लखनऊ से नोएडा तक, यूपी के ये 20 बिल्डर्स घर खरीदने वालों को करते हैं सबसे ज्यादा परेशान; एकएक की डिटेल

लखनऊ से नोएडा तक, यूपी के ये 20 बिल्डर्स घर खरीदने वालों को करते हैं सबसे ज्यादा परेशान; एकएक की डिटेल

अगर आप उत्तर प्रदेश में घर या फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ लोकेशन, कीमत और सुविधाएं देखकर बिल्डर चुनना भारी पड़ सकता है. घर खरीदने के बाद प्रोजेक्ट में देरी, कब्जा मिलने में परेशानी और बिल्डर से जुड़े विवाद जैसी दिक्कतें खरीदारों के लिए बड़ी चिंता बन जाती हैं. यूपी रेरा की सालाना रिपोर्ट 202223 में ऐसे 20 डेवलपर्स और प्रमोटर्स की लिस्ट दी गई है, जिनके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं. इस दौरान यूपी रेरा में रेरा एक्ट की धारा 31 के तहत कुल 6334 शिकायतें दर्ज हुईं.

लखनऊ से नोएडा तक, यूपी के ये 20 बिल्डर्स घर खरीदने वालों को करते हैं सबसे ज्यादा परेशान; एकएक की डिटेल

इनमें अकेले गौतमबुद्धनगर में 3906 शिकायतें सामने आईं, जबकि गाजियाबाद में 979 और लखनऊ में 977 शिकायतें दर्ज हुईं. सबसे ज्यादा शिकायतों वाली लिस्ट में अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे ऊपर है, जिसके खिलाफ 303 शिकायतें दर्ज हुईं. इसके बाद गौरसन्स हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर, वेव मेगासिटी सेंटर, एटीएस रियल्टी और जयप्रकाश एसोसिएट्स का नाम आता है. तो लखनऊ से नोएडा तक किन 20 बिल्डर्स के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं और इनका पूरा आंकड़ा क्या है, आइए जानते हैं.

  1. अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इस लिस्ट में सबसे ऊपर अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर का नाम है. यूपी रेरा की सालाना रिपोर्ट 202223 के मुताबिक, वित्तीय वर्ष के दौरान इस कंपनी के खिलाफ कुल 303 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा लिस्ट में शामिल बाकी सभी 19 कंपनियों से काफी ज्यादा है, दूसरे नंबर पर मौजूद कंपनी के मुकाबले भी यह लगभग दोगुना है.
  2. गौरसन्स हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर लिस्ट में दूसरे नंबर पर गौरसन्स हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का नाम है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 202223 में इस कंपनी के खिलाफ अथॉरिटी में 146 शिकायतें दर्ज हुईं.
  3. वेव मेगासिटी सेंटर तीसरे नंबर पर वेव मेगासिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड है. यूपी रेरा के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 202223 में इस कंपनी के खिलाफ 143 शिकायतें दर्ज हुईं, जो दूसरे नंबर पर मौजूद गौरसन्स हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर से सिर्फ तीन कम हैं.
  4. एटीएस रियल्टी चौथे नंबर पर एटीएस रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड का नाम दर्ज है. रिपोर्ट के मुताबिक इस कंपनी के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 138 शिकायतें अथॉरिटी में दर्ज हुईं. यह आंकड़ा टॉप तीन कंपनियों से कम जरूर है, लेकिन लिस्ट में शामिल बाकी कंपनियों के मुकाबले फिर भी काफी ऊपर है.
  5. जयप्रकाश एसोसिएट्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में यूपी रेरा में 133 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी टॉप20 लिस्ट में पांचवें नंबर पर है. यह आंकड़ा चौथे नंबर पर मौजूद एटीएस रियल्टी से पांच कम है, लेकिन छठे नंबर की कंपनी से ज्यादा है.
  6. गौरसन्स रियलटेक छठे नंबर पर गौरसन्स रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड है, जिसके खिलाफ रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 202223 में 123 शिकायतें दर्ज हुईं. गौर करने वाली बात यह है कि गौरसन्स समूह की दो अलगअलग कंपनियां गौरसन्स हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर और गौरसन्स रियलटेक, दोनों ही इस टॉप20 लिस्ट में शामिल हैं.
  7. डब्ल्यूटीसी नोएडा डेवलपमेंट कंपनी डब्ल्यूटीसी नोएडा डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 122 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी लिस्ट में सातवें नंबर पर है. यह आंकड़ा छठे नंबर पर मौजूद गौरसन्स रियलटेक से सिर्फ एक कम है.
  8. उत्तम स्टील्स एंड एसोसिएट्स आठवें नंबर पर एम/एस उत्तम स्टील्स एंड एसोसिएट्स का नाम है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यूपी रेरा की रिपोर्ट के मुताबिक इस कंपनी के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 117 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा सातवें नंबर की डब्ल्यूटीसी नोएडा डेवलपमेंट कंपनी से पांच कम और नौवें नंबर की कंपनी से दस ज्यादा है.
  9. उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में अथॉरिटी में 107 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी टॉप20 लिस्ट में नौवें नंबर पर है. यह आंकड़ा आठवें नंबर की उत्तम स्टील्स एंड एसोसिएट्स से दस कम है.
  10. यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट दसवें नंबर पर यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से जुड़ी परियोजनाएं हैं, जिनके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 105 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा नौवें नंबर की उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स से दो कम है.
  11. एआर लैंडक्राफ्ट एलएलपी एआर लैंडक्राफ्ट एलएलपी के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में ठीक 100 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी लिस्ट में ग्यारहवें नंबर पर है. यह आंकड़ा दसवें नंबर की यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट से पांच कम है.

प्रतीक रियलटर्स इंडिया बारहवें नंबर पर प्रतीक रियलटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है, जिसके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 98 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा ग्यारहवें नंबर की एआर लैंडक्राफ्ट एलएलपी से सिर्फ दो कम है. इसके साथ ही यह कंपनी 100 से कम शिकायतों वाली लिस्ट में सबसे ऊपर आती है, यानी इस कंपनी के बाद से शिकायतों की संख्या दो अंकों में सिमटती जाती है.

रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 202223 में 91 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी लिस्ट में तेरहवें नंबर पर है. यह आंकड़ा बारहवें नंबर की प्रतीक रियलटर्स इंडिया से सात कम है. इस नंबर के बाद से टॉप20 लिस्ट की बाकी कंपनियों के खिलाफ शिकायतों की संख्या धीरेधीरे घटती हुई नजर आती है.

पार्थ इंफ्राबिल्ड चौदहवें नंबर पर पार्थ इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड है, जिसके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 89 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा तेरहवें नंबर की रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट्स से दो कम है, वहीं पंद्रहवें नंबर की कंपनी से सात ज्यादा है. इस तरह पार्थ इंफ्राबिल्ड भी उन कंपनियों में शामिल है जिनके खिलाफ होम बायर्स ने बड़ी संख्या में शिकायत दर्ज कराई है.

यूपी आवास एवं विकास परिषद पंद्रहवें नंबर पर यूपी आवास एवं विकास परिषद यानी प्रदेश सरकार का अपना हाउसिंग और डेवलपमेंट अथॉरिटी है, जिसके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 82 शिकायतें दर्ज हुईं. गौर करने वाली बात यह है कि लिस्ट में शामिल यह इकलौता सरकारी अथॉरिटी है, बाकी सभी प्राइवेट रियल एस्टेट कंपनियां हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में भी होम बायर्स की शिकायतें कम नहीं हैं.

राइज प्रोजेक्ट्स राइज प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में यूपी रेरा में 79 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी लिस्ट में सोलहवें नंबर पर है. यह आंकड़ा पंद्रहवें नंबर की यूपी आवास एवं विकास परिषद से तीन कम है. इस नंबर के बाद टॉप20 लिस्ट में शामिल बाकी बची चार कंपनियों की शिकायतें अस्सी के आंकड़े से भी नीचे हैं.

सहारा प्राइम सिटी सत्रहवें नंबर पर सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड है, जिसके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 71 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा सोलहवें नंबर की राइज प्रोजेक्ट्स से आठ कम है. इसके साथ ही यह टॉप20 लिस्ट की उन चार कंपनियों में शामिल है जिनके खिलाफ सबसे कम शिकायतें दर्ज हुई हैं, फिर भी ये आंकड़े प्रदेश की बाकी हजारों परियोजनाओं के मुकाबले काफी ज्यादा हैं.

वेव वन वेव वन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 202223 में 70 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते यह कंपनी लिस्ट में अठारहवें नंबर पर है. यह आंकड़ा सत्रहवें नंबर की सहारा प्राइम सिटी से सिर्फ एक कम है. गौर करने वाली बात यह है कि वेव समूह की दो कंपनियां वेव मेगासिटी सेंटर और वेव वन, दोनों ही इस टॉप20 लिस्ट में शामिल हैं.

शाइनसिटी इंफ्राप्रोजेक्ट उन्नीसवें नंबर पर शाइनसिटी इंफ्राप्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड है, जिसके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 67 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा अठारहवें नंबर की वेव वन से तीन कम है, वहीं बीसवें और आखिरी नंबर की कंपनी से चार ज्यादा है. इस तरह यह कंपनी टॉप20 लिस्ट में सबसे कम शिकायतों वाली कंपनियों में से एक है.

इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिस्ट में सबसे नीचे यानी बीसवें नंबर पर इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड है, जिसके खिलाफ वित्तीय वर्ष 202223 में 63 शिकायतें दर्ज हुईं. यह टॉप20 लिस्ट में शामिल सबसे कम शिकायतों वाली कंपनी है, फिर भी सबसे ऊपर मौजूद अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के मुकाबले यह आंकड़ा करीब पांच गुना कम है. इसी के साथ यूपी रेरा की टॉप20 शिकायत वाली कंपनियों की लिस्ट यहां पूरी होती है.

किन जिलों में दर्ज हुईं सबसे ज्यादा शिकायतें?

यूपी रेरा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 202223 में 30 से ज्यादा रजिस्टर्ड शिकायतों वाले जिलों में सबसे ऊपर गौतमबुद्धनगर रहा, जहां 3906 शिकायतें दर्ज हुईं. यह आंकड़ा बाकी सभी जिलों से कई गुना ज्यादा है. इसके बाद गाजियाबाद में 979 और लखनऊ में 977 शिकायतें दर्ज हुईं. आगरा में 93, मेरठ में 84, वाराणसी में 67, उन्नाव में 48, मथुरा में 36, जबकि प्रयागराज और कानपुर नगर में 3333 शिकायतें दर्ज हुईं. साफ है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे एनसीआर क्षेत्र के जिलों में होम बायर्स की शिकायतें बाकी राज्य के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं, जो इन इलाकों में बिल्डरों की समय पर प्रोजेक्ट पूरा न कर पाने की समस्या को दिखाता है. ऐसे में घर खरीदने से पहले संबंधित बिल्डर और प्रोजेक्ट की स्थिति यूपी रेरा की वेबसाइट पर जरूर चेक कर लें.

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