लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा सिंडिकेट बेनकाब, रद्द लाइसेंस पर चलता रहा कारोबार; पांच कारोबारियों पर FIR 

लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा सिंडिकेट बेनकाब, रद्द लाइसेंस पर चलता रहा कारोबार; पांच कारोबारियों पर FIR 
लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा सिंडिकेट बेनकाब, रद्द लाइसेंस पर चलता रहा कारोबार; पांच कारोबारियों पर FIR 

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र में नकली दवाओं के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में सामने आया कि रद्द हो चुके औषधि लाइसेंस, जीएसटी नंबर और फर्जी बिलों के जरिए नामी कंपनियों की कथित नकली दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। मामले में पांच कारोबारियों के खिलाफ कैसरबाग कोतवाली में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क

एफएसडीए के औषधि निरीक्षक संदेश मौर्य ने बताया कि 12 जुलाई 2025 को जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड की ओर से क्लॉपजी क्रीम के नकली उत्पाद की शिकायत मिली थी। आरोप था कि अमीनाबाद स्थित शिव शक्ति मेडिकल से प्रयागराज की जीवेश ड्रग एजेंसी को नकली दवा की आपूर्ति की गई। शिकायत के बाद औषधि निरीक्षक संदेश मौर्य और विवेक कुमार सिंह ने जांच शुरू की। शुरुआती निरीक्षण में फर्म बंद मिली। बाद में जांच के दौरान फर्म संचालक दवाओं की खरीद से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 5 जनवरी 2026 को सहायक आयुक्त औषधि ने फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया।

लाइसेंस रद्द होने के बाद भी जारी रहा कारोबार

एफएसडीए के अनुसार, लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद शिव शक्ति मेडिकल के नाम से दवाओं की खरीदबिक्री जारी रही। इसी दौरान गाजियाबाद से सूचना मिली कि ग्लेनमार्क कंपनी के टेल्माएएम और टेल्माएच ब्रांड की कथित नकली दवाएं बरामद हुई हैं, जिनकी आपूर्ति शिव शक्ति मेडिकल के नाम से जारी फर्जी इनवॉइस के जरिए की गई थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और जीएसटी रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। जांच में यह भी सामने आया कि दवाओं से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और बैच डिटेल्स डिलीट कर दिए गए थे, जिससे कथित जीएसटी चोरी और फर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके।

कर्ज के बदले इस्तेमाल किया गया लाइसेंस और जीएसटी नंबर

एफएसडीए की जांच में फर्म संचालक कपिल जायसवाल ने बताया कि उन्होंने 18 हजार रुपये का कर्ज लिया था। आरोप है कि इसी के एवज में विद्या फार्म के संचालक प्रियांशु पाल और उनके भाई सुधांशु पाल ने उनके रद्द लाइसेंस, जीएसटी नंबर और सॉफ्टवेयर आईडीपासवर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी बिल तैयार किए। इसके बदले उन्हें तीन से 18 प्रतिशत तक नकद कमीशन दिया जाता था।

कई जिलों में सप्लाई के मिले साक्ष्य

जांच एजेंसी के अनुसार, बंद या बिना भंडारण वाली दवा फर्मों के लाइसेंस और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार किए गए और कानपुर, गोरखपुर समेत कई जिलों में शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य दवाओं की सप्लाई की गई। 24 जुलाई को विद्या फार्मा का निरीक्षण किया गया, जहां कोई दवा नहीं मिली। हालांकि मौके से एक लैपटॉप जब्त किया गया, जिसे जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। आरएन फार्मा भी बंद मिली।

पांच कारोबारियों के खिलाफ एफआईआर

कैसरबाग पुलिस ने औषधि निरीक्षक की तहरीर पर शिव शक्ति मेडिकल के संचालक कपिल जायसवाल, मीत इंटरप्राइजेज के मालिक हरमीत सिंह, प्रियांशु पाल, आरएन फार्मा के संचालक साहिल जैदी और आबिद अली अतहर के खिलाफ नकली दवाओं के कारोबार, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इंस्पेक्टर कैसरबाग अंजनी कुमार मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी बिलों के जरिए चलता था पूरा सिंडिकेट

एफएसडीए का दावा है कि अमीनाबाद की कई दवा फर्मों के माध्यम से एक संगठित नेटवर्क फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार कर नकली और अमानक दवाओं की आपूर्ति कर रहा था। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जांच में बिना बिल दवाओं की खरीद, बंद फर्मों के लाइसेंस और सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग तथा जीएसटी चोरी के भी साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।

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