लखनऊ : हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, अवमानना पर पांच माह की मोहलत

लखनऊ : हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, अवमानना पर पांच माह की मोहलत

लखनऊ, अमृत विचार : गोमतीनगर विस्तार स्थित खरगापुर में तालाब, ऊसर और बंजर के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का अनुपालन न होने पर दायर अवमानना याचिका में नगर निगम की ओर से अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने फिलहाल अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी, लेकिन याचिकाकर्ता को दोबारा अवमानना कार्यवाही शुरू कराने की छूट दे दी है।

मामला पीआईएल नंबर 220 विनय मिश्रा बनाम राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। 19 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित अधिकारियों को खरगापुर स्थित गाटा संख्या 248, 227 सा, 228, 246 और 247 की भूमि का निरीक्षण कराने का निर्देश दिया था। याचिका में इन जमीनों को राजस्व अभिलेखों में तालाब, ऊसर और बंजर के रूप में दर्ज बताते हुए अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया था कि नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को 13 मार्च 2026 को मौके पर जाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी थी, लेकिन किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर कार्रवाई नहीं हो सकी और इसे स्थगित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने अपने 19 मार्च के आदेश में निर्देश दिया था कि संबंधित अधिकारी उक्त भूमि का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि सार्वजनिक भूमि पर किसी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है या नहीं। यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो प्रभावित व्यक्तियों को उचित सुनवाई का अवसर देने के बाद तीन माह के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।

आदेश का अनुपालन न होने पर दायर हुई अवमानना याचिका

निर्धारित अवधि में आदेश का अपेक्षित अनुपालन न होने पर याचिकाकर्ता ने कंटेम्ट अप्लिकेशन दाखिल की। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने की। सुनवाई में नगर निगम की ओर से अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान ने अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया। शपथपत्र के आधार पर कोर्ट को बताया गया कि अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
90 दिन में होगा मुकदमों का निस्तारण

कोर्ट को यह भी बताया गया कि धारा 67 के तहत शुरू की गई कार्यवाही को, यदि कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं हुई, तो 90 दिनों के भीतर निस्तारित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद इन कार्यवाहियों में आने वाले अंतिम निर्णय के आधार पर संबंधित जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल आगे की अवमानना कार्यवाही को आवश्यक नहीं माना और अवमानना याचिका को रिकॉर्ड में दाखिल कर दिया। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को महत्वपूर्ण राहत देते हुए स्पष्ट किया कि यदि 19 मार्च 2026 के मूल आदेश का उसकी वास्तविक भावना के अनुरूप पांच माह के भीतर अनुपालन नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता इस अवमानना कार्यवाही को पुन जीवित कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

अतिक्रमणकारियों को भी मिलेगा सुनवाई का अवसर

हाईकोर्ट के मूल आदेश में स्पष्ट किया गया था कि यदि सरकारी अथवा सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो प्रभावित व्यक्तियों को उचित अवसर देने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, वर्तमान अवमानना मामले में अधिकारियों द्वारा धारा 67 की कार्यवाही शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

पांच महीने आदेश का पालन नहीं तो अवमानना की कार्रवाई

इस प्रकार खरगापुर की विवादित सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत चल रही कार्यवाही के परिणाम पर निर्भर करेगी। यदि पांच माह की अवधि में हाईकोर्ट के आदेश का वास्तविक रूप से अनुपालन नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता को अवमानना कार्यवाही दोबारा शुरू कराने का अधिकार रहेगा।

 

ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *