरकार से यह पैसा?
इस खास सरकारी एडवांस का इस्तेमाल सिर्फ एक बनेबनाए घर को खरीदने तक सीमित नहीं है. रेलवे कर्मचारी अपनी जरूरत के हिसाब से इसका कई जगह उपयोग कर सकते हैं. अगर आप खाली प्लॉट खरीदकर उस पर नया मकान बनवाना चाहते हैं, तो यह पैसा आपके काम आएगा. किसी बिल्डर से रेडीटूमूव फ्लैट लेना हो, या फिर केंद्र, राज्य सरकार और हाउसिंग सोसाइटी की किसी स्कीम में घर खरीदना हो, आप हर जगह इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. यही नहीं, अगर आपके पास पहले से अपना मकान है और परिवार बढ़ने पर आप उसमें नया कमरा या एक और मंजिल जुड़वाना चाहते हैं, तब भी आपको इस लोन का लाभ मिलेगा.
बाकी नियमों में क्या कोई बदलाव हुआ है?
रेलवे बोर्ड ने अपने इस नए आदेश में स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है कि बदलाव केवल ब्याज दर को लेकर किया गया है. योजना के बाकी किसी भी पुराने नियम से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. लोन लेने के लिए जरूरी पात्रता, नौकरी का समय और पैसा चुकाने की अवधि की शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी. किसी भी कर्मचारी को अधिकतम कितना एडवांस मिलेगा, यह उसकी मौजूदा सैलरी, बेहतरीन सर्विस रिकॉर्ड और खरीदी जा रही प्रॉपर्टी की कुल कीमत के आधार पर ही तय किया जाएगा.