
लखनऊ। पिछले महीने अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने शनिवार को उस चार मंजिला इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी, जिसमें आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। सुबह एलडीए की टीम स्थानीय पुलिस बल और तीन बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंची। ध्वस्तीकरण से पहले पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर आसपास की सड़कों को बंद कर दिया गया।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया कि जिस भवन को बेसमेंट और दो मंजिल के आवासीय निर्माण की अनुमति मिली थी, उसमें नियमों के विरुद्ध एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, आवासीय भवन को बिना अनुमति व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में भी संचालित किया जा रहा था।
प्राधिकरण ने 23 जून को उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत भवन मालिकों को नोटिस जारी कर निर्माण की वैधता साबित करने को कहा था। सुनवाई के बाद नामित प्राधिकारी ने निर्माण को अवैध घोषित करते हुए 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। आदेश में 25 जुलाई तक अवैध हिस्सों को स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ऐसा नहीं होने पर एलडीए ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
22 जून को हुआ था दर्दनाक अग्निकांड
22 जून को इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित एक कार्यालय में भीषण आग लग गई थी। हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जबकि पांच लोग पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। इस घटना के बाद भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर कई स्तरों पर जांच शुरू की गई।
मामले में पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, एनीमेशन सेंटर के संचालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार ने लापरवाही के आरोप में बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया था।