
चीन अपनी टेक ताकत और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग के दम पर ह्यूमनॉइड रोबोट्स यानी इंसानों जैसे दिखने और काम करने वाले रोबोट्स के ग्लोबल हब बनने की अंधी दौड़ में शामिल हो चुका है. फैक्ट्रियों की असेंबली लाइन से लेकर बड़े-बड़े वेयरहाउस तक चीन इन मशीनी इंसानों को असल दुनिया के कामों में उतार रहा है. इसी बूम के बीच चीन की दिग्गज रोबोटिक्स कंपनी Unitree अब IPO की रेस में है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर चीन रोबोट्स पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा है? क्या वो अमेरिका की टेस्ला जैसी कंपनियों को पछाड़कर रोबोटिक्स का दुनिया में किंग बनने की कोशिश कर रहा है? और क्या ये रोबोट्स सच में हमारी फैक्ट्रियों और आम जिंदगी में एंट्री करने के बहुत ही करीब आ चुके हैं?
चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ह्यूमनॉइड रोबोट की रेस में एक बड़ा नाम बनकर उभर रही है. भले ही चीन से बाहर लोग इस कंपनी का नाम ज्यादा न जानते हों, लेकिन इसके रोबोट्स के वीडियो इंटरनेट पर छाए हुए हैं. सुपरह्यूमन जैसे स्टंट और बैकफ्लिप करते यूनिट्री के रोबोट्स को करोड़ों लोग देख चुके हैं. अब यूनिट्री रोबोटिक्स एक बड़ा फाइनेंसियल कदम उठाने जा रही है. अब ये कंपनी शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में अपना IPO लाने की तैयारी में है. द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, गुरुवार को यूनिट्री ने अपने शेयरों की कीमत लगभग 22 डॉलर प्रति शेयर तय की है, जिससे वह करीब 900 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है.
9 अरब डॉलर की वैल्यूएशन
इस डील के साथ ही यूनिट्री रोबोटिक्स की वैल्यूएशन करीब 9 अरब डॉलर पहुंच जाएगी. हालांकि, टेक जगत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह टेक्नोलॉजी सच में एक बड़े बिजनेस में बदल सकती है? भले ही यूनिट्री के रोबोट तेजी से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन क्या आने वाले समय में आम लोग और कंपनियां लाखों की संख्या में ये रोबोट खरीदेंगी, यह अभी साफ नहीं है.
रिसर्च फर्म Omdia के एक्सपर्ट्स लियान जी सू के मुताबिक, यूनिट्री का यह स्टॉक सेल पूरे रोबोटिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा टेस्ट साबित होगा. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इससे यह समझ आएगा कि शेयर मार्केट ह्यूमनॉइड रोबोट्स जैसे उभरते और शुरुआती टेक सेक्टर को किस नजरिए से देखता है.
फिजिकल AI का बढ़ता मार्केट
रोबोट्स को इंसानों, सामानों, कमरों और डेली के कामों को समझने के लिए असल दुनिया में सीखना पड़ता है. इस टेक्नोलॉजी को एम्बॉडीड एआई या फिजिकल एआई कहा जाता है.
इन्वेस्टमेंट रिसर्च फर्म CLSA की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट साल 2030 तक 69 अरब डॉलर का हो सकता है, जो इस साल मात्र 2 अरब डॉलर के करीब है.
बढ़ती टक्कर और घटता मुनाफा
2026 के पहले क्वाटर में कड़ी टक्कर और कम मांग के कारण यूनिट्री की ग्रोथ थोड़ी धीमी रही. बढ़ती टक्कर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च करने की वजह से पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 55% तक कम हो गया.
चीन बनाम अमेरिका: रोबोटिक्स की जंग
यूनिट्री की यह लिस्टिंग इसलिए खास है क्योंकि यह चीन के मेनलैंड स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी है.
चीन रोबोट्स के मास प्रोडक्शन में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है:
Omdia के अनुमान के अनुसार, चीनी निर्माताओं ने इस साल की पहली छमाही में करीब 18,500 ह्यूमनॉइड रोबोट बेचे.
वहीं इस पीरियड में अमेरिकी कंपनियों ने सिर्फ 4,000 रोबोट शिप किए.
अगर चीन इसी रफ्तार से कम लागत में रोबोट बनाता रहा, तो वह अमेरिकी कंपनियों के मास प्रोडक्शन में पहुंचने से पहले ही एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार कर लेगा. लेकिन, अमेरिका की टेस्ला, Figure AI, एजिलिटी रोबोटिक्स जैसी कंपनियां बड़ा निवेश कर रही हैं. वहीं Nvidia फिजिकल एआई के लिए जरूरी चिप्स और एआई सिस्टम का नेतृत्व कर रही है.
चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में इतना भारी निवेश क्यों कर रहा है?
चीन रोबोटिक्स सेक्टर में दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है. ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट 2026 में करीब 2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 69 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जैसा पहले बताया गया है. चीन चाहता है कि अमेरिका के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने से पहले पहले वह कम लागत और तेज स्पीड में रोबोट बनाकर दुनिया के बाजार पर बढ़त बना ले.
यूनिट्री दूसरे चीनी रोबोटिक्स कंपनियों से अलग क्यों है?
यूनिट्री चीन के शेयर मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी रेस में है. इसके रोबोट्स के वायरल स्टंट्स इंटरनेट पर काफी चर्चा का विषय बने हैं. इसके साथ ही बीते साल 2025 में यूनिट्री ने दुनिया में सबसे ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स बेचे, इसका रेवेन्यू 4 गुना बढ़कर 250 मिलियन डॉलर पहुंचा और यह एक प्रॉफिटेबल यानी लाभ कमाने वाली कंपनी बन गई है.

फैक्ट्रियों और दूसरे बिजनेस में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने के कितने करीब हैं?
रोबोट्स का हुनर और AI तेजी से सुधर रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होने में अभी समय लग सकता है. हालांकि चीन ने 2026 की पहली छमाही में 18,500 रोबोट्स की डिलीवरी की है, लेकिन कंपनियां और दूसरे कस्टमर्स इन्हें महंगे दामों में खरीदने और रोजाना के काम में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं, यह टेस्ट होना बाकी है.
क्या चीनी कंपनियां अमेरिकी फर्मों को पीछे कर सकती हैं?
चीन के पास प्रोडक्शन की तेजी और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग जैसी शक्ति है. इसका उदाहरण है कि साल 2026 के पहले 6 महीनों में चीन ने 18,500 रोबोट बनाए, वहीं अमेरिका ने सिर्फ 4,000. लेकिन अमेरिका के पास बेहतर AI और एडवांस्ड चिप्स की ताकत है. अगर चीन इसी रफ्तार से प्रोडक्शन बढ़ाता रहा, तो वह मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है, लेकिन एआई और सॉफ्टवेयर में अमेरिका अभी भी कड़ी टक्कर दे रहा है.
ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की दौड़ में भारत कहां खड़ा है?
ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की रेस में भारत फिलहाल उभरते हुए फेस में है. अमेरिका और चीन जैसे देश एडवांस फिजिकल AI, हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और बड़े पैमाने पर फंडिंग के कारण इस सेक्टर में आगे हैं. हालांकि, भारत सॉफ्टवेयर टैलेंट, स्पेस टेक्नोलॉजी और सर्विस रोबोटिक्स में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.
इस सेक्टर में भारत ने ISRO के गगनयान मिशन के लिए AI-संचालित हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्र तैयार किया है, जो गगनयान के अनक्रू टेस्ट मिशनों में हिस्सा लेगा. भारत के पास विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और AI रिसर्चर्स का नेटवर्क है, जो Embodied AI तैयार करने में मदद करेगा.
भारत का लक्ष्य तुरंत पश्चिमी या चीनी कंपनियों से सीधे एडवांस दो पैरों वाले इंडस्ट्रियल ह्यूमनॉइड्स में टक्कर लेने के जगत पर अपने स्पेशल तकनीक वाले रोबोट तैयार करना है. IndiaAI मिशन, PLI योजनाओं और IITs में R&D हब्स के विस्तार के साथ भारत इस अंतर को तेजी से छोटा कर रहा है.